ADVERTISEMENT
Sunday, August 16, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

शक्ति की सप्तधारा : विकसित भारत की ओर भारत की नई विकास-दृष्टि…………..

UB India News by UB India News
August 16, 2026
in BREAK, Breaking News, केंद्रीय राजनीती, पटना
0
शक्ति की सप्तधारा : विकसित भारत की ओर भारत की नई विकास-दृष्टि…………..
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के भविष्य के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ (Sapta Dhara) का एक व्यापक विजन प्रस्तुत किया। यह केवल सात क्षेत्रों की प्राथमिकता तय करने वाला कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित, आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम, आर्थिक रूप से शक्तिशाली और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली राष्ट्र बनाने की दिशा में एक समग्र विकास-दृष्टि के रूप में सामने आया है।

‘सप्तधारा’ का मूल विचार यह है कि भारत की शक्ति किसी एक क्षेत्र में नहीं, बल्कि अनेक धाराओं के एक साथ प्रवाहित होने में निहित है। प्रधानमंत्री द्वारा सामने रखे गए सात प्रमुख स्तंभ हैं—विनिर्माण शक्ति, कृषि एवं खाद्य उत्पादन, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, हरित एवं नील अर्थव्यवस्था तथा भारत की सॉफ्ट पावर।

RELATED POSTS

सवर्ण वोट बैंक को लुभाने में फिर से जुटी बीजेपी………

हाथों में भगत सिंह की फोटो लेकर उपवास पर बैठे पप्पू यादव…………

इन सात धाराओं को यदि व्यापक अर्थ में देखा जाए तो ये भारत की अर्थव्यवस्था, समाज, विज्ञान, आधारभूत संरचना, राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण और वैश्विक प्रतिष्ठा—सभी को एक साथ संबोधित करती हैं। यही इस दृष्टि की सबसे बड़ी विशेषता है।

स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में नई दिशा

1947 में भारत ने राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त की थी। इसके बाद के दशकों में देश ने लोकतांत्रिक संस्थाओं, कृषि, उद्योग, शिक्षा, विज्ञान, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में लंबी यात्रा तय की।

आज 2026 का भारत उस दौर में खड़ा है जहां प्रश्न केवल यह नहीं है कि भारत कितना आगे बढ़ा है, बल्कि यह है कि 2047 में भारत कैसा होगा?

स्वतंत्रता के 100वें वर्ष तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य इसी प्रश्न का उत्तर खोजता है। ‘शक्ति की सप्तधारा’ को इसी दीर्घकालिक लक्ष्य की रणनीतिक रूपरेखा के रूप में समझा जा सकता है।

भारत की विकास यात्रा में अब केवल आर्थिक वृद्धि पर्याप्त नहीं होगी। रोजगार चाहिए, लेकिन गुणवत्तापूर्ण रोजगार चाहिए। उद्योग चाहिए, लेकिन प्रतिस्पर्धी और तकनीक-आधारित उद्योग चाहिए। कृषि चाहिए, लेकिन किसान की आय और कृषि उत्पाद का मूल्यवर्धन भी चाहिए। तकनीक चाहिए, लेकिन ऐसी तकनीक चाहिए जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विकास चाहिए, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं। और वैश्विक शक्ति बनना है तो सैन्य क्षमता के साथ सांस्कृतिक और कूटनीतिक प्रभाव भी आवश्यक होगा।

यही सातों धाराओं का परस्पर संबंध है।

1. विनिर्माण शक्ति : भारत को उत्पादन की वैश्विक शक्ति बनाना

‘शक्ति की सप्तधारा’ में विनिर्माण शक्ति (Manufacturing Power) को विशेष महत्व दिया गया है। इसका कारण स्पष्ट है—कोई भी बड़ा राष्ट्र केवल उपभोग के आधार पर वैश्विक आर्थिक शक्ति नहीं बन सकता। उसे उत्पादन की क्षमता विकसित करनी होती है।

भारत के सामने आज सबसे बड़ी संभावनाओं में से एक यह है कि वह वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाए। इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, औषधि, रक्षा उपकरण, ऑटोमोबाइल, मशीनरी, नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण, वस्त्र, रसायन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए विशाल अवसर मौजूद हैं।

विनिर्माण का विस्तार केवल कारखाने लगाने तक सीमित नहीं है। इसके साथ—

  • रोजगार का निर्माण,
  • छोटे एवं मध्यम उद्योगों का विस्तार,
  • स्थानीय आपूर्ति शृंखला,
  • निर्यात में वृद्धि,
  • कौशल विकास,
  • अनुसंधान एवं विकास,
  • तकनीकी उन्नयन

जुड़ा हुआ है।

भारत के लिए चुनौती यह है कि वह केवल कम लागत वाला उत्पादन केंद्र न बने, बल्कि उच्च गुणवत्ता, उच्च तकनीक और उच्च उत्पादकता वाला विनिर्माण केंद्र बने।

यही कारण है कि विनिर्माण को आत्मनिर्भरता से भी जोड़ा जा रहा है। आत्मनिर्भर भारत का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता विकसित करना है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इस पूरी प्रक्रिया की रीढ़ बन सकते हैं। प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में एमएसएमई को वैश्विक बाजारों और मुक्त व्यापार समझौतों से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाने पर भी बल दिया।

