सिवान विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र बिहार के 243 विधानसभा सीटों में से एक है। यह विधानसभा सीट एक सामान्य श्रेणी की विधानसभा सीट है।रघुनाथपुर विधानसभा चुनाव 2025 बिहार के सिवान जिले की महत्वपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक विधानसभा सीट है। यह सीट 1951 में स्थापित हुई थी और राजनीतिक रूप से समय-समय पर कई बदलाव देखे गए हैं। पहले यह सीट कांग्रेस का गढ़ रही है, लेकिन हाल के वर्षों में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इसे मजबूत सुरक्षात्मक आधार बना लिया है।
2020 के चुनाव में राजद के हरिशंकर यादव ने लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के मनोज कुमार सिंह को लगभग 17,965 वोटों के अंतर से हराया था। उस चुनाव में कुल 42.66% मतदान हुआ था। हरिशंकर यादव ने 2015 और 2020 दोनों चुनावों में इस सीट पर जीत हासिल की है, जिससे उनकी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। 2020 में हरिशंकर यादव को 67,757 वोट मिले जबकि मनोज कुमार सिंह को 49,792 वोट।
रघुनाथपुर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 23.2% है, जबकि यादव मतदाता लगभग 9.6% हैं, और अनुसूचित जाति भी महत्वपूर्ण हैं। यह जातीय समीकरण चुनाव के नतीजों को प्रभावित करता है। जदयू की स्थिति इस क्षेत्र में कुछ कमजोर हुई है, खासकर 2020 के बाद से, जबकि भाजपा और एलजेपी की भी स्थापित पहचान है। 2024 के लोकसभा चुनाव में जदयू का प्रदर्शन क्षेत्र में दबाव में रहा है, जिससे 2025 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की दावेदारी सवालों के घेरे में है।
2025 का चुनाव मुख्य रूप से राजद और एनडीए गठबंधन (जिसमें भाजपा, जदयू और एलजेपी शामिल हैं) के बीच कड़ा मुकाबला होगा। दल इस सीट पर मतदाताओं को लुभाने के लिए जातीय समीकरण, स्थानीय विकास, रोजगार, आधारभूत सुविधाएं, और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर जोर दे रहे हैं।
संक्षेप में, रघुनाथपुर विधानसभा चुनाव 2025 में राजद की मजबूत पकड़ और एनडीए की चुनौती बीच एक तीव्र मुकाबला देखने को मिलेगा। मतदाता दलों की रणनीति, गठबंधन समीकरण, और स्थानीय मुद्दे चुनावी नतीजों को निर्णायक रूप देंगे।
इसे रघुनाथपुर की राजनीतिक तस्वीर को समझने के लिए एक प्रतिस्पर्धात्मक और निर्णायक चुनाव माना जा रहा है।
रघुनाथपुर विधानसभा चुनाव के इतिहास में मुख्य दल निम्नलिखित रहे हैं:
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राष्ट्रीय जनता दल (राजद): राजद ने रघुनाथपुर में 2015 और 2020 में लगातार जीत दर्ज की है। हरिशंकर यादव राजद के प्रमुख विधायक रहे हैं जिन्होंने इन वर्षों में भाजपा और अन्य प्रतिद्वंद्वियों को हराया है। राजद को यहां मुस्लिम और यादव वोटबैंक से मजबूत समर्थन मिलता है।
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भाजपा (BJP): 2000 और 2010 के दशक में भाजपा की मजबूत पकड़ रही है। 2010 में विक्रम कुंवर ने इस सीट से जीत हासिल की थी। भाजपा के पास यहां राजपूत और ब्राह्मण समुदाय का मजबूत आधार है।
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जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू): जदयू ने भी रघुनाथपुर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। 2005 में जदयू की जगमातो देवी विधायक बनीं, और 2020 में भी जदयू ने प्रभावी वोट प्रतिशत हासिल किया, हालांकि सीट जीतने में सफल नहीं रही।
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लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी): एलजेपी ने भी इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है। 2020 में मनोज कुमार सिंह एलजेपी से चुनावी मुकाबले में सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी रहे।
