भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council- DAC) ने अपनी बैठक में 114 Rafale लड़ाकू विमानों और 6 P‑8I Poseidon समुद्री निगरानी विमान की खरीद को मंजूरी दे दी है. यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा खरीद योजनाओं में से एक मानी जा रही है.
114 Rafale क्यों जरूरी?
चीन और पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य चुनौतियों को देखते हुए भारतीय वायुसेना को आधुनिक, भरोसेमंद और तेज प्रतिक्रिया देने वाले लड़ाकू विमानों की जरूरत है. राफेल, 4.5‑जनरेशन का अत्याधुनिक लड़ाकू विमान माना जाता है.
पी-8आई पॉसिडॉन एयरक्राफ्ट
फ्रांस से गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट डील है, इसलिए पारदर्शिता ज्यादा है. पहले 36 राफेल की डील में भी ऐसा ही हुआ था, जो 2016 में साइन हुई. अब 114 की डील से IAF की स्क्वाड्रन संख्या बढ़कर 35-36 के करीब पहुंच जाएगी.
- इस डील के अनुसार, भारत फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 18 राफेल विमान सीधे खरीदेगा. बाकी 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे. इनमें से कुछ विमान दो सीट वाले होंगे, जिनका उपयोग पायलटों को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाएगा. इस डील में आधुनिक तकनीक भारत को देने और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने की बात भी शामिल है.
- भारतीय वायुसेना के के बेड़े में पहले से ही दो स्क्वाड्रनों में 36 राफेल विमान शामिल हैं, जिनमें से ‘सी’ वेरिएंट की अंतिम डिलीवरी दिसंबर 2024 में हुई थी.
- राफेल विमानों का इस्तेमाल भारत ने पिछले साल मई में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में किया था, जिसमें पाकिस्तान के ठिकानों पर सटीक हमले किए गए थे.
- राफेल विमानों का इस्तेमाल स्कैल्प (एससीएएलपी) मिसाइल को लॉन्च करने के लिए किया गया था, जो 250 किलोमीटर से ज्यादा दूर तक बहुत सटीक हमला कर सकती है. इसके अलावा यह मेटियोर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, हैमर हथियार, स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और आधुनिक रडार से भी लैस है.
- पिछले साल जून में भारत और फ्रांस ने डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के बीच चार बड़े समझौतों की घोषणा की थी, जिससे भारत को राफेल विमानों की डिलीवरी तेजी से मिलने में मदद मिलेगी.
क्या हैं खूबियां?
- मॉडर्न AESA रडार सिस्टम
- लॉन्ग-रेंज Meteor मिसाइल
- SCALP स्टील्थ क्रूज़ मिसाइल
- उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट
इन तकनीकों के कारण राफेल हवा से हवा और हवा से जमीन- दोनों तरह के मिशन बेहद प्रभावी तरीके से अंजाम दे सकता है. ऑपरेशन सिंदूर में भी राफेल के जरिए ही भारत ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था. जिससे यह विमान वायुसेना के लिए पहले से ट्रायल‑एंड‑टेस्टेड साबित हो चुका है. इसी वजह से वायुसेना राफेल को प्राथमिकता पर खरीदना चाहती है.
भारत को 42 स्क्वाड्रन की जरूरत
DAC की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास अंतिम स्वीकृति के लिए जाएगा. 114 राफेल से भारतीय वायुसेना को 6-7 नए स्क्वाड्रन मिलेंगे. वायुसेना के पास वर्तमान में लगभग 30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है.







