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क्या बिहार की सियासत में एक बार फिर से बड़ा उलटफेर होने वाला है?

UB India News by UB India News
February 25, 2023
in पटना, बिहार
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क्या बिहार की सियासत में एक बार फिर से बड़ा उलटफेर होने वाला है?
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क्या बिहार की सियासत में एक बार फिर से बड़ा उलटफेर होने वाला है? क्या होली के बाद तेजस्वी यादव बिहार के मुख्यमंत्री बन जाएंगे? क्या उपेंद्र कुशवाहा में इतनी ताकत है कि वे जेडीयू के एक तिहाई विधायकों को तोड़ सकते हैं? अगर मौजूदा सरकार में कोई उठा-पटक हुई तो वो कौन कर सकता है? और उसका फॉर्मूला क्या हो सकता है? क्या भाजपा बिहार में सरकार बना पाने की स्थिति में है? क्या बिहार में मध्यावधि चुनाव हाे सकते हैं?

ये वो सवाल हैं जो इन दिनों बिहार की सियासत और जनता के मन में उठ रहे हैं। इन सवालों के उठने का कारण विपक्ष नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के विधायक और पार्टी संगठन के बडे़ नेताओं का बड़बोलापन है।

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राजद के विधायक तेजस्वी यादव को बिहार का सीएम बनता देखना चाहते हैं तो जेडीयू के नेता भी पलटवार करने में पीछे नहीं रहते। तेजस्वी को सीएम बनाने की बात पर ही तो उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू छोड़ नई पार्टी बना ली।

ऐसे में बिहार में जारी पॉलिटिकल बयानबाजी के बीच हमने आरजेडी, जेडीयू और बीजेपी के एमएलए, एमएलसी और नेताओं के मन को कुरेदा। उनसे जाना कि ये बस बयानबाजी भर है या इसमें थोड़ी सी भी सच्चाई है।

ऑन द रिकॉर्ड उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया,लेकिन ऑफ द रिकॉर्ड उन्होंने हमसे सारी सच्चाई साझा की।

सीएम नीतीश कुमार अब केंद्र की राजनीति की तैयारी में जुट गए हैं। वे पहले ही इस बात की घोषणा कर चुके हैं कि 2025 में महागठबंधन का नेतृत्व तेजस्वी यादव करेंगे।
सीएम नीतीश कुमार अब केंद्र की राजनीति की तैयारी में जुट गए हैं। वे पहले ही इस बात की घोषणा कर चुके हैं कि 2025 में महागठबंधन का नेतृत्व तेजस्वी यादव करेंगे।

अब 9 सवालों के जवाब से समझिए, बिहार की सियासत में जारी सियासी ड्रामे की पूरी कहानी…

1. क्या बिहार की सियासत में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होने वाला है ?

फिलहाल इस बात में किसी प्रकार का कोई दम नहीं है। खुफिया विभाग का इनपुट भी यही कह रहा है कि सरकार को फिलहाल कोई नुकसान नहीं होने वाला है।

नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार पूरी तरह स्थिर है। दोनों पार्टियों का पूरा फोकस फिलहाल 25 फरवरी को पूर्णिया में आयोजित होने वाली महागठबंधन की महारैली पर है।

आरजेडी के महासचिव और बिहार सरकार में पूर्व मंत्री रहे जेडीयू नेता ने बताया कि 2014 की गलती 2024 में किसी भी सूरत में नहीं दोहराई जाएगी।

नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव खुद इस बार पूरी तरह अलर्ट हैं। 2014 में जेडीयू और आरजेडी दोनों पार्टियां ने लोकसभा का चुनाव अलग-अलग लड़ा था।

2. क्या होली के बाद तेजस्वी यादव बिहार के मुख्यमंत्री बन जाएंगे?

