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पीएम मोदी के अमेरिका दौरे का क्या एजेंडा रहेगा?

पीएम मोदी के अमेरिका दौरे का क्या एजेंडा रहेगा? भारत के वे कौन से मुद्दे होंगे, जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप के सामने उठाएंगे? इसके अलावा दोनों देशों के रिश्ते बढ़ाने के लिए कौन से समझौते हो सकते हैं? व्यापार के क्षेत्र में दोनों नेता क्या घोषणाएं कर सकते हैं? इसके अलावा पीएम मोदी अमेरिका में और किन-किन कार्यक्रमों का हिस्सा बन सकते हैं?

UB India News by UB India News
February 12, 2025
in खास खबर
0
अमेरिका में भी छाए PM मोदी: चुनाव प्रचार के बीच डोनाल्ड ट्रंप बोले- अगले सप्ताह मिलूंगा
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस में अपने कार्यक्रमों के बाद 12 और 13 फरवरी को अमेरिका के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान पीएम मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। भारत के प्रधानमंत्री का यह दौरा अपने आप में काफी अहमियत रखता है। दरअसल, बीते दिनों में ट्रंप ने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिनका भारत पर प्रत्यक्ष या परोक्ष असर देखने को मिला है। इतना ही नहीं ट्रंप ने भारत से व्यापार और आव्रजन के मुद्दे पर भी कई बयान दिए हैं, जिनके गहरे मायने हैं।

इसके चलते पीएम मोदी का अमेरिका दौरा काफी महत्वपूर्ण हो गया है। उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री अमेरिका में कई अहम चर्चाओं में शामिल रहेंगे। इसके अलावा वह अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के साथ दोस्ती बढ़ाने से इतर भारत को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर सीधी बात करेंगे।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर पीएम मोदी के अमेरिका दौरे का क्या एजेंडा रहेगा? भारत के वे कौन से मुद्दे होंगे, जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप के सामने उठाएंगे? इसके अलावा दोनों देशों के रिश्ते बढ़ाने के लिए कौन से समझौते हो सकते हैं? व्यापार के क्षेत्र में दोनों नेता क्या घोषणाएं कर सकते हैं? इसके अलावा पीएम मोदी अमेरिका में और किन-किन कार्यक्रमों का हिस्सा बन सकते हैं? 
अमेरिका दौरे पर क्या रहेगा प्रधानमंत्री मोदी का एजेंडा?
पीएम मोदी जब अमेरिका पहुंच कर डोनाल्ड ट्रंप से मिलेंगे, तो वह नए राष्ट्रपति से मिलने वाले दुनिया के महज तीसरे नेता होंगे। मोदी से पहले इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और जापान के शिगेरु इशिबा का ही ट्रंप ने व्हाइट हाउस में स्वागत किया था। ट्रंप के शपथग्रहण के एक महीने के अंदर ही भारत-अमेरिका के शीर्ष नेताओं की मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों की अहमियत भी दर्शाती है।

बताया जा रहा है कि पीएम मोदी से मुलाकात के बाद ट्रंप उन्हें कैबिनेट के सदस्यों से भी मिलवाएंगे। इसके अलावा अरबपति कारोबारी और ट्रंप के करीबी एलन मस्क भी पीएम मोदी से मिल सकते हैं। इस दौरान दोनों के बीच टेस्ला, स्टारलिंक और अन्य कंपनियों के कारोबार को भारत लाने पर बात हो सकती है। ट्रंप और मोदी मुलाकात के दौरान बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस की सरकार और क्षेत्र में अमेरिकी हितों पर भी चर्चा कर सकते हैं।

एजेंडे में ये बातें होंगी शामिल

1. व्यापार रिश्ते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच चर्चा का सबसे बड़ा विषय व्यापार का मुद्दा रहेगा। दरअसल, बीते कुछ महीनों में ट्रंप कई बार भारत को टैरिफ के मामले में घेर चुके हैं। इतना ही नहीं इस दौरान उन्होंने ‘बराबरी के व्यापार’ की बात कही और ऐसा न करने पर आयात शुल्क लगाने की धमकियां भी दी हैं।

