दक्षिण भारत के बाद अब उत्तर भारत में भी मॉनसून ने दस्तक दे दी है. कई जगहों पर बारिश भी हो रही है, लेकिन गर्मी से कोई राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है. शहर आग की भट्टी बन गए हैं. यहां तक कि सुबह और रातें भी इतनी गर्म हो गई हैं जैसे कोई जून की दोपहर हो. लिहाजा वैज्ञानिक इसे एक बड़ी चिंता मान रहे हैं. पिछले दिनों दिल्ली का तापमान जरूर 37 डिग्री सेल्सियस था लेकिन ऐसा महसूस हो रहा था जैसे 53 डिग्री सेल्सियस हो. आखिर ऐसा क्यों है?
2021 से 2025 तक के हीट इंडेक्स रिकॉर्ड बताते हैं कि इन दिनों में दिल्ली में ज्यादातर समय हवा के तापमान से ज्यादा गर्मी महसूस हुई क्योंकि नमी बहुत ज्यादा थी. जुलाई-अगस्त में जब मॉनसून आ चुका था तो भी हीट इंडेक्स अक्सर 46-50°C से ऊपर चला गया और महसूस होने वाली गर्मी वास्तविक तापमान से कहीं ज्यादा रही.
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की सितंबर की एक पॉलिसी ब्रीफ बताती है कि जब भी मौसम में नमी ज्यादा होती है तो कूलिंग सिस्टम खासकर एयर कंडीशनर ज्यादा मेहनत करते हैं, ऐसे मौसम में कूलर और पंखे फेल हो जाते हैं. ऐसे में लंबे समय तक और बड़ी संख्या एसी चलने से बिजली की बढ़ती मांग एक और बड़ा संकट बनकर सामने आई.पर्याप्त इलेक्ट्रिसिटी न मिलने से भी लोगों को गर्मी का सितम ज्यादा झेलना पड़ रहा है.
दिल्ली में बढ़ती गर्मी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने अपने हीट एक्शन प्लान (HAP) के तहत दिल्ली में कई अस्थायी कूलिंग जोन बनाए हैं. मोबाइल वैन चलाई हैं और अस्पतालों में कूल वार्ड शुरू किए हैं. हालांकि ये आपातकालीन उपाय मौसमी हैं और सिर्फ इस गर्मी से राहत के लिए शुरू किए गए हैं लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं कि भारतीय शहरों में गर्मी के बदलते पैटर्न से बचाव के लिए बड़े स्तर पर और लक्षित काम करने होंगे.
सीईईडब्ल्यू की 734 जिलों में गर्मी के खतरे को लेकर की गई रिपोर्ट बताती है कि शहरों में गर्म रातों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. इंडो-गंगा मैदान में नमी बढ़ने के चलते दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, हैदराबाद, भोपाल, भुवनेश्वर जैसे घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ गया है. यहां रात के 9 बजे से लेकर सुबह तक दीवारें तपती रहती हैं.
इसके अलावा 24 जून को क्लाइमेट सेंट्रल ने भी एक अध्ययन किया था जो बताता है कि 1970 के दशक से भारत में खतरनाक नम गर्मी वाले दिनों की संख्या 101 से बढ़कर 141 हो गई है. दिल्ली में 96 से 135, गाजियाबाद में 99 से 137, नागपुर में 44 से 119, रायपुर में 82 से 150 तक गर्म दिनों में बढ़ोतरी हुई है जो भीषण गर्मी के बढ़ते प्रकोप को बता रही है.
इस बारे में मौसम विज्ञानियों का कहना है कि गर्मी में बढ़ोत्तरी जैसे ये बदलाव समुद्र के गर्म होने से जुड़े हैं. शहरों में शहरी गर्मी द्वीप प्रभाव (Urban Heat Island) नमी के साथ मिलकर रात में ठंडक कम कर देता है और गर्मी बढ़ा रहा है. दिल्ली, आगरा, कानपुर, वाराणसी सहित 15 स्मार्ट शहरों में रात में गर्मी में बढ़ोत्तरी देखी गई है. जबकि कई शहरों में दिन और रात दोनों ही गर्म रहे हैं.
एक हकीकत यह भी है कि ज्यादातर शहरों में गर्मी से निपटने को लागू किए हीट एक्शन प्लान सिर्फ दिन की गर्मी पर काम करते हैं और वे रात की गर्मी को नजरअंदाज करते हैं, ऐसे में रात में मुसीबत बढ़ती जा रही है और सिर्फ एयर कंडीशनर पर निर्भरता बढ़ रही है. हालांकि विशेषज्ञ कूल रूफ, हरे-भरे क्षेत्र, प्राकृतिक वेंटिलेशन और बिजली की विश्वसनीयता पर जोर दे रहे हैं, ताकि आने वाली इस तबाही को रोका जा सके.
कई रिपोर्ट बताती हैं कि ठाणे जैसे शहरों ने गर्मी को कंट्रोल करने के लिए अब बेहतर फ्रेमवर्क अपनाया है जिसमें नमी, रात का तापमान और सामाजिक कारकों को शामिल किया गया है. भुवनेश्वर जल्द ही बिल्डिंग लेवल पर गर्मी का डिजिटल डैशबोर्ड लॉन्च करेगा. वहीं सीईईडब्ल्यू भी 145 शहरों का हीट एक्शन प्लान बनाने में मदद कर रहा है. ताकि शहर ज्यादा व्यवस्थित तरीके से गर्मी से निपट पाएं.







