बांकीपुर उपचुनाव 2026 के नतीजे आए दो दिन हो चुके हैं। बीजेपी अपनी ओर से आत्ममंथन में लगी है तो जन सुराज के नेता भी इस बात के मंथन में लगे हैं कि उन्हें ज्यादा वोट कैसे और कहां से मिले, ताकि आगे भी यही रणनीति रखी जा सके। लेकिन इसमें जो सबसे चौंकाने वाली बात है, वो ये है कि दिग्गज नेता अपना बूथ तक नहीं बचा पाए। उनके बूथ पर ही वोटरों ने उन्हें मुंह चिढ़ाते हुए जन सुराज के पक्ष में ज्यादा वोटिंग कर दी।
10 महीने में बहुत कुछ बदल गया
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 वोटों से शिकस्त दी। इस दौरान झटका सिर्फ बीजेपी को ही नहीं बल्कि विपक्षी राजद को भी लगा। तेजस्वी यादव की उम्मीदवार को वैश्यों ने ही ढंग से वोट नहीं किया, महागठबंधन के बाकी वोट भी तरीके से ट्रांसफर नहीं हो पाए। नतीजा ये हुआ कि सिर्फ 10 महीने में बांकीपुर के वोटरों का मिजाज ऐसा बदला कि जिस जन सुराज (उम्मीदवार वंदना कुमार) को 2025 के विधानसभा चुनाव में 8 हजार के करीब वोट मिले थे। उसने 9 गुनी रफ्तार पकड़ प्रशांत किशोर की अगुवाई में 64,151 वोट हासिल कर लिए।
अतिआत्मविश्वास ने स्टार नेताओं के बूथ पर भी हराया
बांकीपुर को लेकर एक बात शुरू से ही दिख रही थी। पहले उन्होंने अभिषेक बंटी को हटाकर नीरज सिन्हा को उम्मीदवार बना दिया। ऐसा नहीं कह सकते कि उम्मीदवार खराब था। लेकिन मीठापुर के अलावा कई जगहों पर नीरज को जानने वाले नहीं थे। इसका भी नुकसान बीजेपी को हुआ। नुकसान भी ऐसा वैसा नहीं हुआ 422 बूथों में से 400 बूथों पर बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा। स्टार नेता रविशंकर प्रसाद, रामकृपाल यादव तक के बूथ पर प्रशांत किशोर हावी हो गए। यहां तक कि नितिन नवीन का बचपन जिस पीरमुहानी में बीता, वहां भी यही हाल हुआ। स्टार नेताओं के बूथ का हश्र बहुत कुछ जाहिर करने को काफी है।
रविशंकर प्रसाद, रामकृपाल, सीपी ठाकुर समेत कई बड़े नेताओं के बूथों पर पार्टी पिछड़ गई। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का बांकीपुर विधानसभा के पीरमुहानी इलाके में बचपन बीता, वहां भी पीके ने बढ़त बनाई।
नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान बांकीपुर में 41.39% वोटिंग हुई थी। मतदाताओं की कुल संख्या 3,79,402 थी, वोट 1,56,647 लोगों ने डाले। उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान हुआ। 34.30% वोटिंग हुई। 1,30,313 लोगों ने वोट दिए। मतलब 2025 की तुलना में 26,334 वोट कम पड़े।
भाजपा के 53,472 वोट घट गए
2025 में नितिन नवीन को 98,299 वोट मिले। उन्होंने 51,936 वोटों के अंतर से चुनाव जीता। यह डाले गए कुल वोट का 33.07% था। 2026 के उपचुनाव में भाजपा के नीरज सिन्हा को 44827 वोट (34.4%) मिले। 9 महीने में भाजपा के 53,472 वोट घट गए। नितिन नवीन ने जितने वोटों की मार्जिन से चुनाव जीता, नीरज को उतने वोट भी नहीं मिले।
जन सुराज: 9 महीने में 56,434 वोट बढ़े
2025 के चुनाव में जन सुराज की प्रत्याशी वंदना कुमारी को 7717 वोट (4.96%) मिले। जमानत जब्त हो गई।2026 के उपचुनाव में जन सुराज के प्रशांत किशोर को 64,151 (49.23) वोट मिले। 56,434 वोट बढ़ गए।
राजद: रेखा गुप्ता की जमानत जब्त
2025 के विधानसभा चुनाव में राजद की प्रत्याशी रेखा गुप्ता दूसरे नंबर पर थीं। उन्हें 46,363 वोट (29.83%) मिले थे। 2026 में रेखा गुप्ता को 14,273 वोट (10.95%) मिले। उनकी जमानत जब्त हो गई। राजद के 32,090 वोट घट गए।
बीजेपी का वोट शेयर क्यों खिसका?
