काग्रेस नेता राहुल गांधी ने लुटियंस दिल्ली स्थित अपना सरकारी आवास शनिवार को खाली कर दिया। वह 12 तुगलक लेन स्थित सरकारी बंगला खाली करने के बाद मां सोनिया गांधी के आवास पर कुछ समय के लिए रहने चले गए। मानहानि के एक मामले में दोषसिद्धि के बाद लोक सभा की सदस्यता गंवाने के बाद राहुल गांधी को २२ अप्रैल तक यह बंगला खाली करने को कहा गया था। वह पिछले १९ साल से बंगले में रह रहे थे। आवास खाली करने के उपरांत कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने सच बोलने की कीमत चुकाई है‚ और आगे कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हैं। महंगाई और भ्रष्टाचार का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। गौरतलब है कि कर्नाटक के कोलार में एक सभा में राहुल ने 2019 में ‘मोदी उपनाम’ संबंधी टिप्पणी की थी। इसे लेकर सूरत की एक अदालत में याचिका लगाई गई जिस पर अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुना दी। इस फैसले के आलोक में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संसद की सदस्यता से अयोग्य ठहरा दिए गए। मजिस्ट्रेट अदालत के इस आदेश के खिलाफ उन्होंने सत्र अदालत का रुख किया लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई। सत्र अदालत में दोषसिद्धि और अयोग्यता से राहत मिल जाती तो उन्हें सरकारी आवास खाली नहीं करना पड़़ता। केरल के वायनाड़़ से लोक सभा में चुने जाने पर उन्हें इस सरकारी आवास में रहने का अधिकार था। सत्र अदालत के आदेश को अब वे उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। बहरहाल‚ राहुल गांधी के सांसदी खो बैठने और सरकारी बंगला खाली करने की नौबत तक आ पहंुचने में उनकी अपनी भी गलती है। सूरत की निचली अदालत के आदेश के खिलाफ तत्काल ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाया जाना चाहिएथा। लेकिन राहुल और उनकी पार्टी की कोशिश थी कि खुद को वंचित और पीडि़़त के रूप में पेश किया जाए। कांग्रेस के पास वरिष्ठ वकीलों की पूरी कतार है‚ लेकिन उन्हें इस मामले से दूर रखने की कोशिश साफ दिखी। हालांकि यह पूरा मामला विशुद्ध रूप से तकनीकी है‚ अदालत में ही लड़़ा जाना है। इसमें राजनीति की गुंजाइश तलाशने की कोशिश सिरे से तार्किक नहीं कही जा सकती। कांग्रेस ने ‘मेरा घर आपका घर’ हैशटैग का उपयोग करके जतलाने की बचकानी कोशिश भी की कि राहुल गांधी का जनता के साथ अटूट रिश्ता है। लेकिन उसे ध्यान रहना चाहिए‚ नाखून कटाकर शहीद होने की कोशिश से उसे कुछ हासिल नहीं होने वाला।
राज्यसभा में पास हुआ वंदेमातरम बिल, राष्ट्रीय गीत का अपमान करना अब पड़ेगा भारी
राज्यसभा में वंदेमातरम बिल पास हो गया है. बता दें कि इस बिल को 24 जुलाई को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री...






