पाकिस्तान एक बार फिर अमेरिका और चीन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में लगा है. इस बार उसका तरीका थोड़ा अलग है. पाकिस्तान की सरकार और सेना एक साथ दो दुश्मन देशों से एक साथ अपने रिश्ते मजबूत करने में जुटी है. भारत इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने अपनी पहले से तय श्रीलंका और इंडोनेशिया की यात्रा रद्द कर दी और अचानक चीन पहुंच गए. वहां उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी और सेना के बड़े अफसरों से मुलाकात की.
जब मुनीर चीन में थे, तभी पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार अमेरिका के दौरे पर हैं और उन्होंने वहां अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत की. पाकिस्तान सोच कर तो गया था दुनिया के दो धड़े उसे एक साथ अपना करीबी मानेंगे. लेकिन चीन और अमेरिका में जो हुआ है वह दिखाता है कि पाकिस्तान अजीब स्थिति में फंसा है. चीन में जहां पाकिस्तान को फटकार लग रही है, वहीं अमेरिका उसे पुचकारने में लगा है.
चीन से मिली फटकार
बीजिंग में हुई बातचीत में पाकिस्तान को चीन ने सीधी-सीधी फटकार लगाई. चीन ने साफ कह दिया है कि पाकिस्तान चीनी लोगों, कंपनियों और प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा करे. चीन ने चेताया कि पाकिस्तान को अपने देश में काम कर रहे चीनी लोगों की पूरी सुरक्षा देनी होगी, खासकर CPEC जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के मामले में. दूसरी ओर अमेरिका में पाकिस्तान की कोशिशें कुछ और इशारा कर रही हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात में कहा कि वो दोनों देशों के बीच बेहतर रिश्ते चाहते हैं.
पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने दावा किया है कि उनका देश अमेरिका के साथ एक अहम व्यापार समझौते के बेहद करीब है. लेकिन इस दौरान उन्हें TRF पर प्रतिबंधों का भी स्वागत करना पड़ा. इशाक डार ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत में कहा कि उन्हें इस बात से कोई आपत्ति नहीं है कि द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है. हालांकि पाकिस्तान ने यहां अपनी असलियत दिखाते हुए यह भी कह दिया कि वह TRF के खिलाफ पक्के सबूत मिलने पर ही कार्रवाई करेगा. इसके साथ ही कहा कि TRF को हाफिज सईद के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ना गलत है. डार यह बयान देकर अमेरिका को भी नाराज कर रहे हैं. क्योंकि 17 जुलाई को टीआरएफ पर प्रतिबंध लगाते हुए अमेरिका ने साफ यह माना कि इसका संबंध लश्कर-ए-तैयबा से है.







