विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन और एनडीए अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में व्यस्त हैं. दोनों गठबंधनों के कुछ घटक दल अपने नेता के जितने समर्थन में हैं, उतने ही बगावती अंदाज में भी दिख रहे हैं. एलजेपीआर के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान बिहार एनडीए के अगुआ नीतीश कुमार की नाक में दम किए हुए हैं तो महागठबंधन में वीआईपी के मुकेश सहनी अलग ही तेवर अपनाए हुए हैं. चिराग पासवान विधानसभा की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणाएं कर रहे हैं तो मुकेश सहनी का कहना है कि अगर उन्हें डेप्युटी सीएम नहीं बनाया गया तो तेजस्वी यादव भी सीएम नहीं बनेंगे. तेजस्वी यादव के सामने परेशानियों का पहाड़ खड़ा होते जा रहा है. उनके बड़े भाई तेज प्रताप के प्रेम प्रसंग से पार्टी और परिवार के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है.
नवादा और रजौली के विधायकों ने तेजस्वी के नेतृत्व पर अंगुली उठा दी है. सीट बंटवारा भी तेजस्वी के लिए कम समस्या नहीं है. आरजेडी का पुराना समीकरण एम-वाई (मुस्लम-यादव) भी दरक रहा है. हाल ही में तकरीबन 200 मुसलमानों ने एमएलसी खालिद अनवर के नेतृत्व में जेडीयू ज्वाइन कर सबको चौंका दिया है. रेलवे में नौकरी के बदले जमीन मामले की तलवार भी तेजस्वी के सिर पर लटक रही है. तेजस्वी की मुसीबत हाल के पप्पू यादव और कन्हैया कुमार के प्रकरण ने भी बढ़ा दी है.
तेज प्रताप का प्रेम प्रकरण
तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेज प्रताप यादव का प्रेम प्रसंग हाल के दिनों में काफी सुर्खियों में रहा है. ऐश्वर्या राय से तलाक के पहले ही तेज प्रताप यादव ने यह उजागर कर दिया कि शादी से पहले उनकी किसी दूसरी लड़की से चक्कर था. दोनों की रोमांटिक तस्वीरें भी तेज प्रताप यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट की. हल्ला मचा तो उन्होंने कुछ ही देर बाद जानकारी दी कि उनका अकाउंट हैक हो गया है. अब तो वे खुल्लमखुला कह रहे कि कोई गलत काम नहीं किया है. वे अनुष्का नाम की उस लड़की के घर भी गए, जिससे वे अपने संबंधों की बात स्वीकार करते हैं. इससे लालू यादव के परिवार की पिट रही भद और राजनीतिक नुकसान को देखते हुए आरजेडी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया. इतना ही नहीं, लालू ने उन्हें परिवार से बाहर करने की जानकारी भी सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक कर दी. तेज प्रताप यादव ने अब पार्टी का झंडा भी अपने वाहन से उतार दिया है. वे चुनाव लड़ने पर आमादा हैं. अपने घर पर कार्यकर्ताओं का दरबार सजा रहे हैं. वे अपने पुराने चुनाव क्षेत्र महुआ भी गुरुवार को गए थे और ऐलान किया कि लोग कहेंगे तो वे फिर महुआ से ही चुनाव लड़ेंगे. तेज प्रताप कितना नुकसान आरजेडी को पहुंचा पाएंगे, यह तो वक्त बताएगा. पर, घर फूटे, गंवार लूटे जैसी स्थिति तो तेजस्वी यादव के सामने आएगी ही.
बिहार के भूत पूर्व सीएम दारोगा प्रसाद राय की पौत्री और चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय से तेज प्रताप की शादी बड़े धूमधाम से हुई थी. बाद में लालू यादव परिवार से प्रताड़ित होकर उन्हें उनका घर छोड़ना पड़ा. उन्होंने तलाक का केस फाइल किया है. तलाक पर फैसला आने से पहले ही तेज प्रताप ने दूसरी लड़की से अपने संबंधों का खुलासा कर दिया है. जाहिर है कि यह ऐश्वर्या को अच्छा तो नहीं लगा होगा. उन्होंने दूसरी लड़की से तेज प्रताप के संबंध उजागर होने के बाद मीडिया के सामने जो कुछ कहा, वह तेज प्रताप से अधिक लालू यादव के परिवार के लिए घातक था. अगर वे चुनाव के दौरान अपने साथ हुए बर्ताव को लेकर लालू परिवार के खिलाफ मोर्चा खोलती हैं तो यह तेजस्वी की राह में बाधा होगी. विरोधी इसके लिए ऐश्वर्या को उकसाने में तनिक भी संकोच नहीं करेंगे.

