बिहार में स्कूली शिक्षकों की भर्ती को लेकर हंगामा चल रहा है। बिहार सरकार ने शिक्षकों की भर्ती में बिहार के अलावा दूसरे राज्यों के लोगों को भी इम्तहान में बैठने की छूट दे दी है। इसका जमकर विरोध हो रहा है। दरअसल, बिहार सरकार ने इसी महीने की शुरुआत में 1 लाख 70 हजार शिक्षकों की भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की थी। उसके बाद इसके नियमों में बदलाव हुए। मंगलवार को राज्य सरकार ने एक विज्ञापन जारी किया जिसमें बताया गया कि शिक्षकों की भर्ती वाली परीक्षा में शामिल होने के लिए बिहार का मूल निवासी होने की शर्त हटा दी गई है। अब देश के सभी राज्यों के नौजवान बिहार में शिक्षकों की भर्ती की परीक्षा दे सकते हैं। नीतीश कुमार की सरकार के इस फैसले से परीक्षा की तैयारी कर रहे बिहार के नौजवान नाराज हो गए और सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट की कॉल दे दी। बीजेपी ने भी सरकार के इस फैसले का विरोध किया। बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने जो बात कही, उससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। चन्द्रशेखर ने कहा कि चूंकि इससे पहले हुई भर्तियों में गणित, विज्ञान और अंग्रेज़ी के अच्छे शिक्षक नहीं मिल पाते थे, जगह खाली रह जाती थी, इसलिए इस बार दूसरे राज्यों के लोगों को भी परीक्षा में मौका देने का फैसला किया गया। इससे मेधावी उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। लेकिन नौकरी की उम्मीद में सालों से तैयारी कर रहे बिहार के नौजवानों को सरकार के ये तर्क नागवार गुजरे हैं। छात्र संगठनों ने फैसला वापस लेने के लिए बिहार सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। छात्र नेताओं का कहना है कि शिक्षा मंत्री एक तो बिहार के बच्चों के मौके छीन रहे हैं और दूसरी तरफ उनकी मेधा पर सवाल उठा रहे हैं, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिहार के बीजेपी नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि बिहार के लोगों का गुस्सा जायज है, अगर दूसरे राज्यों के बच्चे शिक्षक भर्ती परीक्षा में बैठेंगे तो बिहार के बच्चों का क्या होगा? सुशील मोदी ने कहा कि हकीकत ये है कि नीतीश कुमार की सरकार की मंशा शिक्षकों की भर्ती की है ही नहीं, सरकार चाहती है कि केस कोर्ट में चला जाए और भर्ती की प्रक्रिया लटक जाए। बिहार सरकार की ये बात तो सही है कि देश के किसी भी हिस्से के नौजवानों को बिहार में रोजगार के मौके से वंचित नहीं किया जा सकता, लेकिन सवाल ये है कि क्या नीतीश कुमार को ये बात पहले से नहीं मालूम थी। उन्होंने बार बार नियमों में बदलाव क्यों किया। फिर दूसरे राज्यों के नौजवानों को भर्ती में शामिल करने के लिए अलग से विज्ञापन क्यों निकाला? इसके बाद सरकार अपनी बात सही तरीके से छात्रों को समझाती। ऐसा करने के बजाए शिक्षामंत्री ने बिहार के बच्चों के टैलेंट पर ही सवाल उठा दिया। ये ठीक नहीं हैं, इससे छात्रों का गुस्सा और बढ़ेगा। छात्र संगठन सड़कों पर उतरेंगे, फिर इस पर सियासत होगी और सुशील मोदी की ये बात सही है कि कोई कोर्ट चला जाएगा और भर्ती की प्रक्रिया लटक जाएगी। इससे नुकसान बिहार के नौजवानों का ही होगा।
शिक्षक नियुक्ति नियमावली में किए गए संशोधन से भ्रमित नहीं होने की अपील







