जदयू ने अपनी 22 साल की सियासी यात्रा में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। बावजूद इसके बीते दो दशकों से वह बिहार की राजनीति की धुरी बना हुआ है। 2015 और 2020 के चुनाव इसके प्रमाण हैं। जदयू जिस गठबंधन के साथ रहा, सरकार उसकी बनी। हालांकि जदयू सियासी दांव का भी शिकार हुआ। 2020 में इसी वजह से उसकी सीटें भी कम हुईं लेकिन उसके वोट प्रतिशत में खास अंतर नहीं आया।
नीतीश कुमार जब सत्ता में आए तो महिलाओं और अति पिछड़ों के लिए जो फैसले किये, वह बाद में उनके जनाधार का आधार बनता गया। भविष्य में इसका और विस्तार होता गया। जदयू से कुछ सियासी चूक भी हुई। जैसे एनडीए से अलग होने का उसका फैसला गलत साबित हुआ। जदयू को राष्ट्रीय राजनीति की भूमिका में जनता ने स्वीकार नहीं किया। 2014 में जदयू को अकेले लड़ने पर हार मिली। दो गठबंधनों की सीधी लड़ाई में जदयू हाशिये पर चला गया। नीतीश कुमार ने तत्काल इस गलती को सुधारा और अगले वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-राजद के साथ महागठबंधन बनाया। इस गठबंधन की बिहार में जीत हुई। कालांतर में जदयू को यह अहसास हुआ कि एनडीए से अलग होने का फैसला सही नहीं था। अब नीतीश कुमार सार्वजनिक तौर पर कह रहे हैं कि एनडीए से अलग होने का फैसला गलत था। इसके लिए वे अपने कुछ साथियों को कोसते भी हैं।
नीतीश कुमार का बड़ा जनाधार है। इसीलिए दोनों गठबंधन उनके साथ आने को हमेशा तैयार रहे। गठबंधन कोई भी, नीतीश कुमार को नेता स्वीकारने में किसी को हिचक नहीं रही। जदयू बिहार की राजनीति में छल का भी शिकार हुआ। 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान और उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी ने जदयू को भारी झटका दिया। दोनों ने एनडीए के आधार वोट में सेंधमारी कर जदयू को नुकसान पहुंचाया। लेकिन जदयू इससे भी बाहर निकल आया। उसकी सीटें भले कम हुईं, लेकिन सत्ता की बागडोर उसके पास ही रही।
वर्ष 2003 में 30 अक्टूबर को जदयू का गठन हुआ। तब शरद यादव के नेतृत्व वाले जनता दल और नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली समता पार्टी का विलय हुआ और नये राजनीतिक दल जनता दल (यूनाइटेड) का जन्म हुआ। धीरे-धीरे यह राजनीतिक दल बिहार की राजनीति में अपनी ताकत बढ़ाने लगा। भाजपा के साथ मिलकर जदयू ने एनडीए को नयी पहचान दी। महज दो वर्षों के अंदर ही इसने राजद-कांग्रेस की जमी-जमाई राजनीति का अंत करके उसे सत्ता से बाहर कर दिया। हालांकि 2005 में फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, लेकिन नवंबर में हुए चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए को स्पष्ट जनादेश मिल गया। उसने ऐतिहासिक जीत हासिल की और महागठबंधन के शासन का पूरी तरह से अंत कर दिया। साथ ही बिहार में लालू-राबड़ी युग का भी अंत हो गया। नीतीश कुमार सूबे के मुख्यमंत्री बने। फरवरी 2005 के विधानसभा चुनाव में जदयू 138 सीटों पर चुनाव लड़ा और उसे 55 सीटों पर जीत मिली। लेकिन इसी साल नवंबर में हुए चुनाव में उसकी सीटों की संख्या डेढ़ गुनी से अधिक बढ़ गयी। जदयू ने 139 सीटों पर चुनाव लड़कर 88 पर जीत हासिल की। इस दौरान उसके वोट में भी पांच फीसदी का इजाफा हो गया। जदयू ने एनडीए के बैनर तले 2010 तक खूब बढ़िया से शासन चलाया। इस साल हुए विधानसभा चुनाव में जदयू के नेतृत्व में एनडीए ने ऐतिहासिक जीत हासिल की। उसे 243 में 206 सीट मिली। जदयू ने 144 सीटों पर चुनाव लड़कर 115 सीटों पर जीत पायी। इस बार उसके वोट में दो प्रतिशत की और बढ़ोतरी हुई। सरकार बेहतर ढंग से काम कर रही थी। लेकिन लोकसभा चुनाव में महाराजगंज सीट पर जदयू प्रत्याशी पीके शाही की हार हो गई। जदयू को लगा कि भाजपा ने उसके पक्ष में कम मेहनत की। इसके बाद खटास बढ़ने लगी। उस दौर में भाजपा के कुछ नेताओं की ओर से नीतीश कुमार नेतृत्व पर भी टीका-टिप्पणी शुरू हो गई। जदयू ने भी पीएम उम्मीदवारी का विरोध कर दिया। 