तेजस्वी यादव कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.
पहली बार नाराजगी के स्वर
आरजेडी में नेतृत्व से किसी के नाराज होकर पार्टी छोड़ देने की नौबत भले आई हो, लेकिन पार्टी में रह कर विरोधी स्वर जल्दी नहीं फूटते. ऐसा पहली बार हुआ है, जब दो विधायकों ने बाजाप्ता प्रेस कान्फेंस कर तेजस्वी यादव के नेतृत्व को चुनौती दी है. ऩवादा की विधायक विभा देवी और रजौली के एमएलए प्रकाश वीर ने कहा है कि उन्हें बदनाम किया जा रहा है, जबकि खून-पसीने से उन लोगों ने पार्टी को सींचा है. दोनों विधायकों ने तेजस्वी यादव के कामकाज की शैली और उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए. दोनों विधायकों ने यह भी कहा कि वे आरजेडी से अलग नहीं होंगे. अभी तक आरजेडी में किसी नेता ने तेजस्वी के नेतृत्व और उनके कामकाज की शैली पर सवाल खड़ा नहीं किया था. विभा देवी और प्रकाश वीर लोकसभा चुनाव के दौरान भी पार्टी की गतिविधियों से कटे हुए थे. विभा देवी पूर्व विधायक और रेप केस में सजायाफ्ता राजवल्लभ यादव की पत्नी हैं. राजवल्लभ यादव का रसूख नवादा संसदीय क्षेत्र में आने वाले सभी विधानसभा सीटों पर माना जाता है.
मुस्लिमों का JDU में जाना
भाजपा के साथ जेडीयू के रहने और वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर समर्थन के कारण माना जा रहा था कि नीतीश कुमार से मुस्लिम समाज खफा है. इसकी झलक भी दिखी थी, जब रमजान के महीने में सरकारी इफ्तार पार्टी का मुस्लिम संगठनों ने बायकाट किया था. महागठबंधन की पार्टियां इस बात से उत्साहित थीं कि अब मुस्लिम वोट थोक भाव उन्हें ही मिलेंगे. लालू-राबड़ी राज के अंत के साथ ही मुसलमानों का झुकाव नीतीश कुमार की ओर हुआ था. इसका चुनावी लाभ भी जेडीयू को मिलता रहा है. वक्फ कानून बनने के बाद महागठबंधन में शामिल पार्टियों ने मुसलमानों पर डोरे डालने शुरू कर दिए थे. पर, आश्चर्यजनक पहलू यह है कि दो दिन पहले ही मोतीहारी में जेडीयू एमएलसी खालिद अनवर के प्रयास से 200 मुस्लिम युवकों ने जेडीयू की सदस्यता ग्रहण की. यह तेजस्वी यादव की उम्मीदों पर पानी फेरने वाली स्थिति है.

भाई तेज प्रताप को कंट्रोल करना पार्टी और तेजस्वी के लिए बड़ी चुनौती है.
Land for Job का लफड़ा
लालू यादव के रेल मंत्री रहते जमीन के बदले नौकरी देने का मामला (Land for Job) फिर जोर पकड़ रहा है. इसमें लालू यादव के परिवार के तकरीबन सभी लोगों के नाम शामिल हैं. तेजस्वी यादव पर आरोप है कि उन्होंने ऐसी संपत्ति का उपभोग किया. अगर यह संपत्ति उनके नाम थी तो उन्हें खुद इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए थी. तेजस्वी की दलील है कि जिस समय उनके नाम पर ऐसी संपत्ति आई, उस वक्त वे बालिग नहीं थे. अगर यह मामला आगे बढ़ता है तो तेजस्वी के जेल जाने की नौबत भी आ सकती है. इस बीच चारा घोटाला के एक मामले में लालू की सजा बढ़ाने की याचिका भी झारखंड हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली है. अगर इसका फैसला प्रतिकूल रहा तो लालू को फिर जेल जाने की नौबत आएगी, जो तेजस्वी यादव के लिए अच्छा नहीं माना जाएगा.
