योजना एवं विकास मंत्री सह राज्य योजना पर्षद के उपाध्यक्ष बिजेंद्र प्रसाद यादव ने शुक्रवार को लघु जल संसाधन विभाग द्वारा क्रियान्वित कराये जा रहे योजनाओं की समीक्षा की। योजना पर्षद के उपाध्यक्ष के स्वीकार किया कि राज्य में आहर पईन को लोगों ने अतिक्रमण कर खेत में मिला रहा है। ॥ उन्होंने सभी आहर पईन को अतिक्रमण के मुक्त कराने व आहर–पईन की उड़़ाही कराने की हिदायत विभाग के पदाधिकारियों को दी है। समीक्षा के बाद मंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लघु जल संसाधन विभाग को आ रही राशि खर्च करने में कठिनाई को दूर की जायेगी। प्रत्येक सप्ताह शुक्रवार को एक विभाग के योजनाओं की समीक्षा की जायेगी और योजना पर्षद द्वारा कठिनाई दूर की जायेगी। मंत्री ने कहा कि जल जीवन हरियाली अभियान के अंतर्गत वित्तीय वर्ष २०१९–२० से राज्य के ३८ जिलों में १७९१ सहती सिंचाई/जल संचयन योजनाओं का क्रियान्वयन शुरू किया गया था। जिसमें १४६९ योजनाएं पूर्ण हो गयी है। इन योजनाओं से भूगर्भ जल पुनर्भण का कार्य भी स्वतः होते रहता है। पूर्ण किये गये योजनाओं से अबतक १.३८ लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का पुर्नस्थापन एवं ७५८.४७ लाख घन मीटर जल संचयन क्षमता का सृजन हुआ है। अबतक ७८४.५८ करोड़़ रुपये का व्यय हुआ है। श्री यादव ने कहा कि आत्म निर्भर बिहार का सात निश्चय दो के अंतर्गत हर खेत तक सिंचाई का पानी कार्यक्रम तहत असंचित क्षेत्र में सिंचाई सुविधाकराने हेतु वर्ष २०२१ में एक नई योजना की शुरूआत की गई। असिंचित क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्ेश्य से जल संसाधन विभाग‚ पंचायती राज विभाग‚ एवं ऊर्जा विभाग द्वारा संयुक्त रूप सेमी स्तर पर तकनीकी सर्वेक्षण किया गया। संयुक्त सर्वेक्षण द्वारा लघु संसाधन विभाग से संबंधित २६६५२ योजनां चिह्नित किया गया। लघु जल संसाधन विभाग की आहर–पईन‚ चेक डैम/वीयर‚ उद्ववह सिंचाई तथा नलकूप से सम्बन्धित योजनाओं को क्रियान्वयन का दायित्व है। चिह्नित २६६५२ योजनाओं को आगामी पांच वर्ष में चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाना है। वित्तीय वर्ष २०२१–२२ में २१७ योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गयी है जिसकी प्राक्कलित राशि २५२.८९२ करोड़़ हैं। ११२ योजनाओं पर कार्य प्रारम्भ है। श्री यादव ने कहा कि राज्य के पठारी क्षेत्रों में पहाडों की तलहटी में (वन भूमि छोडकर) चारों तरफ गारलैंड़ ट्रेंच का निमार्ण करने का कार्य किया जा रहा है‚ जिससे जल संचयन किया जा सकेगा। इसके निर्माण हेतु वन एवं पर्यावरण विभाग एवं लघु जल संसाधन विभाग के द्वारा संयुक्त रूप से सर्वेक्षण कार्य किया गया।
जिससे गैर वन भूमि क्षेत्र में ४० योजनाओं को चिन्हित किया गया। ३९ योजनाओं का विस्तृत योजना प्रतिवेदन तैयार करा लिया गया है। १६ योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है जिसकी प्राक्कलित राशि ३२५३.६० लाख है। चार योजनाओं का कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष २०२१–२२ में बन्द पडे ५५७ नलकूपों को कार्यरत करने हेतु प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है‚ जिसकी प्राक्कलित राशि १८.५७ करोड है। उन्होंने कहा कि बंद पड़े़ सभी नलकूपों को चालू करने का कार्य किया जा रहा है। नल कूपों के देख रेख की जिम्मा ग्राम पंचायत को दी गयी है। संवाददाता सम्मेलन में योजना एवं विकास विभाग के सचिव विनय कुमार‚ लघु जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव रवि मनू भाई परमार आदि मौजूद थे।






