राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के अंतर्गत पटना के नवाब मंजिल में 50 बेड का पहला एकीकृत आयुष अस्पताल बनकर तैयार हो चुका है और अब दरंभगा-बेगूसराय जिला के लिए यह परियोजना आगे बढ़ रही है। बिहार में ऐसे और 10 अस्पतालों का निर्माण होना है।
मधुबनी जिला में दो आयुष अस्पताल बनाए जाएंगे। उनमें से एक 50 बेड का होगा और दूसरा 10 बेड का। बांका और अररिया के आयुष अस्पताल 10-10 बेड के होंगे। शेष 50-50 बेड के।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा राज्य वार्षिक कार्ययोजना (एसएएपी) के जरिये इन आयुष अस्पतालों के निर्माण के लिए केंद्र से संस्तुति मांगी गई थी। अब स्वीकृति मिल चुकी है, तो निर्माण कार्य शुरू करने के लिए अब आगे की औपचारिकताएं पूरी की जा रहीं।
दरभंगा के बिरौल अनुमंडल अंतर्गत इटवा शिवनगर में आयुष अस्पताल के लिए प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। केंद्र सरकार से धन का आवंटन होते ही बिहार चिकित्सा सेवा एवं अवसंरचना निगम लिमिटेड (बीएमएसआइसीएल) द्वारा निविदा जारी कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
बेगूसराय में स्वास्थ्य विभाग द्वारा भूमि उपलब्धता की समीक्षा हो रही है। तकनीकी स्वीकृति मिलते ही इस वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही तक निविदा हो जाएगी। इनके अतिरिक्त पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सिवान, गया और मधुबनी के लिए भी प्रारंभिक स्तर की प्रक्रिया चल रही है।
एकीकृत आयुष अस्पताल की परिकल्पना आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी को एक छत के नीचे लाना है। लगभग एक एकड़ भूमि में स्थापित होने वाले इन अस्पतालों में पुरानी, जटिल और जीवन-शैली से जुड़ी बीमारियों का सस्ता और समग्र उपचार संभव होगा।
ये अस्पताल सिर्फ सामान्य ओपीडी नहीं होंगे, बल्कि इनमें पंचकर्म और क्षारसूत्र यूनिट, इनडोर वार्ड, हर्बल गार्डन व योग केंद्र आदि की व्यवस्था होगी। आधुनिक चिकित्सा के साथ पारंपरिक पद्धतियों का मेल होगा। उपचार के साथ यहां योग और प्राकृतिक चिकित्सा से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का भी प्रयास होगा।
कहां-कहां होगा निर्माण: मधुबनी जिले में दो, अररिया, बांका, बेगूसराय, दरभंगा, गया, गोपालगंज, सिवान और पूर्वी चंपारण जिले में एक-एक आयुष अस्पताल बनेंगे।
लागत और अंशदान: इन अस्पतालों के निर्माण के लिए 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार दे रही। शेष 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार को करना है। 50 बेड के एक अस्पताल के निर्माण पर लगभग 15 करोड़ रुपये का खर्च आता है। पटना के अस्पताल के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा लगभग 9.02 करोड़ रुपये (902.07 लाख) मिले थे।