सीटों का साथियों में बंटवारा
इन सबसे इतर एक बड़ी समस्या तेजस्वी यादव के सामने महागठबंधन के साथी दलों के बीच सीटों का बंटवारा है. वीआईपी के मुकेश सहनी डेप्युटी सीएम पद की जिद ठाने हुए हैं. वे 60 सीटें मांग रहे हैं. कांग्रेस 70 सीटों से नीचे उतरने को तैयार नहीं. आरजेडी ने पिछले चुनाव में 144 पर लड़़ कर 75 सीटें जीती थीं. इस बार दो नए सहयोगियों के कारण आरजेडी को अपनी सीटें घटानी पड़ सकती हैं. कांग्रेस का जैसा हाव-भाव अभी तक दिखता रहा है, उससे यही लगता है कि तेजस्वी के लिए यह मुश्किल भरा काम है. कांग्रेस ने अगर दगा दिया तो उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी. कांग्रेस से खतरा इसलिए दिखता है कि अभी तक तेजस्वी को सीएम फेस घोषित करने में उसकी रजामंदी नहीं मिली है.

मुकेश सहनी अभी से डेप्यूटी सीएम का पद मांग रहे हैं.
पप्पू-कन्हैया प्रकरण का दोष
तेजस्वी की राह में बिना बुलाई मुश्किल कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार और पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव बन गए हैं. वोटर वैरिफिकशन के विरोध में बुलाए गए बिहार बंद के दौरान विपक्ष की एकजुटता तो दिखी, लेकिन राहुल गांधी के साथ रथ पर सवार होने से पप्पू यादव और कन्हैया कुमार को रोक दिया गया. कहा जा रहा है कि दोनों इससे काफी नाराज हैं और इसका दोष तेजस्वी यादव पर मढ़ रहे हैं. चर्चा तो यह भी है कि दोनों इतने खफा हैं कि वे प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ज्वाइन कर सकते हैं. जानकारी आ रही है कि कन्हैया कुमार की नाराजगी दूर करने के लिए राहुल गांधी ने उन्हें 14 जुलाई को दिल्ली बुलाया है. प्रसंगवश यह जिक्र जरूरी है कि तेजस्वी यादव दोनों को पसंद नहीं करते. कन्हैया कुमार सीपीआई के उम्मीदवार के रूप में जब बेगूसराय से 2019 में लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे तो आरजेडी ने उन्हें हराने के लिए अपना उम्मीदवार उतार दिया था. पप्पू यादव के खिलाफ भी इस बार लोकसभा चुनाव में आरजेडी ने बीमा भारती को उम्मीदवार बना दिया था.
ब्रह्मेश्वर मुखिया का जिन्न
हाल ही में आरजेडी की एक प्रवक्ता ने रणवीर सेना के प्रमुख रहे स्व. ब्रह्मेश्वर मुखिया के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इसे लेकर कुछ दिनों तक खूब बावेला मचा. इससे भूमिहार समाज आरजेडी से खफा है. हालांकि पहले भी भूमिहार समाज आरजेडी को कम ही पसंद करता रहा है. अभी यह प्रकरण चल ही रहा था कि लालू यादव का पुराना स्लोगन भूराबाल साफ करो फिर गूंजने लगा है. आरजेडी नेता रंजीत यादव की मौजूदगी में भूराबाल साफ करो का नारा लगा. आरजेडी ने इस बयान से पल्ला तो झाड़ लिया है, लेकिन इसका प्रसार-प्रचार तो हो ही गया. इससे सवर्णों में खासा नाराजगी है. यह आरजेडी की राह में अवरोध का काम कर सकता है.
विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन और एनडीए अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में व्यस्त हैं. दोनों गठबंधनों के कुछ घटक दल अपने नेता के जितने समर्थन में हैं, उतने ही बगावती अंदाज में भी दिख रहे हैं. एलजेपीआर के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान बिहार एनडीए के अगुआ नीतीश कुमार की नाक में दम किए हुए हैं तो महागठबंधन में वीआईपी के मुकेश सहनी अलग ही तेवर अपनाए हुए हैं. चिराग पासवान विधानसभा की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणाएं कर रहे हैं तो मुकेश सहनी का कहना है कि अगर उन्हें डेप्युटी सीएम नहीं बनाया गया तो तेजस्वी यादव भी सीएम नहीं बनेंगे. तेजस्वी यादव के सामने परेशानियों का पहाड़ खड़ा होते जा रहा है. उनके बड़े भाई तेज प्रताप के प्रेम प्रसंग से पार्टी और परिवार के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है.
नवादा और रजौली के विधायकों ने तेजस्वी के नेतृत्व पर अंगुली उठा दी है. सीट बंटवारा भी तेजस्वी के लिए कम समस्या नहीं है. आरजेडी का पुराना समीकरण एम-वाई (मुस्लम-यादव) भी दरक रहा है. हाल ही में तकरीबन 200 मुसलमानों ने एमएलसी खालिद अनवर के नेतृत्व में जेडीयू ज्वाइन कर सबको चौंका दिया है. रेलवे में नौकरी के बदले जमीन मामले की तलवार भी तेजस्वी के सिर पर लटक रही है. तेजस्वी की मुसीबत हाल के पप्पू यादव और कन्हैया कुमार के प्रकरण ने भी बढ़ा दी है.
तेज प्रताप का प्रेम प्रकरण
तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेज प्रताप यादव का प्रेम प्रसंग हाल के दिनों में काफी सुर्खियों में रहा है. ऐश्वर्या राय से तलाक के पहले ही तेज प्रताप यादव ने यह उजागर कर दिया कि शादी से पहले उनकी किसी दूसरी लड़की से चक्कर था. दोनों की रोमांटिक तस्वीरें भी तेज प्रताप यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट की. हल्ला मचा तो उन्होंने कुछ ही देर बाद जानकारी दी कि उनका अकाउंट हैक हो गया है. अब तो वे खुल्लमखुला कह रहे कि कोई गलत काम नहीं किया है. वे अनुष्का नाम की उस लड़की के घर भी गए, जिससे वे अपने संबंधों की बात स्वीकार करते हैं. इससे लालू यादव के परिवार की पिट रही भद और राजनीतिक नुकसान को देखते हुए आरजेडी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया. इतना ही नहीं, लालू ने उन्हें परिवार से बाहर करने की जानकारी भी सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक कर दी. तेज प्रताप यादव ने अब पार्टी का झंडा भी अपने वाहन से उतार दिया है. वे चुनाव लड़ने पर आमादा हैं. अपने घर पर कार्यकर्ताओं का दरबार सजा रहे हैं. वे अपने पुराने चुनाव क्षेत्र महुआ भी गुरुवार को गए थे और ऐलान किया कि लोग कहेंगे तो वे फिर महुआ से ही चुनाव लड़ेंगे. तेज प्रताप कितना नुकसान आरजेडी को पहुंचा पाएंगे, यह तो वक्त बताएगा. पर, घर फूटे, गंवार लूटे जैसी स्थिति तो तेजस्वी यादव के सामने आएगी ही.
बिहार के भूत पूर्व सीएम दारोगा प्रसाद राय की पौत्री और चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय से तेज प्रताप की शादी बड़े धूमधाम से हुई थी. बाद में लालू यादव परिवार से प्रताड़ित होकर उन्हें उनका घर छोड़ना पड़ा. उन्होंने तलाक का केस फाइल किया है. तलाक पर फैसला आने से पहले ही तेज प्रताप ने दूसरी लड़की से अपने संबंधों का खुलासा कर दिया है. जाहिर है कि यह ऐश्वर्या को अच्छा तो नहीं लगा होगा. उन्होंने दूसरी लड़की से तेज प्रताप के संबंध उजागर होने के बाद मीडिया के सामने जो कुछ कहा, वह तेज प्रताप से अधिक लालू यादव के परिवार के लिए घातक था. अगर वे चुनाव के दौरान अपने साथ हुए बर्ताव को लेकर लालू परिवार के खिलाफ मोर्चा खोलती हैं तो यह तेजस्वी की राह में बाधा होगी. विरोधी इसके लिए ऐश्वर्या को उकसाने में तनिक भी संकोच नहीं करेंगे.