इसकी चर्चा 21 फरवरी से शुरू हुई। तब रोहतास के दिनारा के विधायक विजय मंडल ने कहा था कि 2025 नहीं होली के बाद तेजस्वी यादव बिहार का नेतृत्व संभालेंगे।

उनके इस बयान के बाद इस बात को हवा मिली कि क्या तेजस्वी मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं? मामला बढ़ा, इसके बाद तेजस्वी को खुद सामने आकर इस पर सफाई देनी पड़ी।

22 फरवरी को तेजस्वी यादव ने पहले जहानाबाद फिर गया में कहा कि उन्हें फिलहाल सीएम बनने की कोई हड़बड़ी नहीं है। इस बयान के बाद एक तरह से तेजस्वी यादव ने इन सारी अटकलों पर ब्रेक लगा दिया।

3. क्या उपेंद्र कुशवाहा में इनती कुवत है कि जेडीयू के एक तिहाई बहुमत को तोड़ लें?

20 फरवरी को जेडीयू से इस्तीफा देने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि जेडीयू के कई विधायक उनके संपर्क में हैं। ऐसे में इस बात की चर्चा जोर पकड़ने लगी कि क्या वो जेडीयू के विधायकों को तोड़ देंगे?

इस पर बिहार के वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत कहते हैं कि अपने दम पर कुशवाहा 5 सीट तक जीत नहीं सकते, विधायक कैसे तोड़ सकते हैं।

जेडीयू में रहते हुए कभी इतने पावरफुल नहीं रहे कि वे पार्टी को तोड़ सकें। उपेंद्र कुशवाहा के पार्टी छोड़ने के बाद जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी ये बात कही थी कि उनके साथ पार्टी के कोई नेता खड़ा नहीं है।

जेडीयू छोड़ने से पहले उपेंद्र कुशवाहा ने पटना की सिन्हा लाइब्रेरी में दो दिनों तक जो बैठक की थी उसमें भी पार्टी का कोई बड़ा नेता शामिल नहीं हुआ था।

तेजस्वी यादव को नेतृत्व सौंपने के विरोध में उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू से इस्तीफा देकर अपनी नई पार्टी बनाई है। इसके बाद ललन सिंह ने सफाई दी कि जेडीयू का कहीं विलय नहीं हो रहा है। नीतीश कुमार ही नेतृत्व करेंगे।
तेजस्वी यादव को नेतृत्व सौंपने के विरोध में उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू से इस्तीफा देकर अपनी नई पार्टी बनाई है। इसके बाद ललन सिंह ने सफाई दी कि जेडीयू का कहीं विलय नहीं हो रहा है। नीतीश कुमार ही नेतृत्व करेंगे।

4. अगर मौजूदा सरकार में कोई उठापटक हुई तो वो कौन कर सकता है? और उसका फॉर्मूला क्या हो सकता है?

इस सवाल पर बीजेपी के संगठन मंत्री रह चुके और वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अगर मौजूदा सरकार में कोई उठापटक होती है तो गेमचेंजर सिर्फ तेजस्वी यादव हो सकते हैं। भाजपा नहीं। ऐसा कैसे? इस पर वे कहते हैं कि आरजेडी के पास अभी 79 विधायक हैं।

इन्हें कांग्रेस के 19 और लेफ्ट के 16 विधायकों का समर्थन पहले से मिला है। इस आधार इनके पास 114 विधायक होते हैं। इसमें जीतन राम मांझी के हम के 4 और निर्दलीय के 1 विधायक को जोड़ लें तो संख्या 119 हो जाती है। जबकि सरकार बनाने के लिए 122 विधायक चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार अरुण पांडेय कहते हैं कि बिना जेडीयू के समर्थन के सरकार बनाने के लिए तेजस्वी महाराष्ट्र का फॉर्मूला भी बिहार में अपना सकते हैं।

महाराष्ट्र में बीजेपी ने शिवसेना से शिंदे गुट को अलग कर उन्हें विधानसभा में अलग से मान्यता दिलवा दी थी। इसके बाद अपना समर्थन देकर बीजेपी ने सरकार बना ली। तेजस्वी यहां ऐसा जेडीयू के साथ कर सकते हैं।

जेडीयू को तोड़ने की जगह उनके10 विधायकों को अलग कर विधानसभा में अलग दल की मान्यता दिला दें और उनके समर्थन से अपनी सरकार बना लें। विधानसभा में स्पीकर भी आरजेडी के हैं, तो उनके लिए ये आसान हो सकता है ।

5. क्या वाकई में भाजपा बिहार में सरकार बना पाने की स्थिति में है?

