देश भर में मतांतरण की घटनाओं ने एक नया विमर्श पैदा किया है। हाल में रांची की एक नाबालिग किशोरी ने अपने मुस्लिम पति द्वारा मतांतरण का दबाव दिए जाने पर आत्महत्या कर ली। राजस्थान के उदयपुर में हिन्दू लड़की पर मुस्लिम लड़के ने न केवल शादी का दबाव बनाया‚ बल्कि उसे धमकी भी दी कि नहीं मानी तो उसका भी हाल दिल्ली की साक्षी की तरह कर देगा। हापुड़़ की एक मुस्लिम पुत्रवधू ने अपने हिन्दू सास–ससुर को बेरहमी से इसलिए पीटा कि किसी तरह वह उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने के लिए राजी कर सके। उत्तराखंड के ज्वालापुर में धार्मिक पहचान छिपाकर युवती को शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया। एक और घटना में हाथ में कलावा‚ माथे पर तिलक लगाने वाला बबलू हिन्दू नहीं‚ आबिद निकला जिसने अपनी पहचान छुपाकर हिन्दू युवती से न केवल प्रेम संबंध का नाटक किया‚ बल्कि उसे जाल में फंसाकर अपने पिता से उसका दुष्कर्म भी कराया।
ऐसी अनेक घटनाएं रोजाना देखने–सुनने को मिल जाती हैं। हममें से ज्यादातर लोग इन्हें धार्मिक‚ राजनैतिक और व्यक्तिगत मामला मानकर नजरंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या वाकई ऐसे मामले नजरंदाज कर दिए जाने चाहिए। महिलाओं के परिप्रेIय से ही सही इन्हें एक नये चश्मे से देखा‚ पढ़ा और समझा जाना चाहिए। नारी की सुरक्षा में सेंध लग रही है। उसे प्रताडि़त और अपमानित किया जा रहा है। उसकी अस्मत के साथ खेला जा रहा हो तो क्या ऐसे मामलों को उन्मादी और धार्मिक मानकर इनसे पीछा छुड़ाया जाना चाहिए। महिलाएं चाहे किसी कौम भी हों‚ यदि अपमानित होती हैं‚ तो छींटें देश के दामन पर भी पड़ते हैं। आखिर‚ ऐसी कौन सी मानसिकता है जो लोगों को जबरन मतांतरण और दुष्कर्म की ओर धकेलती है। विवाह पवित्र बंधन है‚ और दो जीवात्माओं के इस मिलन में रुहानी और कौमी आजादी के अपने मायने हैं। आखिर‚ कोई भी धर्म किसी दूसरे धर्म से बेकद्री‚ बेरु खी और बेइल्मी की कतई आजादी नहीं देता। जोड़े जब आपसी रजामंदी से विवाह के जरिए हमेशा के लिए एक होने का निर्णय लेते हैं‚ तो ऐसे में अपने साथी पर मतांतरण का बेवजह दबाव बनाने का क्या औचित्य।
दरअसल‚ लव जिहाद के शाब्दिक अर्थों को लें तो इसके अर्थ इसके निहित उद्देश्यों की पुष्टि करते हैं। आशय साफ है कि जब धर्म विशेष को मानने वाला व्यक्ति दूसरे धर्म की लड़की को प्यार के जाल में फंसाकर किसी प्रकार का प्रलोभन देकर या विवाह के जरिए धर्म परिवर्तन करवा देता है‚ तो इस पूरी प्रक्रिया को लव जिहाद कहा जाता है। मतलब यह कि आत्मिक प्रेम भी सौदा बन चुका है। यह कैसा रास्ता चुन रही है नई पीढ़ी जहां प्रेम जैसा नाजुक रिश्ता कत्लेआम और जोर–जबरदस्ती से होकर गुजरता है। हालांकि जोर–जबरदस्ती रोकने के लिए कानून बनाए गए हैं। विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश–२०२० के मुताबिक एक जनवरी‚ २०२१ से ३० अप्रैल‚ २०२३ के बीच तकरीबन १८५ लडकियों के धर्म परिवर्तन कराए गए। कानून के मुताबिक‚ यदि साबित हो जाए कि विवाह का एकमात्र उद्देश्य महिला का धर्म परिवर्तन कराना था‚ तो ऐसी शादियों को अवैध करार दिया जाता है। धर्म में आस्था बेहद व्यक्तिगत मसला है और प्रेम में बंधना रुहानी मामला। ऐसे में दोनों एक दूसरे के प्रतिगामी न बनें‚ न ही दबाव का जरिया। लव में केवल प्रेम हो। उसमें जिहाद की कोई गुंजाइश नहीं। नई पीढ़ी को यह बात समझनी होगी।







