ADVERTISEMENT
Wednesday, July 29, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

अमृतपाल गिरफ्तार, अब आगे का क्या होगा राह

UB India News by UB India News
April 24, 2023
in अपराध, कानून, खास खबर, ब्लॉग
0
अमृतपाल गिरफ्तार, अब आगे का क्या होगा राह
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

खालिस्तान समर्थक भगोड़े कट्टरपंथी और ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख अमृतपाल सिंह एक महीने से ज्यादा समय तक पुलिस से छुपते फिरने के बाद आखिर रविवार सुबह मोगा के रोडे गांव में गिरफ्तार कर लिया गया। इसे खालिस्तान समर्थक तत्वों की कुटिल मंशा का ही उदाहरण कहेंगे कि अमृतपाल की गिरफ्तारी को भी ऐसा रूप देने की कोशिश की गई, जैसे उसने आत्मसमर्पण किया हो। लेकिन पुलिस की तरफ से यह स्पष्ट कर दिया गया कि उसकी बाकायदा गिरफ्तारी हुई है। पुलिस टीम गिरफ्तारी के लिए गुरुद्वारे के अंदर नहीं गई, लेकिन बाहर उसने ऐसी कड़ी घेरेबंदी कर रखी थी कि अमृतपाल का बचकर निकलना मुश्किल था।

गुरुद्वारे से निकलते ही पुलिस टीम ने उसे गिरफ्त में ले लिया। इस पूरे मामले में पंजाब पुलिस ने जितनी परिपक्वता और कुशलता दिखाई है, उसकी तारीफ की जानी चाहिए। 23 फरवरी को जिस तरह अमृतपाल ने समर्थकों की भीड़ के साथ गुरुग्रंथ साहब का इस्तेमाल करते हुए अजनाला पुलिस स्टेशन पर धावा बोला और अपने करीबियों की रिहाई सुनिश्चित कराई, वह इस बात का सबूत था कि उसके हैंडलर्स उसके जरिए खुलकर खेलने के मूड में आ गए थे। उनके मुताबिक सभी जरूरी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और उन्हें लगता था कि अब उनके इशारे पर अमृतपाल और उसके लोग पुलिस प्रशासन को सीधी चुनौती दे सकते हैं। यह बड़ी खतरनाक स्थिति थी।

RELATED POSTS

राज्यसभा में पास हुआ वंदेमातरम बिल, राष्ट्रीय गीत का अपमान करना अब पड़ेगा भारी

स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट: 3000 उपद्रवियों के चलते अटकी FIR वापसी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहां फंसा पेच?

जरा सी असावधानी पंजाब को मुसीबतों के नए भंवर में डाल सकती थी। इसलिए जल्दबाजी में कदम उठाने के बजाय पुलिस ने वक्त लेकर सारी योजना तैयार की और फिर पूरी तैयारी के साथ 18 मार्च को अमृतपाल के खिलाफ कार्रवाई की। हालांकि वहां से अमृतपाल निकल भागा, लेकिन फिर भी पुलिस टीम ने न तो अतिरिक्त बल प्रयोग किया और न ही राज्य का माहौल बिगड़ने दिया। धीरे-धीरे अमृतपाल के करीबियों को गिरफ्त में लेते रहे और उसके चारों ओर शिकंजा कसते रहे। कुछ समय में उसके सारे विकल्प खत्म हो गए। इस दौरान न केवल केंद्रीय एजेंसियों ने हर कदम पर पंजाब पुलिस के साथ सहयोग किया बल्कि राज्य और केंद्र सरकारों के बीच भी जबरदस्त तालमेल नजर आया।

अमृतपाल पर NSA के तहत केस दर्ज किया गया है। NSA के तहत केस दर्ज होने से अब अमृतपाल को एक साल तक जेल में रहना पड़ सकता है।

सवाल- 1 : क्या है नेशनल सिक्योरिटी एक्ट यानी NSA, जिसके तहत अमृतपाल को गिरफ्तार किया गया है?

जवाब : नेशनल सिक्योरिटी एक्ट यानी NSA एक निवारक निरोध यानी प्रिवेंटिव कस्टडी होती है। इसके तहत किसी व्यक्ति को अपराध करने के लिए नहीं बल्कि अपराध की आशंका में गिरफ्तार किया जाता है और जेल में रखा जाता है।

इस बात की तस्दीक कलेक्टर करता है। बाकायदा वो कई सारी रिपोर्ट पेश करता है। इसके आधार पर साबित करता है कि इस व्यक्ति का जेल में रहना जरूरी है, वर्ना यह गंभीर अपराध को अंजाम दे सकता है। इससे समाज और कानून व्यवस्था को खतरा पैदा हो सकता है।

कुल मिलाकर ये कानून अपराध होने से पहले सरकार को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की गिरफ्तारी की शक्ति देता है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विराग गुप्ता बताते हैं कि NSA का कानून संसद से 1980 में पास हुआ था।