नहीं। बीजेपी के नेता खुद इस बात को स्वीकार करते हैं बिना जेडीयू के समर्थन के बीजेपी बिहार में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। बीजेपी के पास फिलहाल 78 विधायक हैं।

सरकार बनाने के लिए इन्हें कम से कम 44 विधायकों की जरूरत होगी, जो अभी सिर्फ जेडीयू के पास हैं। पार्टी के राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी दावा करते हैं कि बीजेपी अब 2025 में सरकार बनाएगी।

बीजेपी सांसद सुशील मोदी ने दावा किया है कि नीतीश कुमार लालू यादव को ठग रहे हैं। 2025 में बिहार में बीजेपी की सरकार बनेगी।
बीजेपी सांसद सुशील मोदी ने दावा किया है कि नीतीश कुमार लालू यादव को ठग रहे हैं। 2025 में बिहार में बीजेपी की सरकार बनेगी।

7. क्या बिहार में मध्यावधि चुनाव की स्थिति बन सकती है ?

इस बात को पूरे बिहार में चिराग पासवान के अलावा कोई नहीं बोल रहा है। बिहार की सियासत को करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत इसे सिरे से खारिज कर देते हैं। उन्होंने बताया कि बिहार में फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है। तेजस्वी यादव कोई जल्दी में नहीं हैं।

वे 2025 से पहले किसी प्रकार का कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। खासकर ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहेंगे जो उनकी छवि को नुकसान पहुंचाए। विधायक भी नहीं चाहते हैं कि समय से पहले उन्हें चुनाव मैदान में उतरना पड़े।

8. नीतीश कुमार के पास अब क्या-क्या विकल्प बचते हैं?

हर मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखने वाले सीएम नीतीश कुमार ने इस पूरे प्रकरण पर चुप्पी साध ली है। नीतीश के करीबी एमएलसी और पूर्व मंत्री बताते हैं कि नीतीश कुमार कब क्या करेंगे ये केवल वही जानते हैं, लेकिन अभी फिलहाल उनका पूरा फोकस 25 फरवरी को पूर्णिया में आयोजित होने वाली महागठबंधन की रैली पर है।

चर्चा है कि इस रैली में महागठबंधन की तरफ से औपचारिक तौर पर बिहार से नीतीश कुमार के समर्थन का ऐलान किया जाएगा। फिलहाल सभी की निगाहें उसी रैली पर है।

अगर उनके विकल्पों की बात करें तो आरजेडी से अलग होने के बाद उनके पास एक मात्र विकल्प बचता है कि वे एक बार फिर से भाजपा के पाले में आ जाएं, लेकिन अब बीजेपी नीतीश कुमार को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

9.इन सब के बीच बीजेपी किस रणनीति पर काम कर रही है ?

बिहार में बीजेपी को सरकार बनाने के लिए कम से कम 44 विधायक की जरूरत है। जो बिना जेडीयू के समर्थन के संभव नहीं है। इसलिए पार्टी का पूरा फोकस फिलहाल 2024 के लोकसभा चुनाव पर है। यही कारण है कि 6 महीने के भीतर अमित शाह दूसरी बार बिहार दौरे पर आ रहे हैं।

इसके साथ ही बीजेपी लगातार नीतीश कुमार को कमजोर बना रही है।इसके लिए पार्टी अपने साथ जातियों का एक गुलदस्ता तैयार कर रही है।

रणनीति के तहत पहले आरसीपी सिंह को बाद में उपेंद्र कुशवाहा को नीतीश कुमार से दूर किया गया। इसके अलावा पार्टी मुकेश सहनी और चिराग पासवान को भी अपने पाले में करने में जुटी हुई है।

