कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में जारी ‘भारत जोड़़ो यात्रा’ 100 दिन पार कर चुकी है। देश की मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के तत्वावधान में आयोजित यात्रा कुल 150 दिनों में देश के दक्षिणी भाग कन्याकुमारी से सुदूर उत्तर में कश्मीर तक जाएगी। यहां तक तो ठीक है‚ मगर अब राहुल की इस यात्रा को कोरोना की रफ्तार के कारण निलंबित करने के केंद्रीय मंत्री स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांड़विया की चिट्ठी के बाद अचानक से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
खैर‚ हम यहां इस बात की चर्चा नहीं करेंगे। न ही हम यात्रा की सफलता–असफलता का विश्लेषण करेंगे। बात करेंगे विशुद्ध एक नेता‚ इसकी पार्टी द्वारा लोगों से सीधे संवाद करने की कोशिशों के बारे में। ऐसे दौर में जब हर बात को राजनीतिक नजरिये से तौला जा रहा हो‚ कुछ कहने के अपने जोखिम हैं। यात्रा के घोषित लक्ष्यों से इतर इस बात का विश्लेषण ज्यादा समीचीन है कि यात्रा ने जनता से सीधा संवाद करने का पारंपरिक तरीका अभी जिंदा है। शायद यही इसका सबसे सकारात्मक पक्ष भी है। इसके कई व्यावहारिक पक्ष हैं। जैसे प्रतिनिधित्व का बढ़ता अनुपात। उदाहरण के लिए १० लाख सांसद पर एक प्रतिनिधि का मानक है। मगर आज यह ४० लाख तक पहुंच गया है। इससे जनप्रतिनिधियों का जनता से संवाद आसान नहीं रह गया है। इसके बावजूद अपने क्षेत्र से जनप्रतिनिधियों के कई दिनों तक गायब रहने की शिकायतें आम हैं। कई जनप्रतिनिधियों के बारे में तो यह भी कहा जाता है कि वो सिर्फ चुनाव के समय क्षेत्र में दिखाई देते है। इसका खमियाजा कुछ जनप्रतिनिधियों को चुनाव में हार के रूप में चुकाना पड़़ता है। कुल मिलाकर नेता जमीन पर नहीं आते हैं फलतः आमजन की समस्याओं से महरूम रह जाते हैं और उसका निदान भी नहीं हो पाता है। इससे भी महत्वपूर्ण प्रश्न लोगों से जुड़़ाव का है। जनप्रतिनिधि को जनता अभिभावक के रूप में देखती है। जो उनके दुख–दर्द को समझे। जिन तमाम बिंदुओ का जिक्र ऊपर है‚ वो राहुल की यात्रा से जुड़़ती हैं। ‘भारत जोड़़ो यात्रा’ इस मायने में अच्छी पहल कही जा सकती है। प्रमुख विपक्षी नेता जमीन पर जाकर लोगों से सीधा संवाद कर रहा है। आम लोगों और स्थानीय नजरिये से अधिकतम लाभ यह हो सकता है कि स्थानीय मुद्दे सामने आते हैं। चंकि राष्ट्रीय मीडि़या का ध्यान यात्रा पर होता है‚ फलस्वरूप स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर स्पेस मिलता है। हां‚ यात्रा तब और प्रभावी रहती है जब विवादों से दूर रहे।







