लोकसभा चुनाव की शुरुआत अब बस होने को ही है और सभी राजनीतिक दल खुद को बेहतर और सामने वाले को खराब बताने में जुटे हुए हैं। लगभग सभी राज्यों में पार्टियों के दिग्गज नेता चुनावी मैदान में हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन बिहार में तस्वीर थोड़ी सी अलग है। यहां की राजनीति में अच्छी पकड़ रखने वाले दलों के टॉप नेता चुनावी मैदान में ही नहीं हैं। इस बार वह ‘किंगमेकर’ बनने की कोशिश में जुटे हैं।
सबसे पहले बात करते हैं बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के मुखिया नीतीश कुमार की। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले विपक्षी गठबंधन को अंगूठा दिखाकर भाजपा के खेमे में शामिल होने वाले नीतीश खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। वह एनडीए के उम्मीदवारों के लिए चुनाव-प्रचार के काम में लगे हैं। बिहार के दोनों उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा भी चुनावी मैदान में नहीं हैं। ये भी एनडीए प्रत्याशियों की जीत के लिए जनता के बीच जा रहे हैं और वोट मांग रहे हैं।
लालू और तेजस्वी भी नहीं हैं मैदान में
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव खुद तो अभी चुनाव प्रचार के मैदान में नहीं उतरे हैं लेकिन उनके बेटे तेजस्वी पूरी ताकत के साथ अपने उम्मीदवारों की जीत के लिए मेहनत कर रहे हैं। आगामी लोकसभा चुनाव में न तो लालू ही चुनाव लड़ रहे हैं और न ही तेजस्वी। चर्चा है कि जल्द ही लालू भी किसी प्रत्याशी की चुनावी रैली में दिखाई देंगे। माना जा रहा है कि वह सारण सीट से प्रत्याशी अपनी बेटी रोहिणी आचार्य के समर्थन में जनता के बीच पहुंच सकते हैं।
मुकेश सहनी भी नहीं लड़ रहे चुनाव
इसी तरह विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी भी चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। इंडिया गठबंधन के तहत उनकी पार्टी को 3 लोकसभा सीटें मिली हैं। लेकिन खुद सहनी चुनावी मैदान में नहीं उतरेंगे। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह भी इसी लिस्ट में शामिल हैं। उन्हें हाल ही में राज्यसभा सदस्य के रूप में चुना गया था। ऐसे में इसकी संभावना न के बराबर ही है कि वह चुनावी मैदान में बतौर प्रत्याशी नजर आएंगे। बता दें कि बिहार की 40 लोकसभा सीटों पर सभी 7 चरणों में वोटिंग होगी।