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कांग्रेस: रघुनाथपुर विधानसभा क्षेत्र पहले कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। 1950-70 के दशक में कांग्रेस ने कई बार यहां जीत दर्ज की।
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अन्य दल व सामाजिकवादी पार्टियाँ: प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कभी-कभी चुनाव परिणामों को प्रभावित किया है।
इस प्रकार, रघुनाथपुर में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा मुख्य रूप से राजद और भाजपा के बीच रही है, जहां जदयू और एलजेपी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जातीय समीकरण में मुस्लिम, यादव, राजपूत, दलित और अन्य समुदायों का बड़ा योगदान होता है, जो चुनाव की दिशा तय करता है। रघुनाथपुर का चुनावी इतिहास इस बात का प्रमाण है कि यह सीट एक प्रतिस्पर्धात्मक और गतिशील राजनीतिक क्षेत्र है।
हालिया चुनावी डेटा: 2015 व 2020
— 2015 विधानसभा चुनाव:
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RJD के हरिशंकर यादव ने BJP के मनोज कुमार सिंह को लगभग 10,622 वोटों से पराजित किया।
— 2020 विधानसभा चुनाव:
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हरिशंकर यादव ने चौंकाने वाली बढ़त बनाई—67,757 वोट (42.66%) पाने के साथ LJP के मनोज कुमार सिंह (49,792 वोट, 31.35%) और JD(U) के 26,162 वोट पाने वाले उम्मीदवार को पछाड़ा। उनकी जीत का स्थान अब और मजबूत हो गया।
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यह जीत त्रिकोणीय मुकाबले का नतीजा थी—LJP-अलगाव और NDA वोट विभाजन ने RJD को फायदा पहुंचाया। खासकर JD(U) के वोटों में से अधिकांश RJD की जीत की सीमा से अधिक थे।
जातीय समीकरण और लोकतांत्रिक प्रवृत्ति
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यहां राजपूत मतदाता परंपरागत रूप से BJP का सपोर्ट बेस रहे हैं, जबकि यादव समुदाय RJD का कोर वोट बैंक है। साथ ही दलित, कुशवाहा, मुस्लिम और अन्य OBC/आदिवासी वोटर भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
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लगभग 23% मुस्लिम मतदाता, 9–10% यादव और 11–12% SC वोटर इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण वोट बनाते हैं। वोटिंग टर्नआउट 53–55% के बीच रहती है।
2025 की संभावनाएँ: रणनीतिक रुझान
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RJD की मजबूत पकड़ जारी: पिछले दो चुनावों में लगातार जीत और व्यापक जातीय आधार RJD को अग्रणी बनाते हैं।
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NDA की चुनौती: अगर NDA यूथ / JDU और LJP एकजुट रही, तो विभाजन नहीं होने पर वो मजबूत वापसी कर सकती है।
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JD(U) का दबाव: 2024 लोकसभा चुनाव में विधानसभा क्षेत्र में JD(U) का कमजोर प्रदर्शन—भारतीय जनता पार्टी पर दबाव बढ़ा सकता है।
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लोकल मुद्दे और उम्मीदवार: स्थानीय किसान, विकास, शिक्षा, बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे और जमीन पर काम करने वाले उम्मीदवारों का प्रदर्शन निर्णायक हो सकता है।
सारांश तालिका
| कारक | स्थिति/प्रभाव |
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| RJD (हरिशंकर यादव) | मजबूत जनाधार, पिछली जीतों पर निर्भर |
| NDA (BJP–JD(U) गठबंधन) | अब भी चुनौती, लेकिन वोट विभाजन उनकी राह में बाधा |
| जातीय समीकरण | राजपूत, यादव, मुस्लिम, दलित वोटिंग समीकरण निर्णायक |
| लोकल मुद्दे और प्रत्याशी योग्यता | चुनावी परिणाम में भारी भूमिका निभा सकते हैं |