बीजेपी एक-एक करके महागठबंधन के छोटे दलों को अपने पाले में करने में जुटी हुई है। आरसीपी सिंह, उपेंद्र कुशवाहा के बाद अब जीतन राम मांझी भी बागी रुख अपना रहे हैं।
बीजेपी एक-एक करके महागठबंधन के छोटे दलों को अपने पाले में करने में जुटी हुई है। आरसीपी सिंह, उपेंद्र कुशवाहा के बाद अब जीतन राम मांझी भी बागी रुख अपना रहे हैं।

उपेंद्र कुशवाहा के इस्तीफे के बाद तेज हुई सियासी बयानबाजी

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 20 फरवरी को हुई। इस दिन जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू का साथ छोड़ अपनी नई पार्टी रलोजद की घोषणा की। पार्टी छोड़ते वक्त उन्होंने कहा कि जेडीयू का अस्तित्व अब लगभग समाप्त हो गया है।

सीएम नीतीश कुमार ने पार्टी को आरजेडी के यहां गिरवी रख दिया है। अब उनके पास कुछ नहीं बचा है। वे पड़ोसी के यहां नेतृत्व ढूंढ रहे हैं। इसके साथ उन्होंने कहा कि पार्टी के कई विधायक उनके संपर्क में हैं।

डैमेज कंट्रोल करने आए ललन सिंह डैमज कर गए

उपेंद्र कुशवाहा के पार्टी छोड़ने के तुरंत बाद डैमेज कंट्रोल करने सामने आए जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह सामने आए। जाने-अंजाने डैमेज कंट्रोल की जगह वे डैमेज ही कर गए। उनके बयान के बाद नया विवाद शुरू हो गया। उन्होंने बचाव में कई बातें कही, लेकिन इस बीच वे 2025 में तेजस्वी के नेतृत्व को नकार गए।

उन्होंने कहा कि 2025 की बात 2025 में करेंगे। अभी 2024 पर ध्यान दें। जबकि सीएम नीतीश कुमार ने दिसंबर में ही इस बात की घोषणा कर दी थी कि 2025 का चुनाव तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।

तेजस्वी को भी रास नहीं आया ललन सिंह का बयान

ललन सिंह के इस बयान का रिएक्शन आरजेडी में तुरंत हुआ। खबर तो यहां तक है कि ललन सिंह का ये बयान तेजस्वी यादव को भी रास नहीं आया है। विरोध में वे पटना में होते हुए सीएम नीतीश कुमार के कार्यक्रम में नहीं गए। आखिर में सीएम के मैसेज के बाद लगभग डेढ़ घंटे बाद वे वहां पहुंचे।

ललन सिंह को 24 घंटे में बदलना पड़ा अपना बयान

21 फरवरी को रोहतास के दिनारा के विधायक विजय मंडल ने तो यहां तक कह दिया कि होली के बाद तेजस्वी यादव बिहार का नेतृत्व करेंगे। ललन सिंह के बयान पर आरजेडी के कई नेता ने नाराजगी जताई। स्थिति ये बन गई कि 24 घंटे के भीतर ललन सिंह को बयान जारी कर कहना पड़ा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया।

बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर तकरार पर डिप्टी CM तेजस्वी यादव ने बुधवार को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अभी सीएम बनने की कोई हड़बड़ी नहीं है। हमारा मुख्य मकसद है 2024 में बीजेपी को भगाना। हम उस मकसद से काम कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि भाजपा एक भी सीट नहीं जीते। महागठबंधन नीतीश कुमार के नेतृत्व में बेहतर काम कर रहा है।

तेजस्वी यादव बुधवार को बोधगया में पर्यटन सूचना केंद्र का उद्घाटन करने पहुंचे थे। यहां मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने ये बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मैं यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम करने आया हूं। बिहार में पर्यटकों की संख्या बढ़े, यही हमारा उद्देश्य है।

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