बिहार में इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा की चर्चा है. 23 दिसंबर से पश्चिमी चंपारण से नीतीश कुमार इस यात्रा की शुरुआत करने वाले हैं. सियासी गलियारों में इसे अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है. नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा इसलिए भी अब इतनी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इस से पहले नीतीश कुमार ने महिला संवाद यात्रा की घोषणा की. लेकिन अचानक ही उसे ठंडे बस्ते में डालकर प्रगति यात्रा का स्वरूप सामने लाया गया.
इसके बाद इस चर्चा को और बल मिल गया कि क्या बिहार की राजनीति में अभी सब ठीक चल रहा है. सवाल ये भी हैं कि अगले साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं और इस से पहले नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के क्या मायने हैं. आखिर क्यों महिला संवाद यात्रा को छोड़कर सीएम प्रगति यात्रा पर निकले हैं.
पहले भी यात्राएं करते रहे हैं नीतीश कुमार
गौरतलब है कि नीतीश कुमार लोकसभा और विधानसभा चुनाव के पहले लगातार यात्राएं करते रहे हैं. 2005 में जब नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के किले को ध्वस्त कर पहली बार मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण किया था. तब उन्होंने सबसे पहली यात्रा की थी. सीएम ने तब सबसे पहली बार न्याय यात्रा किया था. इसके बाद से लगातार वो यात्राएं करते रहे हैं.
लगभग सभी विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव से पहले सीएम यात्रा करते रहे हैं. इन यात्राओं के दौरान वो संवाद करते रहे हैं और बिहार की राजनीति में इन यात्राओं का एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान है.
नीतीश कुमार की अब तक की सभी यात्राएं
1. न्याय यात्रा : साल 2005 में पहली बार नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे. उन्होंने राजद की 15 साल की सरकार को हराकर उन्होंने बिहार में अपनी पहली यात्रा की थी. इस यात्रा को न्याय यात्रा का नाम दिया गया था. 12 जुलाई 2005 से इस यात्रा की शुरुआत की गई थी.
2. विकास यात्रा: 2009 में लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने बिहार भर में विकास यात्रा की थी. 9 जनवरी 2009 से इस यात्रा की शुरुआत हुई थी.
3. धन्यवाद यात्रा : 2009 लोकसभा चुनाव के बाद जून महीने में नीतीश कुमार ने धन्यवाद यात्रा निकाली थी. लोकसभा चुनाव में अपार जनसमर्थन मिलने के बाद उन्होंने ये यात्रा निकाली थी. 17 जून 2009 से ये यात्रा शुरू की गई थी.
5. विश्वास यात्रा : अप्रैल 2010 में उन्होंने विश्वास यात्रा की. इस दौरान उन्होंने अपनी पूरी ताकत से इस यात्रा में हिस्सा लिया था. 28 अप्रैल 2010 से नीतीश कुमार इस यात्रा पर निकले थे.
6. सेवा यात्रा : वर्ष 2011 में नीतीश कुमार ने सेवा यात्रा की थी. 9 नवंबर 2011 से नीतीश कुमार ने अपनी इस यात्रा की शुरुआत की थी.
7. अधिकार यात्रा : नीतीश कुमार ने 2012 में अधिकार यात्रा की थी. बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर उन्होंने बिहार भर में सभाएं की थी. 19 सितंबर 2012 से इस यात्रा की शुरुआत हुई थी.
8. संकल्प यात्रा : वर्ष 2014 में नीतीश कुमार संकल्प यात्रा पर निकले थे. 2014 में लोकसभा चुनाव होने थे और ठीक उस से पहले नीतीश कुमार ने यह यात्रा की थी. इस यात्रा की शुरुआत 5 मार्च से किया गया था.
10. निश्चय यात्रा : साल 2015 में पहली बार बिहार में महागठबंधन की सरकार बनी थी, और नीतीश कुमार में सात निश्चय योजना की शुरुआत की थी. इसके बाद साल 2016 में उन्होंने निश्चय यात्रा निकाली थी. इसका उद्देश्य सात निश्चय के तहत हो रहे कार्यों की समीक्षा करना था. 09 नवंबर 2016 से इस यात्रा का आगाज हुआ था.
11. समीक्षा यात्रा : नीतीश कुमार ने साल 2017 में बिहार भर में विकास कार्यों की समीक्षा यात्रा निकाल कर विकास कार्यों की समीक्षा की थी. इस यात्रा का आरंभ 12 दिसंबर 2017 से किया गया था.
12. जल जीवन हरियाली यात्रा : साल 2019 में नीतीश कुमार ने जल जीवन हरियाली यात्रा की थी. इसके तहत सभी जिलों में जल जीवन हरियाली के तहत हो रहे कार्यों का जायजा लिया था. इस यात्रा को 03 दिसंबर 2019 से शुरू किया गया था.
14. समाधान यात्रा : साल 2023 में नीतीश कुमार ने समाधान यात्रा की. इस यात्रा के तहत उन्होंने बिहार के कई गांवों का दौरा किया और अमृत सरोवर तथा अन्य चीजों के निर्माण का जायजा लिया था. 05 जनवरी 2023 से इस यात्रा की शुरुआत हुई थी.
किन-किन यात्रा से नीतीश कुमार को मिला लाभ
2004 लोकसभा चुनाव में जदयू बिहार में 24 सीटों पर लड़ी थी लेकिन केवल 6 सीटों पर ही जेडीयू जीत सकी थी. इसके बाद 2005 बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी. नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार में सबसे पहला चुनाव 2009 लोकसभा चुनाव हुआ था. लोकसभा चुनाव से पहले 09 जनवरी 2009 से नीतीश कुमार ने विकास यात्रा किया था.
इसका फायदा जदयू को अगले साल हुए लोकसभा चुनाव में मिला था. जदयू ने 2009 में बीस में से बीस सीटें जीत ली थी. इसके अलावा 2010 विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने विश्वास यात्रा की थी, जिसके बाद जदयू को बिहार में अपार जनसमर्थन मिला था और जदयू ने 115 सीटें अपने नाम कर ली थी.
जमुई के वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि बिहार में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इस से पहले नीतीश कुमार ने महिला संवाद यात्रा की घोषणा की. अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि बिहार में नीतीश कुमार की सरकार में महिलाओं की काफी अहम भूमिका है. चाहे शराबबंदी हो या जीविका का गठन हो, जदयू ने हमेशा महिलाओं को अपनी सरकार में तरजीह दी. इस कारण महिलाओं का बड़ा समर्थन जदयू को मिलता रहा है.
इसे देखते हुए ही नीतीश कुमार ने महिला संवाद यात्रा की घोषणा की. लेकिन एन वक्त पर इस फैसले को बदल कर अब सीएम प्रगति यात्रा करने वाले हैं. इसके पीछे की वजह गठबंधन के भीतर अंदरूनी असामंजस्य भी हो सकता है या खरमास के बाद महिला संवाद यात्रा करने से नीतीश कुमार चुनाव से ठीक पहले महिला वोटरों से बात करने के लिए भी ऐसा कर सकते हैं. बहरहाल बिहार में नीतीश कुमार और उनकी यात्रा पिछले दो दशक से बिहार की राजनीति में एक बड़ा रोल निभाते आ रहे हैं.