गौरतलब है कि ट्रंप ने जब पहली बार तीन देशों- मैक्सिको, कनाडा और चीन पर टैरिफ लगाने का एलान किया था, तब से ही भारत में भी उनके रुख को लेकर आशंकाएं लगाई जा रही हैं। इनमें से दो देशों को तो ट्रंप के फैसले से छूट मिल गई, लेकिन चीन को टैरिफ के जाल से मुक्ति नहीं मिली है।

माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक में ट्रंप भारत पर अमेरिकी निर्यात से अतिरिक्त आयात शुल्क को लेकर दबाव बना सकते हैं। खासकर अमेरिका से मोटरसाइकिल और अन्य लग्जरी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए वे भारत से टैरिफ को कम करने के लिए कह सकते हैं।

ट्रंप की धमकियों के बीच भारत ने पहले ही आयात होने वाली भारी बाइक्स (1600 सीसी से ऊपर की मोटरसाइकिलों) पर टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी कर लिया है। वहीं, छोटे इंजन वाली बाइक्स पर यह टैरिफ घटाकर 40% किया गया है।

2. रक्षा सहयोग

रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिकी राष्ट्रपति रक्षा सहयोग को लेकर भी पीएम मोदी से बात करेंगे। जहां पीएम मोदी इस मुलाकात में अमेरिका से युद्धक वाहनों और लड़ाकू विमानों के इंजन को खरीदने का समझौता फाइनल करेंगे तो वहीं ट्रंप उन्हें ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी रक्षा सामग्री खरीदने के लिए कहेंगे। ट्रंप ने पिछले महीने ही भारत से ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी सुरक्षा उपकरण खरीदने के लिए कहा था। इसके जरिए ट्रंप व्यापार में संतुलन बनाना चाहते हैं।

3. तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका जाने से पहले फ्रांस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर एक समिट की सह-अध्यक्षता करेंगे। इसमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों उनके साथ होंगे। साथ ही इसमें अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, चीन के उप प्रधानमंत्री झांग गुओकिंग और ओपनएआई, गूगल जैसी कंपनी के सीईओ हिस्सा लेंगे।

माना जा रहा है कि पीएम मोदी यहां तय हुए रोडमैप को लेकर आगे अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप सरकार से भी बात करेंगे और अमेरका-भारत के सहयोग को इस क्षेत्र में भी आगे ले जाने की दिशा में काम करेंगे।

ऊर्जा पर समझौता
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कुछ ही दिन पहले ड्रिल बेबी ड्रिल नीति का एलान किया था। इसके तहत अमेरिकी सरकार अब देश में ही तेल के उत्पादन पर जोर देगी। ट्रंप ने खुद कहा था कि अमेरिका अब जल्द ही तेल और गैसों के अहम निर्यातकों में से होगा। ऐसे में भारत, जो कि अब तक अमेरिकी तेल का बड़ा खरीदार नहीं रहा है, आगे तेल खरीदने के समझौते पर भी चर्चा में शामिल हो सकता है।
4. आव्रजन और वीजा नीतियां

एच1बी वीजा नीति
पीएम मोदी डोनाल्ड ट्रंप से एच1बी वीजा की संख्या बढ़ाने को लेकर बात करेंगे। दरअसल, आव्रजन बंद करने को लेकर ट्रंप समर्थकों ने कई भड़काऊ बयान दिए हैं। इसके बाद से ही यह डर जताया जा रहा है कि अमेरिकी सरकार एच-1बी वीजा की संख्या घटा सकती है। हालांकि, अमेरिकी मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि ट्रंप आव्रजन के मुद्दे पर सख्ती के बावजूद कौशल वाले कर्मियों को देश में और मौके देना चाहते हैं। इसके चलते वे एच-1बी वीजा के जरिए लोगों के आने का समर्थन भी कर चुके हैं। इस वीजा की मांग भारत के टेक क्षेत्र में काफी ज्यादा है। ऐसे में मोदी एच-1बी वीजा की संख्या को बढ़ाने का मुद्दा उठाएंगे।

