थर्ड पार्टी वाहन बीमा में वैसे व्यक्ति को परिभाषित किया जाता है जिन्हें बीमित वाहन से किसी प्रकार का नुकसान हुआ हो‚ अर्थात बीमित वाहन से जाने अनजाने में कोई टक्कर लग गई और दूसरे किसी व्यक्ति अथवा उसकी किसी संपत्ति को कुछ नुकसान हो गया। बीमा कवर में अस्थायी विकलांगता व स्थायी विकलांगता को भी शामिल किया गया है। थर्ड पार्टी बीमा‚ वाहन बीमा उद्योग में सबसे सस्ता और वैधानिक मान्यता प्राप्त बीमा होता है‚ किन्तु इसमें वाहन मालिक / चालक या वाहन से सम्बंधित किसी भी प्रकार का क्लेम नहीं मिलता है। यहां यह भी बताना जरूरी है कि यदि आपके पास नए क्रय किए हुए वाहन हैं या वाहन दस वर्ष या इससे ज्यादा पुराना है तो कांप्रिहेंसिव प्लान खरीदना ज्यादा फायतेमंद है। कांप्रिहेंसिव प्लान में थर्ड़ पाटी का कवर मिलता है ही साथ ही वाहन स्वामी अथवा वाहन को पहंुचने वाले नुकसान का भी कवर मिलता है।
कैसे तय होता है प्रीमियम
स्वाभाविक तौर वाहन बीमा के प्रीमियम की गणना वाहन का प्रकार और वाहन कितना पुराना है यह देखकर की जाती है। प्रीमियम तय करते वक्त यह भी देखा जा सकता है वाहन घरेलू इस्तेमाल के लिए है या व्यवसायिक इस्तेमाल के लिए हैं। ये सभी कारक वाहन बीमा के प्रीमियम की गणना को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा प्रीमियम की गणना में इंजन की क्षमता व किस इधन से वाहन चलता है इसे भी शामिल किया जा सकता है।
पुराने वाहनों की लिए थर्ड़ पार्टी सही
वाहन उद्योग में थर्ड पार्टी बीमा सबसे सस्ता और वैधानिक मान्यता प्राप्त बीमा माना जाता था लेकिन हर बीमा कंपनी ने प्रीमियम तय करने के मानक अलग–अलग तय कर रखे थे जिससे बीमा प्रीमियम में काफी अंतर होता था। इसे देखते हुए बीमा नियामक इरड़ा ने प्रीमियम की एक निश्चित राशि तय कर दी है इसलिए अब प्रीमियम की रकम में एकरूपता आ गई है। अब भी थर्ड़ पार्टी बीमा अन्य प्रकार के बीमा के मुकाबले काफी सस्ता पड़़ता है।
जितना इस्तेमाल उतना प्रीमियम
वाहन बीमा के तहत चौपहिया वाहन के लिए ‘जितना इस्तेमाल करें उतना प्रीमियम भरें’ योजना भी लागू की गई है। इस योजना के तहत वाहन का प्रीमियम इस आधार पर तय किया जाएगा कि गाड़़ी कितने किलोमीटर चली है। पे एज यू ड्राइव के नाम से पेश इस योजना के तहत वाहन मालिके के लिए प्रीमियम की गणना के नए मानक पेश किए गए हैं। इस योजना में बीमा लेने वाले वाहन स्वामी के लिए एक माइलेज लिमिट तय कर दी जाती है। इस माइलेज लिमिटे के तहत तीन स्लैब २५००‚ ५००० और ७५०० रुपए तय कर दी गई है। माइलेज लिमिट से ज्यादा वाहन चलाए जाने पर अतिरिक्त प्रीमियम का भुगतान करना होगा। हालांकि इसके बावजूद वाहन बीमा की प्रीमियम दर अब भी काफी कम है।
वाहन चलाने वाले पर नजर
इस योजना के तहत एक विशेष प्रकार के यंत्र के जरिए वाहन चलाने वाले व्यक्ति पर पूरी नरज रखी जाएगी। अगर वाहन स्वामी या चालक वाहन को बहुत अच्छे ढंग से चलाता है तो उसे प्रीमियम में कुछ छूट प्रदान की जाएगी। इसके अलावा इस यंत्र के ‘डाटा’ के आधार पर जितना कम संयमित‚ सुरक्षित और कुशल वाहन चलाया जाएगा‚ मालिक को बीमा प्रीमियम में छूट उसी के अनुपात में प्रदान की जाएगी।
अधिक प्रीमियम मांगने पर करें शिकायत
चूंकि थर्ड पार्टी वाहन बीमा के तहत प्रीमियम की दरें अब तय हो चुकी हैं इसलिए अगर कोई कंपनी इससे इतर कुछ अतिरिक्त प्रीमियम की मांग कर रही है तो इसकी शिकायत बीमा नियामक इरड़ा अथवा बीमा लोकपाल कार्यालय में की जा कती है। ध्यान रहे कि बीमा नियामक इरड़ा ग्राहकों के हितों को ध्यान में रखते हुए समय–समय पर नई योजनाओं को अमल में लाने और पुरानी योजनाओं में सुधार करने के निर्देश बीमा कंपनियों को देता रहता है। अगर इसके बाद भी आपको लगता है कि बीमा कंपनी ने आपको गलत पालिसी दे दी है या अन्य किसी भी प्रकार की शिाकयत आपको है तो आप बेधड़़क बीमा नियामक की वेबसाइट पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
एक अध्ययन के अनुसार देश में करीब ६० फीसद दुपहिया वाहन बिना बीमा के इस्तेमाल हो रहें हैं। इसके अलावा ४० फीसद चौपहिया वाहन भी बिना बीमा पालिसी के इस्तेमाल किए जा रहे हैं। लेकिन सभी वाहन स्वामियों के लिएयह जानन बेहद जरूरी है कि दुपहिया के अलावा‚ कार‚ बस‚ ट्रक और इंड़्ट्रिरयल व्हेकिल समेत सभी प्रकार के वाहनों के लिए थर्ड़ पार्टी बीमा अनिवार्य है॥






