बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार के नए बजट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। तेजस्वी ने बिहार बजट को निराशाजनक बताते हुए इसे ‘दिखावटी’ और ‘जनता के साथ छलावा’ करार दिया। उन्होंने बजट में नई बातों का अभाव और पुरानी योजनाओं की पुनरावृत्ति पर चिंता जताई। तेजस्वी ने अपनी पार्टी द्वारा रखी गई मांगों को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया।
तेजस्वी यादव ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसमें कोई नयापन नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ पुरानी बातें दोहरा रही है, जैसे कि चार घंटे में पटना पहुxचने का दावा, जबकि राज्य में पुल-पुलिया टूटने की समस्या बनी हुई है। तेजस्वी ने कहा, ‘बजट में कुछ भी नया नहीं है। घिसी-पिटी बातों को ही बजट में शामिल किया गया है। वही पुरानी बातें हैं कि चार घंटे में पटना पहुंचा जा सकता है जबकि राज्य में पुल पुलियाओं के टूटने का दौर जारी है।’ उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उनकी पार्टी की ओर से की गई कई मांगों को अनदेखा किया है।
यह एनडीए का यह आखिरी बजट
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि स्टेडियम बनाने वाली घोषणा पुरानी है. पिछले दस साल में किसी भी प्रखंड में एक ढंग का स्टेडियम नहीं बनाया गया है. तेजस्वी ने कहा कि एनडीए का यह आखिरी बजट है. राज्य में यह सरकार अब लौट कर नहीं आने वाली है. हमें बिहार की चिंता है और इन्हें कुर्सी और सरकार बचाने की चिंता है. उन्होंने राज्य सरकार से सवाल पूछा है कि वह बताए कि पिछले बजट के किसी प्रावधान को धरातल पर उतारा गया. कहा कि जमीनी सच्चाई यह है कि बिहार आधुनिक सुविधाओं तो दूर की बात अभी भी मूल भूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है.
कांग्रेस को लगा बजट उम्मीद के विपरीत
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह ने वित्त मंत्री सम्राट चौधरी द्वारा सोमवार को पेश बिहार के बजट को बेजान, बेअसरदार और उम्मीद के विपरीत बताया है. उन्होंने कहा कि चुनावी साल के बजट में उम्मीद थी कि इसमें रोजगार की बात होगी. मंहगाई कम करने की तात्कालिक कोशिश होगी. रोजगार, महिलाओं को 500 रुपये में गैस सिलिंडर, डीजल-पेट्रोल पर वैट घटाने और किसान के लिए एमएसपी की बात होगी. डबल इंजन की सरकार का यह आखिरी बजट है. इसलिए बड़ी उम्मीद थी कि बिहारवासियों को कम से कम मंहगाई और बेरोजगारी की मार से कुछ राहत मिलेगी.
सात निश्चय का कतरा भी बजट से गायब
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मंहगाई को कम करने के बजाय यह सरकार तरकारी आउटलेट के जरिए मुनाफा कमाने की कोशिश में लग गयी है. इसके अलावा नीतीश के सात निश्चय का कतरा भी बजट से गायब है. उन्होंने कहा कि यह बात समझ में नहीं आ रही है कि करीब तीन लाख 17 हजार करोड़ का बजट पेश किया गया है और तीन लाख 32 हजार करोड़ का ऋण है तो ये पैसे कहां से आयेगा और कैसे चुकाया जायेगा. बजट को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है. यह सब हवाबाजी है और कुछ नहीं है.







