आज नवरात्रि का नौवां दिन है. महानवमी के दिन माता के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. आज ही के दिनमाता ने महिषासुर का वध किया था. जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत मानी जाती है. बिहार में नवरात्रि की एक अलग ही धूम देखने को मिलती है. जगह जगह पंडाल लागए जाते हैं, तरह तरह की मात की मूर्ति देखने को मिलती है. महानवमी के दिन के मंदिरों में भक्तों की भीड़ सुबह से ही लगी हुई है. लोग माता के अलग-अलग स्वरूपों की अराधना कर उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं, ताकि उनकी मनोकामना पूर्ण हो.
भक्तों की उमड़ पड़ी भीड़
अररिया में हाई स्कूल रोड दुर्गा मंदिर व अस्पताल रोड स्थित अम्बे अर्चना दुर्गा पूजा समिति में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है. पूजा के लिए अहले सुबह से ही श्रद्धालु हाथ में नारियल, चुनरी पूजन सामग्री लेकर पूजा के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. माता की प्रतिमा के समक्ष प्रसाद चढ़ाने और खोइछा भरने के लिए सुबह 6 बजे से ही महिलाओं के आने-जाने का सिलसिला शुरू हो गया है.
4 किलो चांदी का मुकुट चढ़ाया गया
मुंगेर में नवरात्र के अष्टमी पर देर शाम सदर प्रखंड के चरौन स्थिति मैदान में शौलपुत्री दुर्गा मंदिर का पट खुलते ही मातारानी की दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भी भीड़ उमड़ पड़ी. चरौन के इस शैलपुत्री दुर्गा मंदिर को लेकर कहा जाता है कि श्रद्धालु इस मंदिर में जो भी दिल से कुछ मांगते हैं. उसकी मां हर मुरादे पूरी करती है. चरौन के इस शैलपुत्री दुर्गा मातारानी में भक्तों ने गाजे बाजे के साथ 4 किलो चांदी की मुकुट और 11 सौ लड्डू इस मंदिर में भक्तों ने चढ़ावा चढ़ाया है.
बिहार में शारदीय नवरात्रि की रौनक है। नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। मां दुर्गा के महिषासुरमर्दिनी रूप की पूजा हो रही है। कहा जाता है कि मां ने महानवमी के दिन राक्षस महिषासुर का वध किया था। देवी सिद्धिदात्री की पूजा का भी विधान है। मान्यता है कि देवी की आराधना करने जीवन में सुख-समृद्धि सदैव बनी रहती है। पंडालों में आज के दिन विशेष पूजा अर्चना की जा रही है। आज के दिन ही सबसे ज्यादा श्रद्धालु पंडालों में जाते हैं, लिहाजा पुलिस-प्रशासन की ओर से विशेष तैयारी की गई है।
नवरात्रि में आज महानवमी
नवरात्रि का अंतिम दिन महानवमी है। ये दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। मान्यता है कि महानवमी के दिन मां दुर्गा अपनी पूर्ण दिव्य शक्ति प्रकट की थीं। मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर को हराया था, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। बिहार में ज्यादातर शहरों और गांवों में दुर्जा पूजा के लिए प्रतिमा स्थापित की गई है। अलग-अलग तरह के पंडाल बनाए गए हैं। नवमी के दिन काफी तादाद में श्रद्धालु पंडालों का रूख करते हैं। बाजारों में काफी भीड़ रहती है, लिहाजा पुलिस-प्रशासन के लिए शांति-व्यवस्था बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं रहता है। लिहाजा, प्रशासन के स्तर पर भी पुख्ता तैयारी की गई है।
शाम तक नवमी का शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक नवरात्रि की नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की विधिवत पूजा करने से धन, बल, यश का आशीर्वाद मिलता है। सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि की महानवमी तिथि 22 अक्तूबर 2023 को शाम 7 बजकर 58 मिनट से शुरू है। जिसका समापन 23 अक्तूबर को शाम 5 बजकर 44 मिनट पर है। उदय तिथि की आधार पर 23 अक्टूबर को महानवमी मनाई जा रही है। महानवमी के दिन कन्या पूजन की भी परंपरा है। कई लोग कुंवारी कन्याओं का भोज कराते हैं।
पटना के ट्रैफिक रूट में बदलाव
दुर्गापूजा और दशहरा के मद्देनजर पटना में ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े स्तर पर बदलाव किया गया है। 24 अक्टूबर तक कई मार्गों पर वाहनों की आवाजाही पर रोक है। डाकबंगला चौराहा जानेवाली सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही बंद है। शहर के कई अन्य इलाकों में भी गाड़ियों की आवाजाही शाम और रात के वक्त रोक है। डाकबंगला चौराहा, आयकर गोलम्बर, कोतवाली के पास यातायात में व्यापक बदलाव है। चौक मोड़ से दीदारगंज तक केवल पश्चिम से पूरब की ओर छोटे वाहन जा सकते हैं। पश्चिम दरवाजा से अशोक राजपथ, पूरब दरवाजा से अशोक राजपथ पटना सिटी चौक से अशोक राजपथ में पूरब से पश्चिम की ओर गाड़ी नहीं जाएगी।
बिहार में दिखी दुर्गा पूजा की धूम
बिहार में शारदीय नवरात्र धूम है। इस मौके पर पूजा पंडाल में मां के पूजन और दर्शन के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। आरा शहर में भी एक से बढ़कर एक पूजा पंडाल स्थापित किए गए हैं। पंडाल के अंदर भव्य मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। कहीं पर्यावरण को संरक्षित करने का संदेश तो कहीं राधा कृष्ण मंदिर राजस्थान का स्वरूप तो कहीं जूनागढ़ का किला तो कहीं इको पार्क पंडाल का निर्माण किया गया है। इस मौके पर भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है।







