बिहार में जदयू और चिराग के बीच की राजनीतिक दुश्मनी रामविलास पासवान की पहली बरसी पर भी दिखी। फिलहाल नीतीश कुमार और उनकी पार्टी चिराग पासवान को बख्शने के मूड़ में नहीं दिख रही। रविवार को लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक और दलित़ों के बड़़े नेता रामविलास पासवान की पहली बरसी थी। पटना के एसकेपुरी स्थित चिराग के आवास पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। लगभग सभी दलों के नुमाइंदे दलीय भावना से ऊपर उठकर इसमें शामिल हुए लेकिन नीतीश कुमार और उनकी पार्टी ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाये रखी। सीएम ने केवल एक लाइन में रामविलास पासवान को श्रद्धांजलि अर्पित कर चिराग को यह जता दिया कि वे उन्हें माफ करने वाले नहीं हैं।
जदयू और चिराग के बीच इस सियासी दुश्मनी के पीछे २०२० का बिहार विधानसभा चुनाव है। जदयू का मानना है कि बिहार में पार्टी की राजनीतिक हैसियत घटाने में चिराग की रणनीति और राजनीति जिम्मेदार है। बात भी सौ फीसदी सही है। विधानसभा चुनाव में लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने जदयू को अपने निशाने पर ले रखा था। अपने चुनावी दौरे के दौरान नीतीश सरकार पर जमकर हमला बोलते रहे। सरकार के कार्यों की बखिया उधेड़़ते रहे। नतीजा यह हुआ कि चिराग की खुद की पार्टी के उम्मीदवार तो चुनाव नहीं ही जीत पाये‚ जदयू उम्मीदवार को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। चिराग ने अपने बंगला को (लोजपा का चुनाव चिह्न) को आग लगाकर उसमें नीतीश के तीर (जदयू का चुनाव चिह्न)को जला दिया। नतीजा जदयू केवल ४३ सीट पर ही सिमट गया। यही वजह है कि बिहार में बड़़ा भाई होने का तगमा भी जदयू से छिन गया। चुनाव परिणाम के बाद चिराग ने सार्वजनिक रूप से कहा भी था कि जदयू को हराने के लिए ही उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव लड़़ी थी। उसी समय से नीतीश कुमार ने चिराग पासवान को अपने निशाने पर ले लिया था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार कभी अपने विरोधियों से पूरी सिद्त से हिसाब चुकता करते हैं। इसी का नतीजा हुआ की लोजपा में टूट हो गई और चिराग अलग –थलग पड़़ गए। पार्टी पर चाचा पशुपति पारस का कब्जा हो गया। जदयू और नीतीश कुमार पर ही लोजपा से चिराग को बेदखल करने का आरोप है। बंगला पर अधिकार को लेकर चाचा पशुृपति कुमार पारस और भतीजा चिराग के बीच तलवारें खींच गई हैं। जिसमें जदयू पारस के साथ बैटिंग करते नजर आती है। वैसे पारस भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि जदयू के एक नेता की मदद से उन्हें पार्टी पर कब्जा करने में सफलता मिली। आगे देखना और दिलचस्प होगा कि नीतीश कुमार विधानसभा चुनाव में चिराग के विरोध की कितनी कीमत वसूल करते हैं।
बांकीपुर उपचुनाव के लिए मतदान जारी , 11 बजे तक सिर्फ 11.50% मतदान………
बिहार के बांकीपुर में हो रहे उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को सुबह 7 बजे से वोट डाले जा रहे...






