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कोरोना विषाणु के नये स्वरूप ‘ओमीक्रॉन’ की दहशत

UB India News by UB India News
November 30, 2021
in अन्तर्राष्ट्रीय, खास खबर
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ओमिक्रॉन से नई लहर का खतरा , यह डेल्टा से 7 गुना तेजी से फैल रहा
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कोरोना विषाणु के नये स्वरूप ‘ओमीक्रॉन’ का पता चलने से तमाम देशों में ड़र और आशंका का माहौल बन गया है। दक्षिण अफ्रीका में इस नये वेरिएंट के अनेक मामले सामने आने के बाद विश्व के अनेक देशों ने दक्षिण अफ्रीका को अपनी उड़़ानें रद्द कर दी हैं। इस बीच‚ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ओमीक्रॉन को डे़ल्टा वेरिएंट की भांति ही अत्यंत सक्रामक बता कर विश्व के तमाम देशों की धड़़कनें बढ़ा दी हैं। मात्र दो हफ्ते में ही दक्षिण अफ्रीका में नये संक्रमण के मामले चार गुना बढ़ गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस स्वरूप को चिंताजनक स्वरूप (वेरिएंट ऑफ कंसर्न) करार दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को शीर्ष अधिकाारियों के साथ अहम बैठक की। बैठक में पीएम मोदी ने ‘प्रोएक्टिव’ रहने की जरूरत बताई। लोगों से अपील की कि सतर्क रहें और मास्क पहनने‚ उचित दूरी रखने के साथ ही कोरोना संक्रमण से बचाव के तमाम उपायों का पालन करें। देश में कोविड़–१९ की मौजूदा स्थिति और जारी टीकाकरण अभियान की भी इस बैठक में समीक्षा की गई। पंद्रह दिसम्बर से विदेशी उड़़ानों में छूट देने के फैसले की ताजा स्थिति के मद्देनजर समीक्षा करने का निर्देश भी पीएम मोदी ने अधिकारियों को दिया। साथ ही‚ जोखिम वाले देशों से आने वाले यात्रियों पर विशेष ध्यान देने को भी कहा। इस बीच‚ गुजरात और कर्नाटक ने जोखिम वाले देशों से आने वाले यात्रियों के लिए आरटी–पीसीआर जांच जरूरी कर दी है। अन्य राज्य भी जल्द ही ऐसा फैसला कर सकते हैं। कोरोना के इस चिंताजनक स्वरूप‚ जिसे बी.१.१.५२९ कहा जा रहा है‚ का सबसे पहले प्रसार दक्षिण अफ्रीका में देखने को मिला। चूंकि यह नया स्वरूप है‚ इसलिए कहा नहीं जा सकता कि टीका लगा चुके लोगों के प्रति इसका व्यवहार कैसा रहेगा। वैसे इस प्रकार के अध्ययन पेचीदा होते हैं‚ और किसी निष्कर्ष पर पहंुचने में ही महीनों लग जाते हैं। चिंता इसलिए भी है कि कुछ वैज्ञानिकों ने ओमीक्रॉन को प्रतिरक्षा को पूरी तरह से खत्म करने की ताकत रखने वाला बताया है। एकाएक मामले बढ़ने से कह सकते हैं कि यह बेहद संक्रामक स्वरूप है। दक्षिण अफ्रीका में टीका लगा चुके लोग भी इसकी चपेट में आए हैं‚ इसलिए तमाम देशों को बेहद सतर्क रहना होगा। भारत में टीकाकरण की स्थिति संतोषजनक होने के बावजूद जरूरी है कि कोरोना अनुकूल व्यवहार करते रहा जाए। लापरवाही भारी पड़़ सकती है।

