वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी ने विधान सभा चुनाव 2020 में लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी यादव पर पीठ में खंजर भोंकने का आरोप लगाया था, लेकिन अब उन्होंने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से एम्स में जाकर मुलाकात की है। उन्होंने बोचहां उपचुनाव में रमई राम की बेटी को वीआईपी का टिकट देकर राजद को भी मुश्किल में डाला था।
दिल्ली एम्स में मुकेश सहनी ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के साथ मुस्कुराते हुए फोटो भी खिंचवाई। फोटो में लालू प्रसाद कंधे और हाथ में बेल्ट बांधे हुए दिख रहे हैं। लालू प्रसाद के चेहरे पर भी मुस्कान है। मुकेश सहनी ने लालू प्रसाद से आधे घंटे तक मुलाकात की। जाहिर तौर पर जब कोई नेता लालू प्रसाद से मिलेगा तो राजनीतिक बातें भी होंगी।
उस पर भी वह नेता जो भाजपा विरोधी हो और राजद विरोधी भी, तो बात और भी जमी होगी। हालांकि पॉलिटिकल बातचीत के बारे में मुकेश सहनी की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है। सहनी ने मुलाकात के बाद कहा कि बिहार के लाखों लोगों के दिल में बसने वाले लालू प्रसाद के जल्द स्वस्थ होने के लिए करोड़ों लोग आज दुआ कर रहे हैं। उन्हीं लोगों की दुआओं का असर है कि उनके स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है।
तब पीठ में खंजर भोंका था तेजस्वी यादव ने
मुकेश सहनी की पार्टी चुनाव से पहले महागठबंधन के साथ ही थी लेकिन जब महागठबंधन की पार्टियों के बीच सीटों की घोषणा के लिए प्रेस कांफ्रेस हुआ तो तेजस्वी यादव ने वीआईपी के लिए एक भी सीट की घोषणा नहीं की। इसे आगे के लिए टाल दिया। इसी पर प्रेस कांफ्रेस में ही मुकेश सहनी भड़क गए थे। उन्होंने तब आरोप लगाया था कि उनके साथ छल किया गया, एक अतिपिछड़ा के पीठ में खंजर भोंका गया। इसके बाद वे एनडीए के साथ हो गए और एनडीए ने विधान सभा चुनाव 2020 में मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी को 11 सीटें दीं।
वीआईपी ने इसमें से चार सीटों पर जीत हासिल की। मुकेश सहनी हालांकि चुनाव हार गए लेकिन एमएलसी बनाकर उन्हें बिहार सरकार में मत्स्य और पशुपालन मंत्री बनाया गया। मुकेश सहनी अपनी पार्टी का विस्तार चाहते थे। इसी क्रम में यूपी विधान सभा चुनाव के समय वीआईपी ने 53 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए। सहनी ने भाजपा के दो सिटिंग विधायकों को भी टिकट देकर चुनाव लड़ाया। लेकिन उनकी पार्टी यूपी में एक सीट पर भी वहां नहीं जीत पाई।
सहनी ने खूब राजनीतिक चालें चलीं
सहनी ने यूपी विधान सभा चुनाव के समय भाजपा के बड़े नेताओं के खिलाफ खूब बयानबाजी भी की थी। यही नहीं बोचहां उपचुनाव के समय भाजपा और वीआईपी दोनों ने अपने-्अपने उम्मीदवार उतार दिए। सहनी ने रमई राम की बेटी गीता कुमारी को टिकट दे दिया। जब राजद ने रमई राम की नहीं सुनी तब रमई राम ने विद्रोह स्वरूप अपनी बेटी को सहनी की पार्टी वीआईपी से उतार दिया था। बता दें कि जिस मुसाफिर पासवान के निधन से यह सीट खाली हुई थी वे वीआईपी के ही विधायक थे।
लेकिन इस सीट पर उपचुनाव होने पर मुसाफिर पासवान के बेटे अमर पासवान को राजद ने मैदान में उतार दिया था। इसी बदले में मुकेश सहनी ने राजद के वरिष्ठ नेता रमई राम की बेटी को वीआईपी से उतारा था। यहां से राजद के अमर पासवान की जीत हुई थी। लेकिन भाजपा की बेबी कुमारी की हार की वजह से मुकेश सहनी ने मिठाईयां बांटी थीं। 14 जुलाई को रमई राम का निधन हो गया। रमई राम के निधन के बाद 16 जुलाई को लालू प्रसाद से मुकेश सहनी ने दिल्ली एम्स में मुलाकात की है। मुस्कुराते हुए फोटो खिंचवाई है।
सहनी की महत्वाकांक्षा बड़ी, तेजस्वी स्वीकार करेंगे ?
भाजपा मुकेश सहनी की पार्टी के बचे हुए तीन विधायकों को अपने में मिला चुकी है। सहनी को फिर से एमएलसी नहीं बनाया गया। उन्हें मंत्रिमंडल से भी नीतीश कुमार बर्खास्त कर चुके हैं। उनकी पार्टी अब अपने विस्तार में लगी है। सहनी की नजर आने वाले लोकसभा और विधान सभा चुनाव पर टिकी है। लालू प्रसाद से मुलाकात के बाद इसकी चर्चा तेज हो गई है कि क्या सहनी, लालू प्रसाद की पार्टी वाले महागठबंधन का हिस्सा बनेंगे? मुकेश सहनी की महत्वाकांक्षा बड़ी है। सवाल है कि तेजस्वी यादव उन्हें उनकी महत्वाकांक्षा के साथ स्वीकार करेंगे? सहनी ने राजनीति में कई रास्ते बंद कर लिए हैं और अब वे रास्ता तलाश रहे हैं। लालू प्रसाद से उनकी मुलाकात को उसी नजरिए से देखा जा रहा है।