बांकीपुर पूरी तरह शहरी विधानसभा क्षेत्र है। यहां की आबादी में कायस्थ 15 फीसदी, भूमिहार, ब्राह्मण और राजपूत 20 से 22 फीसदी हैं। वैश्य की आबादी करीब 12 फीसदी है।
ये वर्ग पारंपरिक रूप से भाजपा के कोर वोट बैंक माने जाते हैं। बांकीपुर की कुल आबादी में इनका हिस्सा करीब 50% है। यही वजह है कि भाजपा लगातार तीन दशक तक यह सीट जीतती रही। इस बार भाजपा का कोर वोट बैंक बिखर गया। इसकी मुख्य वजह हैं।
1 उम्मीदवार बदलना: भाजपा ने पहले अभिषेक कुमार सिन्हा बंटी को टिकट दिया। परिजनों के चारा घोटाला से जुड़े होने और दूसरी वजहों के सामने आने पर अभिषेक से नाम वापस कराया और नीरज सिन्हा को टिकट दिया। इससे जनता को गलत संदेश गया।
- प्रशांत किशोर की तुलना में भाजपा के नीरज सिन्हा कमजोर प्रत्याशी थे। उनके सामने पूरे विधानसभा क्षेत्र में अपनी पहचान का संकट था। नीरज सिन्हा ना कैमरे के सामने कंफर्टेबल थे और ना मुद्दों पर उनकी कोई स्पष्ट राय थी। यही कारण है कि कई बार भाजपा के बड़े नेता उनको माइक के सामने आने से रोक रहे थे।
- बांकीपुर में मिडिल क्लास, व्यापारी और पढ़े लिखे लोगों (जैसे-सरकारी कर्मचारी, डॉक्टर, वकील, प्रोफेसर) की संख्या ज्यादा है। वे ऐसा प्रतिनिधि चाहते थे जो कम से कम अपनी बात रखने की क्षमता रखता हो।
- भाजपा पहले ही अभिषेक का नामांकन वापस कराकर बैकफुट पर आ चुकी थी। इसका फायदा प्रशांत किशोर ने बखूबी उठाया।
- वोटिंग के दिन लोगों ने भास्कर से साफ कहा कि हमें ऐसे नेता की जरूरत है जो बोले तो उसकी बातों को सरकार गंभीरता से सुने। प्रशांत किशोर अगर बोलेंगे तो विधानसभा से लेकर राज्यभर में लोग सुनेंगे। वह नेशनल फीगर हैं। नीरज सिन्हा में वह क्वालिटी नहीं है।

2 स्थानीय संगठन की नाराजगी: पॉलिटिकल सर्किल में चर्चा है कि बांकीपुर में भाजपा की हार पार्टी की दिल्ली और पटना की अंदरूनी खींचतान का नतीजा है।
सूत्रों के मुताबिक, बिहार भाजपा के नेता नितिन नवीन के एकतरफा कैंडिडेट सिलेक्शन से नाराज थे। यहां से जितने लोगों का नाम कैंडिडेट के तौर पर गया था, उसको नजरअंदाज कर प्रत्याशी दिया गया।
3 बीजेपी के वोटर्स एक्टिव नहीं दिखे: बांकीपुर में 34.30% वोटिंग हुई। बांकीपुर में संगठन मजबूत है, लेकिन उपचुनाव में पुराने कार्यकर्ताओं एक्टिव नहीं दिखे। भाजपा नेता कहते रहे कि बांकीपुर में तो जीत पक्की है। वोटर को भी यही संदेश गया कि जीत तय है। ऐसे में बहुत से लोग पोलिंग बूथ नहीं पहुंचे। वोटिंग प्रतिशत 2025 की तुलना में 7% कम रहा।
5 नितिन नवीन फैक्टर काम नहीं आया: बांकीपुर उपचुनाव में नितिन नवीन फैक्टर काम नहीं आया। वह खुद उम्मीदवार नहीं थे। इसके चलते उनका वोट बैंक पूरी ताकत से ट्रांसफर नहीं हुआ। अब सोशल मीडिया पर सवाल पूछा जा रहा है- जब राष्ट्रीय अध्यक्ष अपनी सीट नहीं जीता पाए तो वह पार्टी को 2027 में UP, पंजाब, उत्तराखंड कैसे जीता पाएंगे।
| क्षेत्र | भाजपा | जन सुराज |
