भारत की 117 सर्वाधिक प्रभावशाली महिलाओं का नाम वर्ष 2026 की कैंडेरे हुरुन इंडिया वुमेन लीडर्स लिस्ट में आना उस सामाजिक बदलाव की इबारत है, जिसमें महिलाएं सिर्फ सफलता की दर्शक नहीं, बल्कि आर्थिक सफलता की कहानियां रच रही हैं। ये महिलाएं 39 लाख करोड़ रुपये के साम्राज्य पर राज करती हैं, जो फिनलैंड की कुल जीडीपी से भी अधिक है।
इन सफल महिलाओं की सूची का सबसे दिलचस्प और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इनमें से 98 (यानी 84 फीसदी) ने अपनी मेहनत और उपलब्धियों के बल पर यह मुकाम हासिल किया है, जो विरासत में मिली संपत्ति या पद के जरिये आगे बढ़ने वाली महिलाओं की संख्या से ज्यादा है। 2025 की सूची में 97 महिलाएं शामिल थीं, यानी पिछले साल के मुकाबले 21 फीसदी अधिक महिलाओं ने इस सूची में अपनी जगह बनाई है। इसे महिला सशक्तीकरण जैसी प्रचलित शब्दावली में बांधना इनकी उपलब्धियों को कमतर करके आंकना होगा।
वास्तव में, यह सूची संकेत है कि भारतीय महिलाएं शिक्षा, उद्यमिता, व्यवसाय, खेल, मीडिया, कला, साहित्य और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रही हैं, जो लंबे समय तक पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र माने जाते थे। बेशक यह सूची उत्साहित करती है, पर सवाल यह भी उठता है कि करीब 140 करोड़ की आबादी वाले देश में मात्र 117 महिलाओं की सूची के क्या मायने हैं।
सूची का दूसरा पहलू उस असमानता को भी दर्शाता है, जिसमें करोड़ों महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर नहीं मिल पाते। बड़े शहरों और कॉरपोरेट जगत की इन महिलाओं की सफलता इस बात की गारंटी नहीं हो सकती कि देश के छोटे शहरों, कस्बों की महिलाओं को भी शिक्षा, उद्यम और नेतृत्व के मौके मिल रहे हैं। एक महिला की सफलता की कहानी बेशक सैकड़ों महिलाओं को प्रेरित कर सकती है, पर सामाजिक ढांचे और व्यवस्था में सुधार से ही देश की अधिकांश महिलाओं को शिक्षा, व्यवसाय, कला और शासन-प्रशासन में नेतृत्व के अवसर मिल सकते हैं।
केवल कुछ महिलाओं के शीर्ष पर पहुंचने से महिला सशक्तीकरण का लक्ष्य हासिल नहीं हो सकता, इसके लिए वैसी सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियां बनानी होंगी, जिनमें सबको आगे बढ़ने के समान अवसर मिल सकें। इस दृष्टि से यह सूची समाज के लिए आईना भी है और चुनौती भी।
आईना इसलिए कि देश की करोड़ों महिलाओं को शिक्षा, सुरक्षा और सामाजिक अवसर नहीं मिल पाते हैं और चुनौती इसलिए कि हमें इन वंचित महिलाओं के लिए वैसा वातावरण तैयार करना है, जो उन्हें देश के विकास में योगदान करने का अवसर प्रदान कर सके।
देश की सबसे प्रभावशाली महिलाएं कौन हैं
भारत में महिलाएं अब सिर्फ परिवार की विरासत संभालने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने दम पर कारोबार, स्टार्टअप, खेल, पत्रकारिता, साहित्य, फैशन और सामाजिक बदलाव जैसे क्षेत्रों में नई पहचान बना रही हैं। 2026 की कैंडेरे हुरुन इंडिया वुमन लीडर्स सूची के दूसरे संस्करण में पिछले साल की तुलना में अधिक महिलाओं को जगह मिली है। रिपोर्ट बताती है कि भारत की सबसे प्रभावशाली महिलाओं की पहचान अब केवल दौलत से नहीं, बल्कि उनके नेतृत्व, नवाचार, सामाजिक प्रभाव और उपलब्धियों से तय हो रही है।
पिछले साल से क्या बदला?
2025 में इस सूची में 97 महिलाएं थीं, जबकि 2026 में यह संख्या बढ़कर 117 हो गई है। इस बार सूची को 9 से बढ़ाकर 12 कैटेगरी में बांटा गया है। सबसे अहम बात यह है कि सूची में शामिल 117 में से 98 महिलाएं (करीब 84%) सेल्फ-मेड हैं, यानी उन्होंने अपनी सफलता विरासत में नहीं पाई, बल्कि अपने दम पर बनाई है। हुरुन इंडिया के संस्थापक और मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद के अनुसार, अब भारत में नेतृत्व विरासत से ज्यादा मेहनत और उपलब्धियों के आधार पर तय हो रहा है।
किन क्षेत्रों की महिलाओं को जगह मिली?
इस बार सूची सिर्फ उद्योग जगत तक सीमित नहीं रही। इसमें बिजनेस, स्टार्टअप, खेल, पत्रकारिता, साहित्य, फैशन, सोशल मीडिया, सामाजिक बदलाव और नई अर्थव्यवस्था (एआई, ईवी, डीप टेक, क्लाइमेट टेक, क्लीन एनर्जी, हेल्थ टेक) जैसे क्षेत्रों की महिलाओं को शामिल किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि ओलंपिक और पैरालंपिक पदक विजेता सबसे बड़ी कैटेगरी बनकर उभरी। इसमें 20 महिलाएं शामिल हैं, जिनमें 60% पैरा-एथलीट हैं।