भारत की ओर से गये शिष्टमंडल में शामिल बिहार विधान सभा के अध्यक्ष अवध विहारी चौधरी ने घाना की राजधानी अक्करा में आयोजित ६६वें राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन के दौरान शक्ति के पृथक्करण पर लैटिमर सिद्धांत के २० वर्ष ‘क्या यह प्रभावी है’ विषय पर संबोधन दिया। कही। राष्ट्रमंडल देशों के द्वारा २० वर्ष पूर्व शक्ति के पृथक्करण पर स्थापित लैटिमर हाउस सिद्धांत आज दुनिया में लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सुशासन‚ जवाबदेही और पारदर्शिता इस सिद्धांत की बुनियादी आवश्यकतायें है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायिका‚ कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्ति संतुलन के विषय पर दुनिया के विभिन्न देशों में अलग–अलग प्रावधान है। लैटिमर हाउस सिद्धांत हमें बताता है कि प्रत्येक संस्था को अपने संवैधानिक क्षेत्र के भीतर शक्ति के प्रयोग में जिम्मेदारी और संयम से काम लेना चाहिए ताकि किसी अन्य संस्था को संवैधानिक रूप से प्रदत्त शक्ति का अतिक्रमण न करना पडे। भारत के संविधान की मूल भावना में इस शक्ति संतुलन को प्राथमिकता दी गई है‚ जिससे आम नागरिकों के हितों की प्रभावकारी ढंग से रक्षा की जा सके। नियंत्रण और संतुलन की प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि विधायिका‚ कार्यपालिका और न्यायपालिका में कोई अंग अत्यधिक शक्तिशाली न हो जाये। भारतीय संविधान कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया की गारंटी प्रदान करता है। एक तरह से हमारे यहां न्यायपालिका स्वतंत्र है‚ पर हमारे यहाँ न्यायाधीशों की नियुक्ति कार्यपालिका द्वारा की जाती है। श्री चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र के मजबूतीकरण में‚ कानून के निर्माण में विधायिका की महत्वपूर्ण भूमिका है और लोकतंत्र के मंदिरों की शालीनता‚ गरिमा और मर्यादा केवल तीन ‘डी’ अर्थात डिबेट‚ डिस्कस और डिसाइड के पालन से ही कायम रह सकती है।
कार्यपालिका के द्वारा विधायिका के निर्णयों का अनुपालन किया जाता है । कार्यपालिका की कोई पहल संविधान की भावना‚ विधायिका द्वारा दी गई शक्ति से इतर होती है तो न्यायपालिका‚ कार्यपालिका के उस निर्णय पर लगाम लगाती है । ॥ सद्भाव की खोज ही इस प्रतिष्ठित सभा में विचार–विमर्श का विषय है। एक बार जब प्रत्येक अंग के पास यह व्यापक लक्ष्य होगा और व्यापक सार्वजनिक हित को ध्यान में रखा जाएगा‚ तो एक सहक्रियात्मक कार्यप्रणाली की नींव रखी जाएगी । उस भावना को आपसी सम्मान और जिम्मेदारी की उच्च भावना के साथ लगातार संरक्षित और पोषित करना ही हमारा ध्येय होना चाहिए ।







