भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव शनिवार शाम हुए संघर्षविराम की घोषणा के साथ ही खत्म हो गया है. पाकिस्तान के बॉर्डर से लगने वाले राज्यों में अब हालात पूरी तरह से सामान्य हैं. भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देकर ये साबित कर दिया कि वह आतंकवाद को खत्म करने के लिए किसी भी तरह से कोई समझौता नहीं करने वाला है. पाकिस्तान से हुए सीजफायर के बीच अब पीएम मोदी की नीतियों की जमकर तारीफ हो रही है. कांग्रेस नेता और देश के पूर्व वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने भी पीएम मोदी की युद्ध नीति की तारीफ की है.
इंडियन एक्सप्रेस अखबार में छपे अपने कॉलम में उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व क्षमता को खूब सराहा है. उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा पाकिस्तान को दिए गए जवाब को बुद्धिमत्तापूर्ण और संतुलित बताया. साथ ही उन्होंने अपने कॉलम में लिखा है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए पर्यटकों पर आतंकी हमले के बाद देश में आक्रोश था. हर कोई इस आतंकी घटना के बाद आतंकियों से बदला लेने की मांग कर रहे थे. ऐसे माहोल में सरकार ने सीमित सैन्य कार्रवाई का रास्त चुनकर एक बड़ा युद्ध टाल दिया है.
उन्होंने आगे कहा कि भारत ने जो कार्रवाई की वो बेहद सीमित और सुनियोजित थी. जिसका उद्देश्य आतंकी संगठनों की बुनियादी ढांचे को नष्ट करना था. चिदंबरम ने अपने कॉलम में इस कार्रवाई को प्रधानमंत्री मोदी की समझदारी भरा कदम बताया है.
एयरस्ट्राइक की भी तारीफ की
चिदंबरम ने अपने लेख में भारतीय सेना द्वारा 7 मई को की गई एयरस्ट्राइक की भी तारीफ की है. उन्होंने लिखा कि भारती सेना की कार्रवाई वैध और लक्ष्य केंद्रीत था. भारतीय सेना ने अपनी एयरस्ट्राइक के दौरान सैन्य और रिहायशी इलाकों को निशाना नहीं बनाया था. यह मान लेना जरा जल्दबाजी होगी कि भारतीय सेना के इस एक्शन के बाद लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद और दर रेजिस्टेंस फ्रंट जैसे आतंकी समूह पूरी तरह समाप्त हो गए हैं.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जारी बहस के बीच इसे लेकर अब कांग्रेस नेता शशि थरूर का एक बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने 1971 में पाकिस्तान के साथ भारत ने जो कुछ किया उसे लेकर देश की पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का भी जिक्र किया है.
न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में शशि थरूर ने कहा कि 1971 में जो किया गया उसकी तारीफ होनी चाहिए लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आज जो हो रहा है उसे नजरअंदाज किया जा सकता है. 1971 और 2025 के हालात काफी अलग है. पाकिस्तान जिस स्थिति में 1971 में था वो अब उस स्थिति में नहीं है. ऐसे में दोनों की तुलना करना सही नहीं होगा. तब हालात अलग थे और आज के हालात बिल्कुल ही अलग हैं. आज सच तो यह है कि, मेरे हिसाब से, हम उस स्थिति में पहुंच गए हैं जहां तनाव बेवजह नियंत्रण से बाहर हो रहा है. हमारे लिए शांति जरूरी है.
उन्होंने कहा कि मुझे भारत और पाकिस्तान के मजबूत और अडिग नेतृत्व पर बहुत गर्व है, क्योंकि उनके पास यह जानने और समझने की शक्ति, बुद्धि और धैर्य है कि वर्तमान आक्रमण को रोकने का समय आ गया है, जो इतने सारे लोगों की मौत और विनाश का कारण बन सकता था. लाखों अच्छे और निर्दोष लोग मारे जा सकते थे! आपकी विरासत आपके बहादुर कार्यों से बहुत बढ़ गई है. मुझे गर्व है कि अमेरिका आपको इस ऐतिहासिक और वीरतापूर्ण निर्णय पर पहुंचने में मदद करने में सक्षम था. जबकि चर्चा भी नहीं हुई, मैं इन दोनों महान देशों के साथ व्यापार को काफी हद तक बढ़ाने जा रहा हूं.
थरूर ने आगे कहा कि बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में भारत, लोगों को आज़ादी दिलाने के लिए नैतिक लड़ाई लड़ रहा था. आज जो हालात हैं वो एक अलग कहानी है. हम दोनों पक्षों के बहुत से लोगों की जान जाने के साथ एक बहुत लंबे, लंबे संघर्ष में फंस जाते. क्या आज भारत के लिए यह सबसे बड़ी प्राथमिकता है? नहीं, यह नहीं है. हम उन लोगों को सिखाना चाहते थे जिन्होंने इन आतंकवादियों को भेजा था कि इसकी कीमत चुकानी होगी.
मेरा मानना है कि भारत ने कभी भी 7 मई की कार्रवाई को एक लंबे, लंबे संघर्ष की शुरुआत के रूप में नहीं देखा. अगर पाकिस्तान ने आगे नहीं बढ़ाई होती, तो हम भी आगे नहीं बढ़ते. पाकिस्तान ने आगे बढ़ाया, हमने भी आगे बढ़ाया. यह उस बिंदु पर पहुंच रहा था जहां अगर यह ऐसे ही जारी रहा,तो हम बिना किसी स्पष्ट उद्देश्य के एक लंबे,खींचे गए युद्ध में फंस जाते. बांग्लादेश को आज़ाद कराना एक स्पष्ट उद्देश्य है. पाकिस्तान पर सिर्फ़ गोले दागते रहना एक स्पष्ट उद्देश्य नहीं है. आप अंतर देख सकते हैं.