तेजस्वी यादव कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.
पहली बार नाराजगी के स्वर
आरजेडी में नेतृत्व से किसी के नाराज होकर पार्टी छोड़ देने की नौबत भले आई हो, लेकिन पार्टी में रह कर विरोधी स्वर जल्दी नहीं फूटते. ऐसा पहली बार हुआ है, जब दो विधायकों ने बाजाप्ता प्रेस कान्फेंस कर तेजस्वी यादव के नेतृत्व को चुनौती दी है. ऩवादा की विधायक विभा देवी और रजौली के एमएलए प्रकाश वीर ने कहा है कि उन्हें बदनाम किया जा रहा है, जबकि खून-पसीने से उन लोगों ने पार्टी को सींचा है. दोनों विधायकों ने तेजस्वी यादव के कामकाज की शैली और उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए. दोनों विधायकों ने यह भी कहा कि वे आरजेडी से अलग नहीं होंगे. अभी तक आरजेडी में किसी नेता ने तेजस्वी के नेतृत्व और उनके कामकाज की शैली पर सवाल खड़ा नहीं किया था. विभा देवी और प्रकाश वीर लोकसभा चुनाव के दौरान भी पार्टी की गतिविधियों से कटे हुए थे. विभा देवी पूर्व विधायक और रेप केस में सजायाफ्ता राजवल्लभ यादव की पत्नी हैं. राजवल्लभ यादव का रसूख नवादा संसदीय क्षेत्र में आने वाले सभी विधानसभा सीटों पर माना जाता है.
मुस्लिमों का JDU में जाना
भाजपा के साथ जेडीयू के रहने और वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर समर्थन के कारण माना जा रहा था कि नीतीश कुमार से मुस्लिम समाज खफा है. इसकी झलक भी दिखी थी, जब रमजान के महीने में सरकारी इफ्तार पार्टी का मुस्लिम संगठनों ने बायकाट किया था. महागठबंधन की पार्टियां इस बात से उत्साहित थीं कि अब मुस्लिम वोट थोक भाव उन्हें ही मिलेंगे. लालू-राबड़ी राज के अंत के साथ ही मुसलमानों का झुकाव नीतीश कुमार की ओर हुआ था. इसका चुनावी लाभ भी जेडीयू को मिलता रहा है. वक्फ कानून बनने के बाद महागठबंधन में शामिल पार्टियों ने मुसलमानों पर डोरे डालने शुरू कर दिए थे. पर, आश्चर्यजनक पहलू यह है कि दो दिन पहले ही मोतीहारी में जेडीयू एमएलसी खालिद अनवर के प्रयास से 200 मुस्लिम युवकों ने जेडीयू की सदस्यता ग्रहण की. यह तेजस्वी यादव की उम्मीदों पर पानी फेरने वाली स्थिति है.

भाई तेज प्रताप को कंट्रोल करना पार्टी और तेजस्वी के लिए बड़ी चुनौती है.
Land for Job का लफड़ा
लालू यादव के रेल मंत्री रहते जमीन के बदले नौकरी देने का मामला (Land for Job) फिर जोर पकड़ रहा है. इसमें लालू यादव के परिवार के तकरीबन सभी लोगों के नाम शामिल हैं. तेजस्वी यादव पर आरोप है कि उन्होंने ऐसी संपत्ति का उपभोग किया. अगर यह संपत्ति उनके नाम थी तो उन्हें खुद इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए थी. तेजस्वी की दलील है कि जिस समय उनके नाम पर ऐसी संपत्ति आई, उस वक्त वे बालिग नहीं थे. अगर यह मामला आगे बढ़ता है तो तेजस्वी के जेल जाने की नौबत भी आ सकती है. इस बीच चारा घोटाला के एक मामले में लालू की सजा बढ़ाने की याचिका भी झारखंड हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली है. अगर इसका फैसला प्रतिकूल रहा तो लालू को फिर जेल जाने की नौबत आएगी, जो तेजस्वी यादव के लिए अच्छा नहीं माना जाएगा.
