हाल में ही गोपाल खेमका के हत्या आरोपियों के पकड़े जाने पर कुंदन साहब की खूब वाह वाही हुई थी. आखिर वही सूबे की एसटीएफ के मुखिया भी हैं. उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीबी भी माना जाता है. होंगे भी, क्योंकि बहुत से अहम ओहदों पर रह चुके हैं. यही नहीं खुद भी नालंदा जिले के रहने वाले हैं. उनकी पैदाइश जब हुई थी तो देश के तकरीबन सभी घर किसानों या खेतिहर मजदूरों के ही थे. आलम ये था कि भले ही परिवार-खानदान में कुछ लोग नौकरी या व्यापार कर रहे हो, लेकिन बाकी लोग खेती से किसी न किसी तरह से जुड़े रहते थे. निश्चित तौर पर एडीजी कृष्णन के परिवार और खानदान के लोग भी खेती से ही जुडें रहे होंगे. इनकी पैदाइश का साल 1969 है.
आज भी बिहार में खेती रोजगार का सबसे अहम जरिया है. राज्य की सरकारें ऐसे हालात अभी तक कायम नहीं कर सकी कि कोई उद्यमी बिहार में बड़ा उद्योग लगाने की हिम्मत जुटा पाए. आजादी के पहले या शुरुआती दौर में ही जिन बड़े औद्योगिक घरानों ने वहां निवेश किया वही अभी तक है. बाकी हर बार बताया जाता है कि राज्य में इतना निवेश होगा. इस वजह से बहुत से लोग जिनके पास अपनी जमीने नहीं हैं वे लोग भी दूसरों की जमीन लेकर खेती करते हैं. लिहाजा ये नहीं कहा जा सकता कि बिहार में किसान थोड़ी संख्या में हैं और वही खाली हो कर अपराध कर रहे हैं.
ऐसे में एडीजी का बयान बेतुका ही नहीं आपत्तिजनक भी है. ये देश उन लोगों का है जिन्होंने ‘जय जवान जय किसान’ कहा था. आज भले ही देश की इकोनॉमी को ले जा कर सेवा क्षेत्र की ओर डाल दिया गया है फिर भी किसी मंच से बड़ा से बड़ा आधुनिक अर्थशास्त्री किसानों या खेती के बारे में कोई हल्की बात करने का दुस्साहस नहीं करता.
500-600 अपराधियों को सजा दिलाई जा रही
एडीजी ने कहा- संगीन एवं हिंसक अपराध में शामिल अपराधियों को सजा दिलाने के लिए राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट फिर से स्थापित करने की पहल शुरू की गई है. गृह विभाग को इससे संबंधित प्रस्ताव भेजा गया है, ताकि जल्द से जल्द इसे अमलीजामा पहनाया जा सके. 2012-13 तक फास्ट ट्रैक कोर्ट की मदद से सालाना दो से तीन हजार अपराधियों को उम्रकैद समेत अन्य सख्त सजाएं दिलाई जाती थी. वर्तमान में सालाना 500-600 अपराधियों को सख्त सजा दिलाई जा रही है.
एडीजी कृष्णन ने जानकारी दी कि राज्य में 1290 ऐसे अपराधियों को चिन्हित किया गया है, जिन्होंने आपराधिक गतिविधि की बदौलत संपत्ति अर्जित की है. इन सभी की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया पुलिस शुरू करने जा रही है. उन्होंने कहा कि अवैध हथियार या पिता की लाइसेंसी हथियार के साथ कोई नाबालिग पकड़ा जाता है, तो उसके अभिभावक या पिता को भी जेल होगी.
बिहार में बढ़ी हैं अपराध की घटनाएं
एडीजी का कहना था कि बिहार में अपराध की घटनाएं नहीं बढ़ी हैं. पिछले साल मई-जून में जितने अपराध हुए हैं, उसकी तुलना में इस वर्ष आपराधिक वारदातें कम हुईं हैं. सबसे ज्यादा हत्याएं अप्रैल-जून में होती रहती हैं. किसानों के पास काम नहीं होता, इसलिए ज्यादा क्राइम होता है. एडीजी कुंदन कृष्णन ने यह जानकारी देते हुए कहा कि दानापुर ज्वेलरी शॉप, आरा में तनिष्क लूट कांड, समस्तीपुर में महाराष्ट्र बैंक लूट कांड जैसी तमाम वारदातों में शामिल अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. लूट की दर्जनभर घटनाओं को होने से पहले ही बचाया जा चुका है. यह एसटीएफ के विशेष इंटेलिजेंस का नतीजा है. दूसरे राज्यों में घटनाओं को अंजाम देने वाले अपराधियों को बड़ी संख्या में गिरफ्तार किया जा चुका है. इस साल जनवरी से अब तक ऐसे 700 से अधिक अपराधियों को एसटीएफ गिरफ्तार कर चुका है.
अमरजीत भोक्ता की गिरफ्तारी
एडीजी ने कहा कि राज्य में नक्सली वारदातें नहीं हो रही हैं. नक्सलियों के गढ़ गया, औरंगाबाद, मुंगेर, जमुई समेत अन्य इलाकों में इनका तकरीबन सफाया हो गया है. इस वर्ष जनवरी से अब तक 82 नक्सली दबोचे जा चुके हैं. इसका नतीजा है कि गया, औरंगाबाद समेत आसपास के इलाकों में नक्सलियों के हथियारबंद दस्ता का सफाया हो गया है. अमरजीत भोक्ता की गिरफ्तारी के बाद यह मामला अब बदल गया है. सिर्फ जमुई, खड़गपुर के इलाकों में कुछ हथियारबंद दस्ते बचे हुए हैं. इनका सफाया भी जल्द हो जाएगा.







