बिहार विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने प्रदेश को बड़ी सौगात दी है. मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने पटना-आरा-सासाराम फोरलेन कॉरिडोर और कोसी मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना की मंजूरी दी है.
बिहार की राजधानी पटना से सासाराम तक 120 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में इस परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) में बनाने की मंजूरी दी गई है. इस परियोजना पर 3712.40 करोड़ रुपये खर्च होने हैं. इस सड़क परियोजना का टेंडर पहले ही हो चुका है. अब एजेंसी के चयन का रास्ता साफ हो पाएगा.
आरा शहर में भी बनेगा रिंग रोड का एक हिस्सा
आरा शहर में भी रिंग रोड का एक हिस्सा बनाया जाएगा. पटना-आरा-सासाराम 120 लंबी हाईवे परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद मौजूदा ग्रीनफील्ड राजमार्ग के 10.6 किलोमीटर लंबे अपग्रेडेशन के साथ एक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर विकसित किया जाएगा. इससे आरा, विक्रमगंज, पीरो, गड़हनी, सासाराम और मोकर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों को फायदा मिलेगा.
पटना को जीटी रोड से सीधी कनेक्टिविटी देने के लिए पटना-आरा-सासाराम फोर लेन एक्सेस कंट्रोल हाईवे का निर्माण हो रहा है. इस पर 100 किलोमीटर की स्पीड से गाड़ियां चला करेंगी. इस सड़क पर एंट्री-एग्जिट की सुविधा कई जगहों से रहेगी. स्वर्णिम चतुर्भुज से पटना को जोड़ने के लिए आरा शहर के लिए प्रस्तावित रिंग रोड के एक भाग का निर्माण होगा. इससे पटना और उसके आसपास के क्षेत्रों के विकास के नए रास्ते खुलेंगे.
झारखंड, यूपी और दिल्ली का सफर भी होगा आसान
हाईवे परियोजना से पटना से बनारस और पूर्वांचल एक्सप्रेस के माध्यम से यूपी, झारखंड और दिल्ली का सफर भी आसान हो सकेगा. पटना और बिहटा एयरपोर्ट का भी इस सड़क से जुड़ाव हो जाएगा. पटना-आरा-सासाराम हाईवे परियोजना के पूरे होने से क्षेत्रीय आर्थिक विकास में भी सुधार होगा. पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने भी पटना-आरा-सासाराम हाईवे परियोजना को बिहार की महत्वाकांक्षी परियोजना बताया है. परियोजना को मंजूरी देने के लिए उन्होंने पीएम मोदी और केंद्रीय सड़क व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का आभार जताया है.
कैबिनेट ने बिहार में हाइब्रिड एन्युटी मोड (एचएएम) पर 4-लेन ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड पटना-आरा-सासाराम कॉरिडोर (एनएच-119ए) (120.10 किमी) के निर्माण को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने बिहार में पटना से सासाराम (120.10 किमी) तक 4-लेन एक्सेस कंट्रोल ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड पटना-आरा-सासाराम कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मोड (एचएएम) पर विकसित किया जाएगा, जिसकी कुल पूंजी लागत 3,712.40 करोड़ रुपये होगी।
वर्तमान में, सासाराम, आरा और पटना के बीच संपर्क मौजूदा राज्य राजमार्गों (एसएच-2, एसएच-12, एसएच-81 और एसएच-102) पर निर्भर है और आरा शहर सहित भारी यातायात के कारण यात्रा में 3-4 घंटे लगते हैं। बढ़ते यातायात को कम करने के लिए, ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के साथ-साथ मौजूदा ब्राउनफील्ड राजमार्ग के 10.6 किमी हिस्से को उन्नत और विकसित किया जाएगा, जिससे आरा, ग्राहिणी, पीरो, बिक्रमगंज, मोकर और सासाराम जैसे स्थानों पर घनी आबादी वाले क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।
यह परियोजना एनएच-19, एनएच-319, एनएच-922, एनएच-131जी और एनएच-120 सहित प्रमुख परिवहन गलियारों को एकीकृत करती है, जिससे औरंगाबाद, कैमूर और पटना को निर्बाध संपर्क प्रदान होता है। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना 02 हवाई अड्डों (पटना में जय प्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और आगामी बिहिता हवाई अड्डा), 04 प्रमुख रेलवे स्टेशनों (सासाराम, आरा, दानापुर, पटना) और 01 अंतर्देशीय जल टर्मिनल (पटना) को कनेक्टिविटी प्रदान करेगी तथा पटना रिंग रोड तक सीधी पहुंच बढ़ाएगी, जिससे माल और यात्री आवागमन में तेजी आएगी।
पूरा हो जाने पर, पटना-आरा-सासाराम कॉरिडोर क्षेत्रीय आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा लखनऊ, पटना, रांची और वाराणसी के बीच संपर्क में सुधार करेगा। यह परियोजना सरकार के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है, इससे रोजगार सृजन होगा, बुनियादी ढांचे में वृद्धि होगी और बिहार में सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस परियोजना से 48 लाख मानव दिवस रोजगार सृजित होंगे तथा पटना और आसपास के विकासशील क्षेत्रों में विकास, प्रगति और समृद्धि के नए रास्ते खुलेंगे।