2014 में भाजपा द्वारा नरेन्द्र मोदी को चुनाव प्रचार कमेटी का प्रमुख बनाये जाने के बाद जदयू ने भाजपा के साथ 17 वर्षों का संबंध तोड़ दिया। जदयू ने सीपीआई के साथ मिलकर लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन केवल दो सीटों पर ही उसे सफलता मिली। नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा देकर जीतन राम मांझी को गद्दी सौंप दी। पर मांझी के बगावती सुर के बाद उन्हें हटाकर नीतीश कुमार फिर से सीएम बने। उधर, अगले साल 2015 में विधानसभा चुनाव में जदयू ने एनडीए छोड़ महागठबंधन का दामन थाम लिया। जदयू, राजद और कांग्रेस का महागठबंधन बना। महागठबंधन को 178 सीटें मिलीं और सूबे में नया राजनीतिक परिदृश्य उभरकर सामने आया। जदयू 101 सीट पर लड़ा और उसे 71 पर जीत मिली। नीतीश कुमार फिर मुख्यमंत्री बने। लेकिन सहयोगी राजद के कारण बढ़ती परेशानी के बीच नीतीश कुमार ने 26 जुलाई 2017 को महागठबंधन छोड़ दिया और सीएम के पद से भी इस्तीफा दे दिया। वे एनडीए में वापस लौट गए और अगले ही दिन उन्होंने भाजपा के सहयोग से फिर से सरकार बनाने का ऐलान किया। 28 जुलाई 2017 को उन्होंने विधानसभा में बहुमत भी साबित कर दिया। वर्ष 2020 में हुए विस चुनाव एनडीए का नेतृत्व किया और भाजपा, हम और वीआईपी के साथ गठबंधन बनाया। जदयू 115 सीटों पर चुनाव लड़ा और उसे 43 पर जीत मिली। इस बार जदयू को 15.4 % वोट मिले। चिराग की लोजपा (आर) और उपेन्द्र कुशवाहा की रालोसपा ने जदयू के वोट बैंक में सेंधमारी कर लगभग 40-45 सीटों पर परिणाम प्रभावित किया। इसके बावजूद एनडीए को स्पष्ट बहुमत आया। भाजपा को 74 और हम और वीआईपी को चार-चार सीटें मिलीं। नीतीश कुमार एनडीए नेता के रूप में फिर से मुख्यमंत्री बने।
लोकसभा चुनाव में जदयू का प्रदर्शन
वर्ष लड़े जीते वोट प्रतिशत स्ट्राइक रेट
2004 24 06 22.36 25%
2009 25 20 24.04 80%
2014 38 02 16.04 5%
2019 17 16 21.81 94%
2024 16 12 18.52 75%
लोकसभा चुनाव में जदयू की ताकत समय के अनुसार बढ़ती-घटती रही है। हालांकि असफलता से पार्टी ने बहुत जल्द सीखना भी जारी रखा और अगली बार और बड़ी ताकत बनकर उभरा। अपने गठन के महज एक साल के बाद ही 2004 में छह सीटों पर जीत प्राप्त की। हालांकि 24 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। 2009 के लोकसभा चुनाव में उसने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा और इसमें 20 पर जीत मिली। 80 फीसदी स्ट्राइक रेट के साथ उसका प्रदर्शन सबसे शानदार रहा। पर, यह चमक 2014 के लोकसभा चुनाव में फीकी पड़ गयी। 38 सीटों पर चुनाव लड़ने के बाद भी उसे केवल दो सीटों नालंदा और पूर्णिया पर जीत मिल सकी। एनडीए में जदयू की वापसी के बाद 2019 में जदयू ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और 16 पर जीत हासिल की।
जदयू ने एनडीए की केन्द्र सरकार में महती जिम्मेवारी निभायी है। अटल बिहारी वाजपेयी और नरेन्द्र मोदी की सरकार में पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वाजपेयी सरकार में 2004 तक नीतीश कुमार ने रेलमंत्री का अहम पद संभाला। इसी कैबिनेट में शरद यादव को भी मंत्री बनाया गया था। इसके बाद दिल्ली में महागठबंधन की सरकार आ गयी। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2014 में दिल्ली में भाजपा की सरकार बनने के समय जदयू एनडीए से बाहर था। लिहाजा, उसे अवसर नहीं मिला, लेकिन एनडीए शामिल होने के बाद वर्ष 2021 में आरसीपी सिंह को केन्द्रीय इस्पात मंत्री की जिम्मेवारी मिली। उसके बाद मौजूदा मोदी सरकार में जदयू के दो मंत्री हैं। कैबिनेट मंत्री के रूप में राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और कृषि राज्यमंत्री के रूप में रामनाथ ठाकुर को इसमें शामिल किया गया है।