आव्रजन और निर्वासन का मुद्दा
भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका में अवैध तरीके से रह रहे भारतीयों के निर्वासन का मुद्दा उठा सकते हैं। दरअसल, ट्रंप की आव्रजन नीति के तहत अमेरिकी सुरक्षाबल अब अवैध प्रवासियों को निर्वासित कर अपने देश वापस भेज रहे हैं। इस नीति के तहत ही करीब अमेरिका करीब 18,000 लोगों को वापस भारत भेजने की तैयारी में है। पिछले हफ्ते ही अमेरिका का एक विमान 104 अवैध भारतीय प्रवासियों को लेकर अमृतसर पहुंचा था। इस सैन्य विमान से जब भारतीय बाहर आए थे, तो उनके हाथ-पैरों में जंजीर बंधी हुई थी।

इन दृश्यों को लेकर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को संसद तक में जवाब देना पड़ गया था। उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे पर अमेरिकी सरकार से बातचीत जारी है और डिपोर्ट किए गए लोगों से किसी तरह के दुर्व्यवहार न किए जाने की बात सुनिश्चित करने को कहा गया है। भारत सरकार के डाटा के मुताबिक, बीते 16 वर्षों में 15 हजार भारतीयों को डिपोर्ट किया जा चुका है। हालांकि, ट्रंप के आने के बाद से इस संख्या में बड़ा बदलाव आने के आसार हैं। माना जा रहा है कि पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति से चर्चा के दौरान भारतीयों के साथ दुर्व्यवहार और उन्हें वापस भेजने में एहतियात का मुद्दा उठाएंगे।

5. चीन और ब्रिक्स

भारत के प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच चर्चा में चीन का मुद्दा उठना तय है। दरअसल, एशियाई क्षेत्र और ताइवान में चीन के बढ़ते वर्चस्व ने अमेरिका की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके अलावा नौसैन्य क्षेत्र में भी चीन ने तेजी से अपनी क्षमताओं को मजबूत किया है। ऐसे में अमेरिका हिंद प्रशांत नीति के तहत भारत के साथ सहयोग बढ़ाने पर बात कर सकता है। रक्षा और विदेश नीति में दोनों देशों के नेताओं के बीच समझौते चीन को ध्यान में रखते हुए होंगे।

इसके अलावा पीएम मोदी और ट्रंप के बीच ब्रिक्स गठबंधन को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। ट्रंप ब्रिक्स में शामिल देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की धमकी दे चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि ब्रिक्स देश अपनी अलग मुद्रा लाकर डॉलर के वर्चस्व को खत्म करना चाहते हैं। इसी के चलते वे ब्रिक्स देशों के व्यापार को ठप करने के लिए टैरिफ लगाने की धमकी देते रहे हैं। माना जा रहा है कि ट्रंप और मोदी के बीच इस विषय पर चर्चा हो सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस में अपने कार्यक्रमों के बाद 12 और 13 फरवरी को अमेरिका के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान पीएम मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। भारत के प्रधानमंत्री का यह दौरा अपने आप में काफी अहमियत रखता है। दरअसल, बीते दिनों में ट्रंप ने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिनका भारत पर प्रत्यक्ष या परोक्ष असर देखने को मिला है। इतना ही नहीं ट्रंप ने भारत से व्यापार और आव्रजन के मुद्दे पर भी कई बयान दिए हैं, जिनके गहरे मायने हैं।