कॉरिडोर का मानचित्र

परियोजना विवरण:
| विशेषता | विवरण |
| परियोजना का नाम | 4-लेन ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड पटना-आरा-सासाराम कॉरिडोर |
| कॉरिडोर | पटना-आरा-सासाराम (एनएच-119ए) |
| लंबाई (किमी) | 120.1 |
| कुल निर्माण लागत (करोड़ रुपये में) | 2,989.08 |
| भूमि अधिग्रहण लागत (करोड़ रुपये में) | 718.97 |
| कुल पूंजी लागत (करोड़ रुपये में) | 3,712.40 |
| मोड | हाइब्रिड एन्युइटी मोड (एचएएम) |
| प्रमुख सड़कें जो जोड़ती हैं | राष्ट्रीय राजमार्ग – एनएच-19, एनएच-319, एनएच-922, एनएच-131जी, एनएच-120
राज्य राजमार्ग – एसएच-2, एसएच-81, एसएच-12, एसएच-102 |
| आर्थिक / सामाजिक / परिवहन संपर्क स्थापित किए जाएंगे | हवाई अड्डे: जय प्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (पटना), बिहिता हवाई अड्डा (निर्माणाधीन) |
| रेलवे स्टेशन: सासाराम, आरा, दानापुर, पटना | |
| अंतर्देशीय जल टर्मिनल: पटना | |
| सेवा प्रदान किये जाने वाले प्रमुख शहर/कस्बे | पटना, आरा, सासाराम |
| रोजगार सृजन की संभावना | 22 लाख मानव-दिवस (प्रत्यक्ष) एवं 26 लाख मानव-दिवस (अप्रत्यक्ष) |
| वित्तीय वर्ष 2025 में वार्षिक औसत दैनिक यातायात (एएडीटी) | अनुमान है कि इसकी संख्या 17,000-20,000 यात्री कार इकाईयाँ (पीसीयू) होगी। |
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बिहार की कोसी मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना- त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (पीएमकेएसवाई-एआईबीपी) के अंतर्गत शामिल करने को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने आज बिहार की कोसी मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना को जल शक्ति मंत्रालय की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना/त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (पीएमकेएसवाई-एआईबीपी) के अंतर्गत शामिल करने को मंजूरी दे दी है।
सीसीईए ने 6,282.32 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को मार्च, 2029 तक पूरा करने के लिए बिहार को 3,652.56 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता को भी स्वीकृति दी है।
कोसी मेची अंतर-राज्यीय संपर्क परियोजना में मौजूदा पूर्वी कोसी मुख्य नहर (ईकेएमसी) के पुनर्निर्माण के माध्यम से बिहार में स्थित महानंदा बेसिन में सिंचाई के विस्तार के लिए कोसी नदी के अधिशेष जल के एक हिस्से को मोड़ने और ईकेएमसी को आरडी 41.30 किमी पर इसके अंतिम छोर से आगे आरडी 117.50 किमी पर मेची नदी तक विस्तारित करने की परिकल्पना की गई है, ताकि बिहार से होकर बहने वाली कोसी और मेची नदियों को बिहार के भीतर एक साथ जोड़ा जा सके।
लिंक परियोजना से बिहार के अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार जिलों में खरीफ मौसम में 2,10,516 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त वार्षिक सिंचाई उपलब्ध होगी। इस परियोजना में प्रस्तावित लिंक नहर के माध्यम से कोसी के लगभग 2,050 मिलियन क्यूबिक मीटर अधिशेष जल को मोड़ने/उपयोग करने की क्षमता है। इसके अलावा, मौजूदा ईकेएमसी के पुनर्निर्माण के बाद, मौजूदा पूर्वी कोसी मुख्य नहर के 1.57 लाख हेक्टेयर मौजूदा कमांड में आपूर्ति की कमी दूर हो जाएगी।
पृष्ठभूमि:
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) वर्ष 2015-16 के दौरान शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य खेतों तक पानी की पहुंच बढ़ाना और सुनिश्चित सिंचाई के तहत कृषि योग्य क्षेत्र का विस्तार करना, खेतों में जल उपयोग दक्षता में सुधार करना, स्थायी जल संरक्षण पद्धतियों को लागू करना आदि है।
केंद्र सरकार ने 2021-26 के दौरान 93,068.56 करोड़ रुपये (37,454 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता) के समग्र परिव्यय के साथ पीएमकेएसवाई के कार्यान्वयन को स्वीकृति दी है। पीएमकेएसवाई का त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी) घटक प्रमुख और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से सिंचाई क्षमता का निर्माण करना है।
पीएमकेएसवाई-एआईबीपी के अंतर्गत अब तक 63 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और अप्रैल, 2016 से 26.11 लाख हेक्टेयर की अतिरिक्त सिंचाई क्षमता सृजित की गई है। 2012-22 से पीएमकेएसवाई 2.0 के एआईबीपी घटक के बाद नौ परियोजनाओं को शामिल किया गया है। कोसी मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना इस सूची में शामिल दसवीं परियोजना है।







