आज आज 29 जुलाई 2026 को मातृ उद्बोधन आश्रम, शिवाजी पथ, यारपुर, पटना के प्रांगण में आषाढ़ मास की पावन गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित भव्य “गुरु पूर्णिमा महोत्सव” अत्यंत श्रद्धा, भक्तिभाव, हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में विधिवत सम्पन्न हुआ।
सचिव सतेन्द्र सिंह उर्फ़ टालू भईया जी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में महोत्सव को ससमय, अनुशासित एवं सफलता पूर्वक सम्पन्न कराने में परम पूज्य श्री गुरुदेव बलराम जी महाराज के सुपुत्र एवं आश्रम के सचिव सतेन्द्र सिंह जी का कुशल नेतृत्व, सफल संचालन तथा मार्गदर्शन सराहनीय रहा। उनके कुशल प्रबंधन के कारण प्रातःकाल के हवन-पूजन से लेकर देर रात्रि तक के सभी कार्यक्रम अत्यंत सुचारू रूप से संचालित हुए।
भक्तों की उमड़ी अपार भीड़ एवं कतारबद्ध दर्शन-
प्रातः 7:00 बजे सामूहिक पूजन, हवन एवं प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात पूज्य गुरुदेव जी महाराज की चरण पादुका के दर्शन एवं पूजन हेतु प्रातःकाल से ही हजारों-हजार की संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। भक्तों ने अनुशासित रहकर कतारबद्ध होकर गुरु चरणों का दर्शन किया, पुष्पांजलि अर्पित की तथा गुरु कृपा व महाप्रसाद ग्रहण किया।

बिहार के कई मंत्रियों व गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति-
संध्या कालीन समारोह में बिहार सरकार के कई माननीय मंत्रियों, वरिष्ठ जन-प्रतिनिधियों एवं विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति देखने को मिली। सभी आगंतुक अतिथियों ने आश्रम पहुँचकर परम पूज्य गुरुदेव जी के चरणों का दर्शन किया, माथा टेका तथा आशीर्वाद प्राप्त कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं गुरु वंदना-
शाम 8:00 बजे मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ हुआ। बाहर से पधारे सुप्रसिद्ध कलाकारों द्वारा मधुर गुरु वंदना के साथ एक से बढ़कर एक भक्तिमय एवं सांस्कृतिक भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गई। इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उपस्थित रही, जिन्होंने अत्यधिक शांतिप्रिय, अनुशासित एवं भक्तिमय माहौल में देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लुफ्त उठाया।
आश्रम के अध्यक्ष समशेर सिंह एवं संपूर्ण प्रबंध समिति ने गुरु पूर्णिमा महोत्सव को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए सभी श्रद्धालुओं, आगंतुक अतिथियों, कलाकारों, पुलिस-प्रशासन एवं मीडिया बंधुओं का हृदय से आभार प्रकट किया।