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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर पीएम मोदी के अमेरिका दौरे का क्या एजेंडा रहेगा? भारत के वे कौन से मुद्दे होंगे, जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप के सामने उठाएंगे? इसके अलावा दोनों देशों के रिश्ते बढ़ाने के लिए कौन से समझौते हो सकते हैं? व्यापार के क्षेत्र में दोनों नेता क्या घोषणाएं कर सकते हैं? इसके अलावा पीएम मोदी अमेरिका में और किन-किन कार्यक्रमों का हिस्सा बन सकते हैं? 
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एच1बी वीजा नीति
पीएम मोदी डोनाल्ड ट्रंप से एच1बी वीजा की संख्या बढ़ाने को लेकर बात करेंगे। दरअसल, आव्रजन बंद करने को लेकर ट्रंप समर्थकों ने कई भड़काऊ बयान दिए हैं। इसके बाद से ही यह डर जताया जा रहा है कि अमेरिकी सरकार एच-1बी वीजा की संख्या घटा सकती है। हालांकि, अमेरिकी मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि ट्रंप आव्रजन के मुद्दे पर सख्ती के बावजूद कौशल वाले कर्मियों को देश में और मौके देना चाहते हैं। इसके चलते वे एच-1बी वीजा के जरिए लोगों के आने का समर्थन भी कर चुके हैं। इस वीजा की मांग भारत के टेक क्षेत्र में काफी ज्यादा है। ऐसे में मोदी एच-1बी वीजा की संख्या को बढ़ाने का मुद्दा उठाएंगे।

आव्रजन और निर्वासन का मुद्दा
भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका में अवैध तरीके से रह रहे भारतीयों के निर्वासन का मुद्दा उठा सकते हैं। दरअसल, ट्रंप की आव्रजन नीति के तहत अमेरिकी सुरक्षाबल अब अवैध प्रवासियों को निर्वासित कर अपने देश वापस भेज रहे हैं। इस नीति के तहत ही करीब अमेरिका करीब 18,000 लोगों को वापस भारत भेजने की तैयारी में है। पिछले हफ्ते ही अमेरिका का एक विमान 104 अवैध भारतीय प्रवासियों को लेकर अमृतसर पहुंचा था। इस सैन्य विमान से जब भारतीय बाहर आए थे, तो उनके हाथ-पैरों में जंजीर बंधी हुई थी।

इन दृश्यों को लेकर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को संसद तक में जवाब देना पड़ गया था। उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे पर अमेरिकी सरकार से बातचीत जारी है और डिपोर्ट किए गए लोगों से किसी तरह के दुर्व्यवहार न किए जाने की बात सुनिश्चित करने को कहा गया है। भारत सरकार के डाटा के मुताबिक, बीते 16 वर्षों में 15 हजार भारतीयों को डिपोर्ट किया जा चुका है। हालांकि, ट्रंप के आने के बाद से इस संख्या में बड़ा बदलाव आने के आसार हैं। माना जा रहा है कि पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति से चर्चा के दौरान भारतीयों के साथ दुर्व्यवहार और उन्हें वापस भेजने में एहतियात का मुद्दा उठाएंगे।

5. चीन और ब्रिक्स

भारत के प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच चर्चा में चीन का मुद्दा उठना तय है। दरअसल, एशियाई क्षेत्र और ताइवान में चीन के बढ़ते वर्चस्व ने अमेरिका की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके अलावा नौसैन्य क्षेत्र में भी चीन ने तेजी से अपनी क्षमताओं को मजबूत किया है। ऐसे में अमेरिका हिंद प्रशांत नीति के तहत भारत के साथ सहयोग बढ़ाने पर बात कर सकता है। रक्षा और विदेश नीति में दोनों देशों के नेताओं के बीच समझौते चीन को ध्यान में रखते हुए होंगे।

इसके अलावा पीएम मोदी और ट्रंप के बीच ब्रिक्स गठबंधन को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। ट्रंप ब्रिक्स में शामिल देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की धमकी दे चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि ब्रिक्स देश अपनी अलग मुद्रा लाकर डॉलर के वर्चस्व को खत्म करना चाहते हैं। इसी के चलते वे ब्रिक्स देशों के व्यापार को ठप करने के लिए टैरिफ लगाने की धमकी देते रहे हैं। माना जा रहा है कि ट्रंप और मोदी के बीच इस विषय पर चर्चा हो सकती है।

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