नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शेर बहादुर देउबा हिमालयी राज्य नेपाल के अगले प्रधानमंत्री होंगेॽ इस सवाल के जवाब में कई ‘किंतु’ ‘परंतु’ हैं। उन्हें पार्टी की संसदीय दल का नेता निर्वाचित कर लिया गया और इस तरह नेपाली कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री पद की दावेदारी का उनका रास्ता साफ हो गया। हिमालयी राज नेपाल में पिछले २० नवम्बर को आम चुनाव हुआ था। इस चुनाव में देउबा की नेपाली कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। हालांकि उन्हें संसदीय दल के नेता के पद के लिए पार्टी महासचिव गगन कुमार थापा के विरोध का सामना करना पड़ा। यह गौर करने वाली बात है कि इस आम चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। नेपाली कांग्रेस पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ की नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओईस्ट सेंटर) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड़ सोशलिस्ट) के साथ मिलकर चुनाव लड़ी थी। देउबा की नेपाली कांग्रेस के गठबंधन के साझीदार रहे कम्युनिस्ट नेता प्रचंड भी सत्ता के आकांक्षी हैं। यह माना जा रहा है कि इस चुनाव से पहले देउबा और प्रचंड ने बारी–बारी से सरकार का नेतृत्व करने के लिए समझौता किया था। प्रचंड ५ साल के कार्यकाल के शुरु आती ढाई साल में स्वयं को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। इसलिए यह कहना मुश्किल है कि नेपाल में उट किस करवट बैठेगा। २०१७ में केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) और प्रचंड के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ माओईस्ट सेंटर ने मिलकर २७५ सदस्यीय संसद की प्रतिनिधि सभा की दो–तिहाई सीट जीतकर पूरी दुनिया को आश्चर्य में डाल दिया था। मई २०१८ में जब इन दोनों पार्टियों का विलय हुआ तब इसे देश की अपराजेय राजनीतिक शक्ति के तौर पर देखा गया था‚ लेकिन राजनीतिक महत्वाकांक्षा और गुटबाजी के कारण यह एकता बिखर गई। इस ऐतिहंासिक राजनीतिक पृष्ठभूमि से यह सवाल उठता है कि क्या इस बार भी प्रचंड की राजनीतिक महत्वाकांक्षा शेर बहादुर देउबा की राह में रोड़़ा बनेगी। अगर ऐसा हुआ तो नेपाल फिर एक बार राजनीतिक अस्थिरता के दलदल में गहरे तक फंस जाएगा।
समृद्धि यात्रा में आज दरभंगा दौरे पर सीएम नीतीश, 145 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के तहत आज वे दरभंगा पहुंचेंगे, जहां 105 करोड़ की 50 योजनाओं का शिलान्यास...