सीटों का साथियों में बंटवारा
इन सबसे इतर एक बड़ी समस्या तेजस्वी यादव के सामने महागठबंधन के साथी दलों के बीच सीटों का बंटवारा है. वीआईपी के मुकेश सहनी डेप्युटी सीएम पद की जिद ठाने हुए हैं. वे 60 सीटें मांग रहे हैं. कांग्रेस 70 सीटों से नीचे उतरने को तैयार नहीं. आरजेडी ने पिछले चुनाव में 144 पर लड़़ कर 75 सीटें जीती थीं. इस बार दो नए सहयोगियों के कारण आरजेडी को अपनी सीटें घटानी पड़ सकती हैं. कांग्रेस का जैसा हाव-भाव अभी तक दिखता रहा है, उससे यही लगता है कि तेजस्वी के लिए यह मुश्किल भरा काम है. कांग्रेस ने अगर दगा दिया तो उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी. कांग्रेस से खतरा इसलिए दिखता है कि अभी तक तेजस्वी को सीएम फेस घोषित करने में उसकी रजामंदी नहीं मिली है.

मुकेश सहनी अभी से डेप्यूटी सीएम का पद मांग रहे हैं.
पप्पू-कन्हैया प्रकरण का दोष
तेजस्वी की राह में बिना बुलाई मुश्किल कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार और पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव बन गए हैं. वोटर वैरिफिकशन के विरोध में बुलाए गए बिहार बंद के दौरान विपक्ष की एकजुटता तो दिखी, लेकिन राहुल गांधी के साथ रथ पर सवार होने से पप्पू यादव और कन्हैया कुमार को रोक दिया गया. कहा जा रहा है कि दोनों इससे काफी नाराज हैं और इसका दोष तेजस्वी यादव पर मढ़ रहे हैं. चर्चा तो यह भी है कि दोनों इतने खफा हैं कि वे प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ज्वाइन कर सकते हैं. जानकारी आ रही है कि कन्हैया कुमार की नाराजगी दूर करने के लिए राहुल गांधी ने उन्हें 14 जुलाई को दिल्ली बुलाया है. प्रसंगवश यह जिक्र जरूरी है कि तेजस्वी यादव दोनों को पसंद नहीं करते. कन्हैया कुमार सीपीआई के उम्मीदवार के रूप में जब बेगूसराय से 2019 में लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे तो आरजेडी ने उन्हें हराने के लिए अपना उम्मीदवार उतार दिया था. पप्पू यादव के खिलाफ भी इस बार लोकसभा चुनाव में आरजेडी ने बीमा भारती को उम्मीदवार बना दिया था.
ब्रह्मेश्वर मुखिया का जिन्न
हाल ही में आरजेडी की एक प्रवक्ता ने रणवीर सेना के प्रमुख रहे स्व. ब्रह्मेश्वर मुखिया के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इसे लेकर कुछ दिनों तक खूब बावेला मचा. इससे भूमिहार समाज आरजेडी से खफा है. हालांकि पहले भी भूमिहार समाज आरजेडी को कम ही पसंद करता रहा है. अभी यह प्रकरण चल ही रहा था कि लालू यादव का पुराना स्लोगन भूराबाल साफ करो फिर गूंजने लगा है. आरजेडी नेता रंजीत यादव की मौजूदगी में भूराबाल साफ करो का नारा लगा. आरजेडी ने इस बयान से पल्ला तो झाड़ लिया है, लेकिन इसका प्रसार-प्रचार तो हो ही गया. इससे सवर्णों में खासा नाराजगी है. यह आरजेडी की राह में अवरोध का काम कर सकता है.







