राजधानी दिल्ली के अति सुरक्षित साकेत कोर्ट परिसर में एक बार फिर गोलीबारी से उसकी चाक–चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई। शुक्रवार सुबह एक निलंबित वकील ने पैसे के लेन देन के विवाद में महिला पर ४ राउड़ फायर झोंक दिए जिनमें से तीन गोली महिला को लगी। अत्यंत सुरक्षित अदालत परिसर में इस वारदात ने सुरक्षा और चौकसी के दावे की हवा निकाल दी। पहला मौका नहीं है जब दिल्ली की अदालत में इस तरह की दुस्साहसिक घटना को अंजाम दिया गया है। पिछले साल दौरान रोहिणी कोर्ट और कड़़कड़़डू़मा कोर्ट में फायरिंग की १–१ वारदात तो २०२१ में रोहिणी कोर्ट में गोलीबारी की दो घटनाओं को अंजाम दिया गया। २०१९ में तीस हजारी अदालत में भी पुलिस और वकीलों में झड़़प के बाद फायरिंग में गोली वकील को लग गई थी। २०१५ में कड़़कड़़डूमा कोर्ट के अंदर हमलावरों की गोली से पुलिस के एक जवान की मौत हो गई थी। ऐसे में महत्वपूर्ण सवाल यही है कि पुलिस की भारी तैनाती‚ सीसीटीवी से निगरानी‚ स्कैनर‚ मेटल डि़टेक्टर‚ मल्टी प्वॉइंट मेटल डि़टेक्टर और स्थानीय खुफिया यूनिट की चौकसी के बावजूद कोई कैसे इतने बड़़े अपराध को अंजाम दे सकता है। यानी यह सीधे तौर पर पुलिस की लापरवाही का मामला है। साकेत कोर्ट‚ दिल्ली में रोजाना एक लाख से ज्यादा लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे में फिलहाल जो व्यवस्था पुलिस की है (चेकिंग के लिए गेट पर दो–तीन पुलिसकर्मी और चार–पांच निजी सुरक्षाकर्मी होते हैं) उसमें व्यापक बदलाव होने चाहिए। पुलिस के जवानों की तादाद ज्यादा करने की जरूरत है। दूसरा ये कि कई बार वकील धौंस जमाकर खुद या अपने वाहन की जांच कराने से बचते हैं। पुलिस वालों और सुरक्षाकर्मियों के टोकने पर विवाद करते हैं। याद रखना होगा कि सुरक्षा पुलिस या आम जन की ही नहीं होती‚ बल्कि वकील और अन्य स्टाफ की भी होती है। लिहाजा‚ सभी को सुरक्षा के नाम पर एक–दूसरे को सहयोग करना होगा। चूंकि यह एक दिन का मसला नहीं है‚ इसलिए हर किसी को सतर्क रहना होगा। आसपास नजर रखनी होगी। अच्छी बात है कि महिला खतरे से बाहर है। कानून–व्यवस्था के मामले में थोड़़ी सी भी लापरवाही की भारी कीमत चुकानी पड़़ सकती है। औपचारिकता से बचकर संजीदगी से सभी को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करना होगा।
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राज्यसभा में वंदेमातरम बिल पास हो गया है. बता दें कि इस बिल को 24 जुलाई को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री...