खतरा अभी टला नहीं , अब सावधानी बरतना और भगवत कृपा के आसरे ही जीना होगा

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युरोप में कोरोना फिर कहर ढाह रहा है। जैसे–जैसे कोरोना के संक्रमण के दोबारा फैलने की खबरें आ रही हैं वैसे–वैसे ही आम जनता में इसके प्रति चिंता बढती जा रही है। यह बात सही है कि भारत में कोरोना महामारी की स्थिति पहले से बेहतर तो हुई है। लेकिन जब तक यह बीमारी पूरी तरह से समाप्त नहीं हो जाती तब तक हम सबको सावधानी ही बरतनी पडेगी। हमें इस बीमारी के साथ अभी और रहने की आदत डाल लेनी चाहिए।

कोरोना का वायरस एक ड्रिप इंफेक्शन है‚ जो केवल निकटता और संपर्क में आने से ही फैलता है हवा में नहीं। लगातार हाथ धोने और उचित दूरी बनाए रखने से ही इससे बचा जा सकता है। कोरोना का वायरस किसी भी धर्म‚ जाति‚ लिंग या स्टेटस में भेद नहीं करता। यह किसी को भी हो सकता है। यदि आप बाहर से आते हैं तो घर के बाहर जूतों को उतारना अच्छी आदत है। इसलिए घर में घुसते ही तुरंत कपडे बदलना और स्नान करना अनिवार्य नहीं है। लेकिन शुद्धि करना अच्छी आदत होती है‚ जो हमारे देश में सदियों से चली आ रही है। कोरोना के चलते दुनिया भर में हुए लॉकडाउन ने हमें एक बार फिर अपनी जीवन पद्धति को समझने‚ सोचने और सुधारने पर मजबूर किया है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से जिस तरह से लोग बेपरवाह होकर खुलेआम घूम रहे हैं और सामाजिक दूरी भी नहीं बना रहे हैं‚ उससे संक्रमण के फिर से फैलने की खबरें आने लग गई हैं। विशेषज्ञों की मानें तो संक्रमण के मामलों में गिरावट का श्रेय टीकाकरण अभियान को जाता है। साथ ही‚ इस साल आई कोरोना की दूसरी लहर के दौरान वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों में पनपी हाइब्रिड इम्युनिटी को भी श्रेय दिया जा सकता है परंतु जिन्होंने इस बीमारी की भयावहता को भोगा है‚ वो हर एक को पूरी सावधानी बरतने की हिदायत देते हैं।

जो लोग मामूली बुखार‚ खांसी झेलकर या बिना लक्षणों के ही कोविड पॉजिटिव से कोविड नेगेटिव हो गए‚ वो यह कहते नहीं थकते कि कोरोना आम फ्लू की तरह मौसमी बीमारी है‚ और इससे डरने की कोई जरूरत नहीं। लेकिन ऐसा सही नहीं है। पिछले हफ्ते दक्षिण भारत के एक अंग्रेजी अखबार में एक लेख छपा था‚ जिसके अनुसार यूरोप के अनुभव को देखते हुए ऐसा लगता है कि केवल वैक्सीन से ही कोरोना संक्रमण की श्रृंखला को नहीं तोडा जा सकता और न ही इस महामारी का अंत किया जा सकता है। यूरोप में पिछले वर्ष मार्च के पश्चात् से दूसरी बार कोरोना संक्रमण के नये मामलों और मौतों में तेज गति से वृद्धि हो रही है। आज यूरोप पुनः कोरोना महामारी का मुख्य केंद्र बन गया है। इस वर्ष अक्टूबर के प्रारंभ से ही संक्रमण के मामलों में रोजाना वृद्धि होनी शुरू हुई थी। यह वृद्धि प्रारंभ में तीन देशों तक ही सीमित थी किन्तु बाद में यूरोप के सभी देशों में फैल गई जिसकी मुख्य वजह डेल्टा वेरिएंट है।

