बिहार के सियासी गलियारे हाल के दिनों में जो सियासी घटनाक्रम हुए हैं, उसे देखकर आरजेडी और कांग्रेस के बीच चल रही सियासी खींचतान को समझा जा सकता है. दरअसल बिहार में ‘माई बहिन मान योजना’ पर कांग्रेस और आरजेडी के बीच क्रेडिट लेने की होड़ मची है. खासकर कांग्रेस जिस तरह बिहार में आगे बढ़ रही है उससे कई संकेत मिल रहे हैं. दरअसल बिहार में चुनावी साल है और तेजस्वी यादव पहले ही ‘माई बहिन मान योजना’ के तहत महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने का ऐलान कर चुके हैं. अब कुछ महीनों बाद कांग्रेस ने भी यही घोषणा की है.
सवाल उठता है कि महागठबंधन के होते हुए कांग्रेस ने अलग से इस योजना की घोषणा क्यों की है? क्या कांग्रेस कोई खेल करने जा रही है? बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने महिलाओं के लिए बड़ा चुनावी वादा किया है. कांग्रेस नेताओं ने पहली गारंटी का ऐलान करते हुए कहा कि अगर बिहार में उनकी सरकार बनती है, तो ‘माई बहिन मान योजना’ के तहत महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये मिलेंगे. महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने इस घोषणा पर खुशी और गर्व जताया, जिसमें महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने का वादा किया गया है.
NDA ने भी घेरना शुरू कर दिया
दिसंबर 2024 में आरजेडी नेता और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने भी ऐलान किया था कि अगर 2025 में महागठबंधन की सरकार बनती है, तो ‘माई बहिन मान योजना’ के माध्यम से महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये दिए जाएंगे. तेजस्वी यादव ने कहा था कि इस योजना के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाया जाएगा. अब सत्ता पक्ष में एनडीए यह सवाल उठा रहा है कि अगर बिहार में महागठबंधन है, तो ये अलग-अलग घोषणाएं और चुनावी वायदे क्यों हो रहे हैं. एनडीए नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस को अब तेजस्वी यादव की अगुवाई मंजूर नहीं है.
प्रेशर पॉलिटिक्स या कुछ और?
यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है कि महागठबंधन की दिल्ली में जंबो और पटना में कई बार हुई मैराथन बैठकों के बावजूद भी तेजस्वी को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में घोषित नहीं किया गया है. बिहार में जब कन्हैया की यात्रा हुई, तो आरजेडी के एक भी नेता शामिल नहीं हुए. जाहिर है, सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्या कांग्रेस सीट बंटवारे को लेकर कोई प्रेसर पॉलिटिक्स कर रही है या फिर बिहार में कांग्रेस ‘एकला चलो’ की राह अपनाना चाहती है?







