बिहार में I.N.D.I.A गठबंधन के बीच लोकसभा सीटों का बंटवारा अब तक नहीं हो पाया है। गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस को 9 से 12 सीटें चाहिए। यह दावा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह पहले ही कर चुके हैं। वहीं, माले भी पांच सीटों पर अपनी दावेदारी ठोक चुकी है। I.N.D.I.A गठबंधन के अंदर सीट बंटवारे का पेंच कहां फंसा है।
विधान सभा उप-चुनाव में संबंध खराब थे, अब अच्छे
कांग्रेस ही वह पार्टी है, जिसको लेकर लालू प्रसाद और सीएम नीतीश कुमार के बीच ठोस सहमति नहीं बन पा रही है। गठबंधन में कांग्रेस की मौजूदगी से दोनों को आपत्ति नहीं है, लेकिन सीटों को लेकर एक सहमति नहीं है।
हालांकि, राजद का जो रवैया कांग्रेस के प्रति विधानसभा उप-चुनाव और विधान परिषद चुनाव में था। वह आगामी लोकसभा चुनाव में नहीं दिखेगा। 2020 विधानसभा चुनाव के बाद तेजस्वी यादव कांग्रेस से नाराज थे।
इसकी वजह थी कि कांग्रेस 75 सीटों पर चुनाव लड़ी और जीत सिर्फ 19 सीटों पर ही मिली।

विधानसभा चुनाव के बाद कई नेता यह कहने लगे थे कि माले को ज्यादा सीटें मिली होती तो रिजल्ट बेहतर होता। फिर तेजस्वी मुख्यमंत्री बन गए होते, लेकिन अब कांग्रेस और राजद के बीच संबंध मधुर हो गए हैं।
यही वजह है कि राहुल गांधी दिल्ली स्थित मीसा भारती के आवास पर पहुंचे और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से मुलाकात की थी। लालू प्रसाद ने राहुल गांधी को बिहारी मटन बनाने का तरीका भी सिखाया था। फिर साथ में डिनर भी किए थे।
कांग्रेस के पास खड़गे जैसे दलित नेता
दूसरी तरफ देखें तो जदयू और कांग्रेस के बीच रिश्ते उतने प्रगाढ़ नहीं हैं। वजह यह है कि कांग्रेस और राजद के संबंध बीजेपी से दुश्मन वाले रहे हैं, जबकि जदयू और बीजेपी जब-तब साथ मिल कर सरकार बनाती रही है।
नीतीश कुमार तो केंद्र में कई विभागों के मंत्री एनडीए सरकार में ही रहे थे। इससे कांग्रेस को बहुत ज्यादा भरोसा नीतीश कुमार पर नहीं हो रहा है। कांग्रेस जितना भरोसा लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव पर करती है, उतना नीतीश कुमार पर नहीं।

इंडिया गठबंधन लोकसभा चुनाव में बेहतर परफॉर्म करती है तो नीतीश कुमार पीएम पद के दावेदार होंगे या नहीं। यह स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस के पास खड़गे जैसे दलित नेता हैं, जो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।
बताया जा रहा है कि राजद चाहती है कि कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में ज्यादा सीटें दी जाए, जिसपर नीतीश कुमार सहमत नहीं है। इसको लेकर लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के बीच कई बैठकें भी हुई है, लेकिन सीटों के बंटवारा फाइनल नहीं हो पाया है।
कांग्रेस इसलिए अड़ी हुई है
वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं कि बिहार में कांग्रेस बड़ी भूमिका में है। इसमें कोई दो मत नहीं है। कांग्रेस चाह रही है कि बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 8-9 सीटें मिले, लेकिन पहली बार जदयू और राजद एक गठबंधन में लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।
विधानसभा चुनाव दोनों साथ लड़ चुके हैं। ऐसे में जदयू और राजद के बीच सीट शेयरिंग की बात लगभग तय मानी जा रही है। इसके बाद कांग्रेस और वाम दल हैं। कांग्रेस 9 सीटों की मांग कर रही है, लेकिन उसे 7 सीट पर मनाने की कोशिश है। इसी पर पेंच फंसता दिख रहा है।
नीतीश कमजोर कड़ी हो गए हैं
बीजेपी का मानना है कि कांग्रेस और राजद के दबाव में नीतीश कुमार हैं। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने बताया कि बिहार में इंडिया गठबंधन में हर कोई एक दूसरे को ठगने में लगे हैं। नीतीश कुमार तो इस चतुराई के शिकार बुरी तरह से हो गए हैं।
इस गठबंधन में नीतीश कुमार सबसे कमजोर कड़ी हैं। अपनी कुर्सी को बचाने के लिए लालू प्रसाद की दरबारी करने को तैयार हो गए हैं। पहले उन्हें न जाने क्या-क्या सपने दिखाए। अब किसी लायक नहीं छोड़ा है।

10 सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी, अंतिम फैसला आलाकमान करेंगे’
कांग्रेस के प्रवक्ता असितनाथ तिवारी कहते हैं कि गठबंधन के तहत कांग्रेस बिहार में कम से कम 10 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। हालांकि, अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व को लेना है। हमारे प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह निर्णय लेंगे। देश की जनता बीजेपी को समझ चुकी है। इस बार बीजेपी की झांसे में नहीं फंसने वाली है।
बीजेपी में तो चाचा और भतीजा को लड़ाकर मौज लिया जा रहा
राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद कहते हैं कि बीजेपी तो चाचा-भतीजा को लड़वाकर मौज कर रही है। सीट शेयरिंग की बात एनडीए में होनी चाहिए। इन सबों की पोल खुल चुकी है। इंडिया गठबंधन बना है विचारों के स्तर पर। विचारों के मेल में सीटों का कोई मामला नहीं होता है। हम मुद्दों के आधार पर नरेंद्र मोदी को घेर रहे हैं। सीटों के बंटवारे में कहीं कोई पेंच नहीं है। समय आने पर बीजेपी को पता चल पाएगा कि हम सीटों का बंटवारा कैसे करते हैं।
यह सब कॉर्डिनेशन कमिटी तय कर लेगी
जदयू के प्रवक्ता अभिषेक झा कहते हैं कि नीतीश कुमार ने गठबंधन बना कर देश में मॉडल पेश किया है। इंडिया गठबंधन बनने के बाद बीजेपी में बेचैनी है। वह अपने गिरेबान में झांकने की बजाय हमारे घर में देख रही है।
सीटों के बंटवारे का मामला कॉर्डिनेशन कमिटी तय करेगी। बीजेपी अपनी चिंता करें। जनता ने सच्चाई को जान लिया है। बुनियादी मुद्दों पर इंडिया गठबंधन चुनाव लड़ेगा और जीतेगा।