पिछले सप्ताह यूरोप में २० लाख नये मामले सामने आए जो महामारी की शुरुआत होने के बाद से सर्वाधिक है। कोरोना से पूरे विश्व में जितनी मौतें हुई हैं‚ उनमें से आधे से ज्यादा इस महीने यूरोप में हुई हैं। ऑ्ट्रिरया‚ नीदरलैंड़‚ जर्मनी‚ डेनमार्क तथा नोव में प्रति दिन संक्रमण के सर्वाधिक मामले प्रकाश में आ रहे हैं। रोमानिया तथा यूक्रेन में भी कुछ दिनों पहले सर्वाधिक मामले आए। पूरे यूरोप में हॉस्पिटल बेड्स तेज गति से भर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि वर्तमान से लगाकर अगले वर्ष मार्च तक यूरोप के अनेक देशों में हॉस्पिटल‚ हॉस्पिटल बेड्स और आईसीयू पर भारी दबाव बना रहेगा। इसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया भर के देशों को कोविड के खतरे के खिलाफ अलर्ट रहने को कहा और जल्द से जल्द जरूरी कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं। पश्चिमी यूरोप के अधिकांश देशों में टीकाकरण की दर बहुत उची है। आयरलैंड़ में ९० प्रतिशत से अधिक लोगों को इस वर्ष सितम्बर तक दोनों टीके लग चुके हैं। फ्रांस में बिना टीका लगे लोगों की उन्मुक्त आवाजाही तथा कार्यालय जाने को मुश्किल बना दिया गया है। अगले वर्ष फरवरी से ऑ्ट्रिरया में टीकाकरण अनिवार्य कर दिया जाएगा। ऑ्ट्रिरया में इस वर्ष २२ नवम्बर से ३ सप्ताह का राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन भी लगाया गया है। इस देश में ६५ प्रतिशत लोगों को दोनों टीके लगे हुए हैं। फिर भी संक्रमण तेज गति से फैल रहा है।

गौरतलब है कि यूरोप में संक्रमण के अधिकांश नये मामले उन लोगों के हैं‚ जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है‚ जिन्हें ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन हैं तथा दोनों टीके लगे हुए लोग भी भारी संख्या में अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं। इस सबको देखते हुए भारत जैसे देश में भी कुछ कठोर कदम उठाने की जरूरत है वरना कोरोना की तीसरी ही नहीं चौथी–पांचवी लहर भी आ सकती है। सरकार को कुछ ऐसे कदम उठाने की जरूरत है जिससे कि जनता खुद से ही आगे आकर टीका लगवाए। इससे कोरोना महामारी से कुछ तो राहत मिलेगी। साथ ही‚ हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि हम जितनी सावधानी बरतेंगे उतना ही इस बीमारी से बचे रहेंगे और जल्द ही इससे छुटकारा भी पा सकेंगे।

दुनिया भर के कई ऐसे देश हैं जहां लोगों को टीके की दोनों डोज लगने के बाद भी कोरोना हुआ है। इसका सीधा सा मतलब है कि यह बीमारी हमारा पीछा इतनी आसानी से नहीं छोडने वाली। किसी ने शायद ठीक ही कहा है कि ‘सावधानी हटी–दुर्घटना घटी’। इसलिए जितना हो सके अपने आप को इस बीमारी से बचाने की जरूरत है। हाल ही में मशहूर फिल्म अभिनेता कमल हसन को भी कोविड संक्रमित पाया गया। उधर‚ जिस तरह चीन में कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को यह दोबारा हो रहा है‚ इस सबसे कोरोना के खतरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता। जहां तक संभव हो घर से बाहर न निकलें। किसी को भी स्पर्श करने से बचें। साबुन से हाथ लगातार धोते रहें। घर के बाहर नाक और मुंह को ढककर रखें तो काफी हद तक अपनी तथा औरों की सुरक्षा की जा सकती है। जब तक कोरोना का कोई माकूल इलाज सामने नहीं आता तब तक तो सावधानी बरतना और भगवत कृपा के आसरे ही जीना होगा।

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