इस कानून को बनाने के पीछे एक वजह यह थी कि जो हमारे संविधान के अनुसार रूल ऑफ लॉ यानी कानून का शासन है, उसके तहत दो बातें हैं। पहला- किसी की बेवजह गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए। दूसरा- गिरफ्तारी होने के 24 घंटे के भीतर उसको मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना चाहिए। ये बातें CrPC यानी क्रिमिनल प्रोसिजर कोड में भी कही गई हैं।

हालांकि एक्सेप्शनल केसेस यानी विशिष्ट परिस्थितयों में सरकार को संविधान के ऑर्टिकल 22 (3) के तहत प्रिवेंटिव डिटेंशन की पावर दी गई है। यदि किसी व्यक्ति को NSA के तहत गिरफ्तार किया गया है तो उसे आर्टिकल 22(1) और 22(2) के तहत प्राप्त ‘गिरफ्तारी और हिरासत के खिलाफ संरक्षण’ का अधिकार प्राप्त नहीं होगा।

सवाल-2 : किस वजह से NSA लगाया जाता है?

जवाब : विराग बताते हैं कि सरकार इन 4 परिस्थितियों में किसी को भी अपराध होने की आशंका में गिरफ्तार कर सकती है…

  1. राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में
  2. मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर के मामले में
  3. पड़ोसी देशों के साथ संबंध के मामले में
  4. भारत की सरहदों की सुरक्षा के मामले में

सवाल-3 : क्यों अमृतपाल पर भारी पड़ेगा NSA, यानी कितने साल तक जेल में रहना पड़ेगा?

जवाब : विराग के मुताबिक, आर्टिकल 22 (4 ) के तहत सामान्यत: तीन महीने तक लोगों को प्रिवेंटिव डिटेंशन में रखा जा सकता है। इसकी अधिकतम अवधि एक साल तक हो सकती है। यानी अमृतपाल को भी एक साल तक बिना सुनवाई के जेल में रहना पड़ सकता है।

इसके ऑर्डर का पुलिस से कोई लेना-देना नहीं होता है। यह प्रशासनिक आदेश होता है जो DM या कमिश्नर द्वारा पारित किया जाता है। इसको कन्फर्म करने के लिए एक एडवाइजरी बोर्ड बनता है। यानी जिस शख्स पर NSA लगाया गया है वो सही है कि नहीं।

इस बोर्ड में सामान्यत: तीन सदस्य होते हैं। इनमें से एक रिटायर्ड जज होता है। इसके बारे में संविधान के आर्टिकल 22 (5) में प्रावधान है। कई रिसर्च में दावा किया गया है कि अगर सरकार एक बार किसी पर NSA लगाती है तो सामान्यत: एडवाइजरी बोर्ड भी उसे कन्फर्म कर देता है।

सवाल-4 : अमृतपाल NSA लगने के बाद क्या कर सकता है?

जवाब : अमृतपाल सिंह पर NSA लगने के साथ ही अपहरण और हत्या के प्रयास जैसे दर्जनों और भी केस दर्ज हैं। ऐसे में अमृतपाल बाकी मुकदमों में जमानत की अपील करेगा और मुकदमे लड़ेगा।

हालांकि NSA के केस में वह यह अपील कर सकता है कि जिला कलेक्टर ने जो NSA लगाया है वो गलत है। अगर इस पर सुनवाई हो जाती है तो वह बच सकता है, लेकिन ऐसा होता बहुत कम होता है।

विराग बताते हैं कि NSA के तहत गिरफ्तारी IPC या CrPC कानून के तहत नहीं होती है। ऐसे में इसमें जमानत का भी प्रावधान नहीं होता है। यानी क्रिमिनल कोर्ट के सामने जमानत की अर्जी देने के बारे में कोई नियम नहीं है

इस मामले में जमानत के लिए हाईकोर्ट में संविधान के आर्टिकल 226 के तहत या सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 32 के तहत याचिका दायर करके अदालत से ही हैबियस कॉर्पस यानी बंदी प्रत्यक्षीकरण या किसी अन्य के तहत राहत की मांग की जाती है।

इसमें आरोपी कहता है कि डीएम की तरफ से जो आरोप लगाए गए हैं वे गलत हैं। गिरफ्तारी गलत तरीके से हुई है। कोर्ट अगर इसे मान लेता है, तभी आरोपी को राहत मिल सकती है।

सवाल-5 : सरेंडर और गिरफ्तारी में क्या अंतर होता है, इससे केस पर क्या फर्क पड़ेगा?

