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सामान्य नागरिक संहिता पर क्यो उलझन में फंसा है विपक्ष ….

ओवैसी की पार्टी, फारूक़ अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की पार्टी को छोड़कर दूसरी विपक्षी पार्टियां न तो इसका विरोध कर सकती हैं, न खुलकर समर्थन कर पाएंगी।

UB India News by UB India News
July 1, 2023
in ब्लॉग, राष्ट्रीय
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समान नागरिक कानून लागू होने पर क्या-क्या बदल जाएगा……….
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यूनीफॉर्म सिविल कोड के मुद्दे पर बुधवार को दो घटनाएं हुई। पहली, विधि आयोग (लॉ कमीशन) के अध्यक्ष जस्टिस ऋतुराज अवस्थी ने साफ कह दिया कि वो समान नागरिक संहिता के मसले पर गंभीरता से आगे बढ़ रहे हैं। अब तक इस मसले पर 8.5 लाख सुझाव  मिल चुके हैं। जस्टिस ऋतुराज अवस्थी ने लोगों से अपील की है कि वो ज्यादा से ज्यादा संख्या में इस मसले पर अपनी राय दें। दूसरी घटना ये हुई कि समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर विपक्ष में फूट पड़ गई। आम आदमी पार्टी ने साफ कर दिया कि वो सैद्धान्तिक तौर पर यूनीफॉर्म सिविल कोड का समर्थन करती है। अरविन्द केजरीवाल की पार्टी के इस रुख से विरोधी दलों में खलबली है। अब कांग्रेस, आरजेडी, समाजवादी पार्टी और जेडी-यू जैसी पार्टियां परेशान हैं। हालांकि केजरीवाल की पार्टी ने ये साफ नहीं किया है कि अगर सरकार यूनीफॉर्म सिविल कोड का बिल लाती है, तो पार्टी इसका समर्थन करेगी या नहीं, लेकिन इतना जरूर कहा है कि सैद्धान्तिक तौर पर पार्टी कॉमन सिविल कोड के पक्ष में हैं। केजरीवाल की पार्टी के इस रुख पर कांग्रेस और जेडीयू ने हैरानी जताई है। अब सवाल ये है कि क्या कॉमन सिविल कोड का मुद्दा विपक्षी एकता के लिए खतरा बन जाएगा? या फिर केजरीवाल कांग्रेस पर दवाब बनाने के लिए इस तरह का दांव चल रहे हैं ? जमीयत उलेमा ए हिन्द के अध्यक्ष अरशद मदनी समेत तमाम मौलानाओं ने समान नागरिक संहिता पर एतराज जताया, लेकिन कुछ ऐसे मुस्लिम विद्वान सामने आए जिन्होंने कहा कि यूनीफॉर्म सिविल कोड का इस्लाम से कोई लेना देना नहीं है, अगर इसे लागू किया जाता है तो ये मुसलमानों की बेहतरी के लिए उठाया गया बड़ा कदम होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को भोपाल में यूनीफॉर्म सिविल कोड की जो बात कही थी। आम आदमी पार्टी ने जो रुख अपनाया उससे विरोधी दल सावधान हो गए हैं, इस मुद्दे पर संभल कर बोल रहे हैं। NCP के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि यूनीफॉर्म सिविल कोड का विरोध तो NCP भी नहीं करती, लेकिन पहले ये पता तो चले कि सरकार क्या करना चाहती है। जमीयत उलेमा ए हिन्द के अध्यक्ष और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना अररशद मदनी ने कहा कि ये मसला वोटों की खातिर उठाया गया है वरना मुसलमान तो इस देश में 1300 साल से रह रहे हैं, अब तक तो किसी को कोई दिक्कत नहीं हुई। फिर अचानक इस तरह के कानून की जरुरत क्यों पड़ गई? ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने भी यूनीफॉर्म सिविल कोड का विरोध किया और कहा कि अगर यूनीफॉर्म सिविल कोड आया तो इससे मुसलमानों को दिक्कत होगी। मध्य प्रदेश में चुनाव होने हैं, इसलिए  मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता भी ये बात समझ रहे हैं, इसलिए वो इस मसले को ज्यादा तूल नहीं देना चाहते। मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि बीजेपी ये सब असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए कर रही है। कांग्रेस बीजेपी की चाल में नहीं फंसेगी। कमलनाथ ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा बीजेपी को उठाने दीजिए, कांग्रेस मंहगाई, बेरोजगारी की बात करेगी। जिस तरह से यूनीफॉर्म सिविल कोड पर सियासत शुरू हुई है, उससे ये तो साफ हो गया कि मोदी का तीर निशाने पर लगा है। ये ऐसा मसला है जिससे विरोधी दलों में फूट के आसार दिखाई देने लगे है। इसका पहला सबूत केजरीवाल की पार्टी के रुख से मिल गया। दूसरी बात ओवैसी की पार्टी, फारूक़ अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की पार्टी को छोड़कर दूसरी विपक्षी पार्टियां न तो इसका विरोध कर सकती हैं, न खुलकर समर्थन कर पाएंगी। अगर विरोध किया तो हिन्दुओं को वोट जाने का खतरा होगा और समर्थन किया तो मुसलमानों की नाराजगी झेलनी पड़गी। इसीलिए अब सभी पार्टियों ने ये कहना शुरू कर दिया है कि सरकार पहले बिल का ड्राफ्ट सामने रखे, सभी पार्टियों की मीटिंग बुलाए, उसके बाद ही वो इस मुद्दे पर अपनी राय देंगे। लेकिन मुझे लगता है कि बीच का ये रास्ता भी काम नहीं आएगा क्योंकि जिस तरह से मोदी ने इस पर खुल कर बात की है, उसका संकेत साफ है कि सरकार इस मामले में अपना मन बना चुकी है। संसद का मॉनसून सत्र 17 जुलाई से शुरू हो सकता है। अगर सरकार ने मॉनसून सत्र में बिल का ड्राफ्ट पेश कर दिया तो कांग्रेस और दूसरे विरोधी दलों की वही हालत होगी, जो कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकिल 370 को खारिज करने के वक्त हुई थी। सबने मजबूरी में ही सही, इसका समर्थन किया था। इसीलिए मैंने कहा कि आज नहीं तो कल, विरोधी दलों को इस मुद्दे पर साफ स्टैंड लेना ही पड़ेगा और नरेंद्र मोदी विरोधी दलों को इसके लिए मजबूर करेंगे। चूंकि कई मुस्लिम उलेमा ने यूनीफॉर्म सिविल कोड का खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया है, इसलिए विपक्षी दल इस वक्त दुविधा वाली स्थिति में हैं।

 

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