| बोरिंग-कैनाल रोड | 2634 | 3795 |
| एएन कॉलेज, किदवईपुरी, पी&Tडी कॉलोनी | 1254 | 1237 |
| चकरम, बुद्धा कॉलोनी, दुजरा | 1528 | 2702 |
| फ्रेजर रोड, लालजी टोला, जमाल रोड | 1588 | 1815 |
| कदमकुआं, बलदेव सहाय रोड, कारीनाथ लेन | 1884 | 2357 |
| कदमकुआं, लोहतानीपुर, परसुरानी, करबिगहिया | 1426 | 2088 |
| करबिगहिया, कुहार टोली, चांदमारी रोड | 1130 | 1551 |
| चांदमारी, तिरेयाटांड | 1226 | 1990 |
| चांदमारी रोड, बिघापुर | 1181 | 1796 |
| सिपारा, हरिश्चंद्र नगर | 1320 | 2175 |
| सिपारा मलहान, मीठापुर | 1635 | 2488 |
| मीठापुर, यारपुर | 1636 | 1968 |
| यारपुर, गर्दनीबाग, जक्कनपुर, पुरंदरपुर | 1728 | 2000 |
| पुरंदरपुर, मीठापुर, जक्कनपुर, यारपुर | 1440 | 2356 |
| यारपुर, जक्कनपुर, मीठापुर, पुरंदरपुर | 1392 | 1852 |
| पुरंदरपुर, यारपुर, चांदीपुर बेला | 1458 | 2057 |
| चांदीपुर बेला, जयप्रकाश नगर, दशरथा | 1457 | 2542 |
जेन-Z: लाठीचार्ज का बदला ‘स्कूल का बस्ता’ पर बटन दबाकर लिया
3.79 लाख वोटरों वाली बांकीपुर विधानसभा में 53,419 यानी 14% वोटर 29 साल से कम उम्र वाले हैं। मतलब जेन-Z वोटर हैं। भाजपा की हार में जेन-Z प्रोटेस्ट का बड़ा हाथ माना जा रहा है।
- 20 जुलाई के बाद बांकीपुर एरिया में जेन-Z वोटरों के बीच दिल्ली, पटना सहित बिहार भर में स्टूडेंट्स पर हुए लाठीचार्ज और गोली चलाने की घटना का वीडियो खूब सर्कुलेट किया गया।
- चूंकि पटना में जहां स्टूडेंट्स का प्रदर्शन हुआ, वह इलाका बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में ही पड़ता है। इसलिए इसका असर यहां के लोगों पर ज्यादा पड़ा।
- वोटिंग के दिन भास्कर के अलग-अलग रिपोर्टर से उन्होंने साफ-साफ कहा कि सरकार ने पटना और दिल्ली में स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज कर बहुत गलत किया। सरकार निरंकुश हो गई है। पेपर लीक हो रहे हैं, लेकिन जवाबदेही तय नहीं कर रही है।
- उनका कहना था कि हम अपनी समस्या का समाधान मांग रहे हैं तो भाजपा नेता देश तोड़ने वाला एंटी सोशल एलिमेंट कह रहे हैं। यह ठीक नहीं है।
- जेन-Z के अंदर की यह नाराजगी जनरल कास्ट, पिछड़ा, EBC हो और दलित, सभी में दिखी। इसका जन सुराज ने खूब फायदा उठाया।
UGC के नए नियम, भरत तिवारी एनकाउंटर, नाराज सवर्णों ने भाजपा से बनाई दूरी
जनवरी में आए UGC इक्विटी रेगुलेशंस से सवर्ण समाज नाराज था। जहानाबाद NEET स्टूडेंट रेप-मर्डर केस और भरत तिवारी एनकाउंटर ने इस नाराजगी को और बढ़ा दिया।
- गैर कायस्थ सवर्णों (भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत) में नाराजगी वोटिंग के पहले और वोटिंग के दिन जमीन पर साफ दिख रही थी। इसकी भनक BJP को पहले से थी। यही कारण है कि भाजपा ने मैन टू मैन मार्किंग की।
- अपने सवर्ण नेताओं को गली-गली, सोसाइटी-सोसाइटी घुमाया। 40 स्टार प्रचारकों में से 15 सवर्ण रखे। अलग-अलग बैठकें की।