जवाब : विराग कहते हैं कि जब पुलिस किसी को गिरफ्तार करती है तो कई बार सर्च वारंट होने पर बरामदगी भी होती है। बरामदगी अवैध असलहों की हो सकती है, दूसरे सामान की हो सकती है। आगे चलकर इसका सबूत के तौर पर इस्तेमाल हो सकता है।

वहीं जब कोई आरोपी सरेंडर करता है तो उसमें रिकवरी नहीं होती है। सरेंडर करने से कई बार कोर्ट का रुख नरम रहता है, क्योंकि सरेंडर खुद आरोपी कर रहा है। इसे गिरफ्तार नहीं किया गया है। इसके मन में आपराधिक भावना नहीं है, वह खुद ही कानून के पास आया है।

कानून किसी के पीछे जाकर उसे दबोचे तो वह गिरफ्तारी होती है। कोई खुद कानून के पास आ जाए तो ये बताने की कोशिश होती है कि हम सहयोग कर रहे हैं। कोर्ट के आदेश के बाद जब कोई रिमांड में जाता है तो उसका जीवन भी सुरक्षित रहता है। यानी सरेंडर नहीं किया तो एनकाउंटर जैसा खतरा भी होता है।

सवाल-6 : अमृतपाल को पंजाब से करीब 2800 किलोमीटर दूर असम की डिब्रूगढ़ जेल क्यों ले जाया गया है?

जवाब : अमृतपाल को सुरक्षा के नजरिए से असम की डिब्रूगढ़ जेल में ले जाया गया है, क्योंकि पंजाब में रहने पर इसके पक्ष में आंदोलन हो सकते हैं। राज्य में कानून व्यवस्था का खतरा पैदा हो सकता है।

अमृतपाल को असम इसलिए ले जाया गया, ताकि पंजाब में इसके पक्ष में न तो माहौल बने और न इसकी वजह से बिगड़े। पंजाब में रहने पर इसको छुड़ाने का भी प्रयास हो सकता है।

अब आपके मन में सवाल उठ सकता है कि गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भी अमृतपाल को ले जाया जा सकता थ। देखा जाए तो अमृतपाल सिंह और उसके साथियों को डिब्रूगढ़ जेल ले जाने के पीछे राजनीतिक से ज्यादा प्रशासनिक कारण अहम है।

असम में खालिस्तान समर्थन का कोई आधार नहीं है। लिहाजा वहां जेल ब्रेक होने की आशंका बहुत कम है। गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सिख समुदाय के लोग काफी संख्या में रहते हैं और ये सभी राज्य असम के मुकाबले पंजाब के नजदीक भी हैं।

समर्थकों के लिए पंजाब से इन राज्यों में पहुंचना आसान है, लेकिन इतनी दूर असम आकर कुछ करना बहुत मुश्किल है। साथ ही पंजाब की जेल में लोकल कनेक्शन बन सकते हैं। असम में रहने पर ये भी नहीं हो सकेगा।

 

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

राज्यसभा में पास हुआ वंदेमातरम बिल, राष्ट्रीय गीत का अपमान करना अब पड़ेगा भारी

by UB India News
July 29, 2026
0

राज्यसभा में वंदेमातरम बिल पास हो गया है. बता दें कि इस बिल को 24 जुलाई को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री...

स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट: 3000 उपद्रवियों के चलते अटकी FIR वापसी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहां फंसा पेच?

स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट: 3000 उपद्रवियों के चलते अटकी FIR वापसी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहां फंसा पेच?

by UB India News
July 29, 2026
0

NEET पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में...

CJP प्रोटेस्ट: ना DCP का आदेश, ना RAF की कार्रवाई… तो फिर कैसे चली पैलेट गन?

CJP प्रोटेस्ट: ना DCP का आदेश, ना RAF की कार्रवाई… तो फिर कैसे चली पैलेट गन?

by UB India News
July 29, 2026
0

दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर हिंसा में पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया है. पुलिस के मुताबिक, डीसीपी ने...

2029 के लोकसभा चुनाव में उतरेंगे Gen-Z?

कौन हैं सीजेपी आंदोलन से निकले वायरल चेहरे?

by UB India News
July 29, 2026
0

जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन आप सभी ने देखा होगा. यह जेन जी का द‍िल्‍ली में पहला...

ट्रंप के लिए गले की हड्डी बना ईरान युद्ध- नाटो ने छोड़ा साथ और अमेरिका में जनता खफा !

ट्रेड डील के बीच क्यों बौराये डोनाल्ड ट्रंप?

by UB India News
July 29, 2026
0

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत चल रही है. कुछ मुद्दों पर सहमति न बन पाने...

Next Post
पंचायती राज दिवस : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज विंध्य दौरा …………..

पंचायती राज दिवस : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज विंध्य दौरा ..............

सुप्रीम कोर्ट अतीक-अशरफ की हत्या की जांच में कमेटी बनाने की मांग पर 24 अप्रैल को करेगा सुनवाई,

अतीक-अशरफ हत्या मामले की 28 अप्रैल को 'सुप्रीम' सुनवाई, 2017 से अब तक हुए एनकाउंटर की जांच की भी मांग

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend