मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों का 10 प्रतिशत आरक्षण जारी रखने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए मंगलवार को कहा कि अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए उनकी जनसंख्या के अनुसार आरक्षण की ५० प्रतिशत सीमा को बढाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि उच्चतम न्यायालय ने जो फैसला सुनाया‚ वह उचित था। हम हमेशा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए १० प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति को उनकी आबादी के अनुसार आरक्षण दिया गया है‚ लेकिन ईबीसी और ओबीसी सहित अन्य जातियों को उनकी जनसंख्या के अनुपात के अनुसार आरक्षण नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि ओबीसी और ईबीसी को उनकी आबादी के अनुसार आरक्षण की सुविधा प्रदान करने के लिए आरक्षण की ५० प्रतिशत की सीमा बढाई जाये। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए मैंने पूरे देश में जाति आधारित जनगणना कराने का सुझाव दिया‚ ताकि हर जाति को उनकी जनसंख्या अनुपात के अनुसार उचित आरक्षण देने के लिए उनकी वास्तविक ताकत और आर्थिक स्थिति का आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि मेरी सरकार बिहार में जाति आधारित जनगणना करा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में जाति आधारित जनगणना प्रत्येक जाति की समग्र स्थिति में सुधार लाने और किसी भी जाति और पंथ के गरीबों को सहायता प्रदान करने के लिए की जा रही है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर जाति आधारित जनगणना कराने का सुझाव देते हुए कहा कि आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा बढा दी जाये तो बेहतर होगा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में मंगलवार को पटना साहिब में एक कार्यक्रम में एक महिला ने चिल्लाकर कहा ‘नीतीश भैया प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार रहिए।’ कार्यक्रम का आयोजन गुरु गोबिंद सिंह के जन्मस्थान तख्त हरमंदिर पटना साहिब में किया गया था‚ जो सबसे पवित्र सिख तीर्थस्थलों में एक है। राज्य के सबसे लंबे समय से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक की जयंती से संबंधित समारोह में हिस्सा लेने आए थे। इस दौरान लगभग ५० साल की उम्र की महिला ने चिल्लाकर कहा‚ ‘नीतीश भैया‚ प्रधानमंत्री बने के लिए तैयार रहिये।’ हालांकि नीतीश (७०) ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी‚ लेकिन इससे उनके चेहरे पर मुस्कान फैल गई। बाद में हरजीत कौर नामक उस महिला ने पत्रकारों से कहा‚ ‘नीतीश को पूरे सिख समाज का समर्थन हासिल है। वह नरेंद्र मोदी से कुछ पायदान ऊपर हैं।’ इससे पहले पिछले सप्ताह जब नीतीश अपने गृह जिले नालंदा में एक और सिख धर्मस्थल गए थे‚ तब भी उनके प्रधानमंत्री बनने को लेकर नारे लगाए गए थे।







