जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर से उम्मीदवार प्रशांत किशोर का ‘पेपर बम’ फूटता और बीजेपी के उम्मीदवार अभिषेक बंटी बाहर। प्रशांत किशोर की इसी प्लानिंग के साथ बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की जंग को जीतने की तैयारी थी। प्रशांत किशोर की टीम ने जो पेपर बम तैयार किया था, वो समय के पहले ब्लास्ट हो गया और बीजेपी को संजीवनी मिल गई। चलिए जानते हैं कि क्या थी प्रशांत किशोर की प्लानिंग और कैसे तैयार की गईं थी चुनाव जीतने की रणनीति?
प्रशांत किशोर का ‘पेपर बम’ क्या?
अभी तक ‘पेपर बम’ से सम्राट चौधरी, मंगल पांडेय, संजय जायसवाल और अशोक चौधरी जैसे कद्दावर नेताओं के प्रशांत किशोर ने होश उड़ाए थे। प्रशांत किशोर ने बांकीपुर से एनडीए के उम्मीदवार बीजेपी नेता अभिषेक बंटी के खिलाफ भी एक ‘पेपर बम’ तैयार किया था। व्यूरचना यह थी कि चुनाव वापसी के तिथि खत्म होने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिषेक बंटी के संदर्भ में इकट्ठा किए गए ‘पेपर बम’ को प्रशांत किशोर फोड़ते। उस दस्तावेज में इतनी ताकत थी कि उनका नामांकन ही रद्द हो जाता और बीजेपी चुनाव से ही आउट हो जाती या फिर किसी निर्दलीय उम्मीदवार को अपना समर्थन देती।
किसी ‘विभीषण’ ने लीक कर दी प्रशांत किशोर की पूरी प्लानिंग?
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से ही बीजेपी उम्मीदवार अभिषेक बंटी को बाहर करने को तैयार बैठे प्रशांत किशोर की पूरी प्लानिंग जन सुराज के किसी ‘विभीषण’ ने समय से पहले लीक कर दी। यह सूचना इतनी विस्फोटक थी कि बीजेपी के रणनीतिकारों को अपने घोषित उम्मीदवार का नामांकन वापस कराना पड़ा और नया उम्मीदवार नरेंद्र भारती मंडल के अध्यक्ष नीरज कुमार सिन्हा को बनाना पड़ा।
प्रशांत किशोर के ‘पेपर बम’ में था क्या?
हालांकि अधिकारिक रूप से अभी तक तो कुछ भी सामने नहीं आया है। पर आज शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशांत किशोर सब कुछ बताने वाले हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अभिषेक बंटी को चुनावी मैदान से हटाने के पीछे एक नहीं कई कारण थे।
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1. अभिषेक बंटी पर कुछ मामले दर्ज हैं, जिसमें मारपीट और छेड़खानी का आरोप भी शामिल है। यह सूचना नामांकन में छिपाई गई थी।
2. नामांकन में शैक्षणिक योग्यता को लेकर मैट्रिक पास की जानकारी दी गई थी। पर सूत्र बताते हैं कि यह डिग्री न तो बिहार बोर्ड, सी बीएससी या फिर आईसीएससी बोर्ड से थी। पर उन्होंने मैट्रिक संस्कृत बोर्ड से पास की थी। लेकिन इस सर्टिफिकेट को लेकर कई विसंगतियां की बात भी सामने आई।
3. अभिषेक बंटी के पिता रविंद्र प्रसाद सिन्हा बिहार के बहुचर्चित ‘चारा घोटाले’ में दोषी पाए गए थे। ये ‘मेसर्स मगध केमिकल्स कॉर्पोरेशन’ नाम की एक कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। इस कंपनी पर चारा घोटाले के दौरान फर्जी बिलों के आधार पर अवैध सप्लायर बनने और सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की हेराफेरी करने का गंभीर आरोप लगा और ये दोषी साबित हुए और 50 हजार रुपया जुर्माना भी लगा।







