बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 61.1 लाख मतदाताओं के नाम कटना तय हो गया है। गुरुवार को चुनाव आयोग ने बताया कि अबतक के पुनरीक्षण अभियान के दौरान 21.6 लाख मतदाताओं के मृत होने की सूचना मिली है।
वहीं, 31.5 लाख मतदाता स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले गए हैं। जबकि, 7 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए हैं। वहीं, एक लाख ऐसे भी मतदाता हैं, जिनको ढूंढ़ा ही नहीं जा सका है। इनकी कोई जानकारी नहीं है। आयोग ने ये जानकारी बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) और राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंटस (बीएलए) द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर दी है। ऐसे में, इन मतदाताओं के नाम एक अगस्त को प्रकाशित होने वाले प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं होंगे।
छूटे तो नाम जुड़वाने को फॉर्म-6 भरना होगा
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में 26 जुलाई तक शामिल होने से छूटे मतदाताओं को प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद अपने नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करना होगा।
तब वे गणना फॉर्म नहीं भर सकेंगे, बल्कि उन्हें मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म -6 भर कर आवश्यक दस्तावेज की प्रति के साथ आवेदन करना होगा। उसी आवेदन के आधार पर निर्वाची पदाधिकारी द्वारा जांच कर मतदाता सूची में उनका नाम शामिल कराने का निर्णय लिया जाएगा। हालांकि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर समय की कोई मोहलत दिए जाने से इनकार किया है। बुधवार को आयोग ने स्पष्ट किया कि 1 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक का समय दावा-आपत्ति से संबंधित है। जो मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए जारी 24 जून के निर्देशों में पूर्व से निर्धारित है। कोई भी मतदाता या कोई भी राजनीतिक दल 1 सितंबर तक यदि कोई नाम छूट गया हो तो दावा प्रस्तुत कर सकते हैं या किसी गलत नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। जानकारी के अनुसार, प्रारूप मतदाता सूची 1 अगस्त को प्रकाशित की जाएगी।
इसकी मुद्रित तथा डिजिटल प्रतियां सभी 12 राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रारूप सूची वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहेगी।