यदि भारत का गांव, कस्बा और छोटा शहर भी उत्पादन की नई अर्थव्यवस्था से जुड़ता है, तो विनिर्माण शक्ति केवल औद्योगिक विकास नहीं बल्कि व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का माध्यम बन सकती है।

2. कृषि एवं खाद्य उत्पादन : खेत से वैश्विक बाजार तक

भारत की दूसरी महत्वपूर्ण धारा है—कृषि एवं खाद्य उत्पादन।

भारत की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना में कृषि की भूमिका आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लेकिन 21वीं सदी की कृषि केवल अधिक उत्पादन तक सीमित नहीं रह सकती। भविष्य की कृषि को उत्पादक, तकनीक-सक्षम, जल-संरक्षण आधारित, बाजारोन्मुख और मूल्यवर्धित बनाना होगा।

किसान केवल कच्चा उत्पाद बेचने वाला व्यक्ति न हो, बल्कि पूरी खाद्य मूल्य शृंखला का भागीदार बने—यही इस क्षेत्र की बड़ी संभावना है।

उदाहरण के लिए किसान गेहूं पैदा करता है, लेकिन यदि उसी उत्पादन से आटा, पैकेज्ड खाद्य पदार्थ और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद बनते हैं तो आर्थिक लाभ कई गुना बढ़ सकता है। इसी प्रकार फल, सब्जियां, दूध, मछली, मखाना, शहद, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों को प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण और निर्यात से जोड़ा जा सकता है।

इस दृष्टि से कृषि और खाद्य प्रसंस्करण का संबंध ग्रामीण औद्योगिकीकरण से भी है।

भारत में कृषि का भविष्य—

उत्पादन → प्रसंस्करण → भंडारण → पैकेजिंग → परिवहन → ब्रांडिंग → निर्यात

की पूरी शृंखला बनाने में है।

डिजिटल कृषि, मौसम संबंधी जानकारी, उपग्रह आधारित निगरानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, सेंसर, स्मार्ट सिंचाई और कृषि बाजारों की डिजिटल व्यवस्था इस परिवर्तन को गति दे सकती है।

इससे किसान की आय बढ़ाने के साथ-साथ खाद्य अपव्यय को कम करने और भारत को वैश्विक खाद्य आपूर्ति शृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की संभावना भी बढ़ती है।

3. प्रौद्योगिकी एवं नवाचार : भविष्य की वास्तविक शक्ति

तीसरी धारा है—प्रौद्योगिकी एवं नवाचार।

21वीं सदी में किसी राष्ट्र की शक्ति का निर्धारण उसके प्राकृतिक संसाधनों से उतना नहीं होगा, जितना उसके ज्ञान, अनुसंधान, डेटा और तकनीकी क्षमता से होगा।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, नई ऊर्जा, उन्नत सामग्री और स्वचालन आने वाले दशकों की अर्थव्यवस्था को बदलने वाले क्षेत्र हैं।

प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त के संबोधन में एक करोड़ युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रशिक्षण से जोड़ने की बात भी कही, जो इस बात का संकेत है कि भारत की भविष्य की तकनीकी शक्ति को युवा जनसंख्या से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

भारत के सामने सबसे बड़ी संभावना यह है कि वह केवल तकनीक का उपभोक्ता न रहे, बल्कि तकनीक का निर्माता बने।

इसके लिए विद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों तक नवाचार की संस्कृति विकसित करनी होगी। उद्योग और विश्वविद्यालय के बीच संबंध मजबूत करने होंगे। स्टार्टअप को केवल वित्तीय सहायता नहीं बल्कि बाजार, बौद्धिक संपदा, अनुसंधान और वैश्विक नेटवर्क तक पहुंच भी देनी होगी।

तकनीकी आत्मनिर्भरता का अर्थ यह भी है कि महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए भारत अत्यधिक बाहरी निर्भरता में न रहे।

यदि भारत अपने युवाओं की प्रतिभा को अनुसंधान, उद्यमिता और नवाचार से जोड़ पाता है तो यह सप्तधारा की सबसे शक्तिशाली धाराओं में से एक साबित हो सकती है।

4. गति शक्ति : भारत की भौतिक और डिजिटल गतिशीलता

चौथी धारा है—गति शक्ति।

किसी भी अर्थव्यवस्था की गति केवल उत्पादन क्षमता से नहीं बल्कि इस बात से तय होती है कि वस्तु, व्यक्ति, ऊर्जा और सूचना कितनी तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचती है।

भारत में सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे, जलमार्ग, लॉजिस्टिक केंद्र और डिजिटल नेटवर्क को एकीकृत करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उत्पादन की लागत कम होती है और बाजारों तक पहुंच आसान होती है।

गति शक्ति का व्यापक अर्थ है—

बेहतर संपर्क + बेहतर परिवहन + बेहतर लॉजिस्टिक्स + बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी = तेज आर्थिक विकास।

यदि किसी किसान का उत्पाद समय पर बाजार तक नहीं पहुंचता, किसी कारखाने को कच्चा माल समय पर नहीं मिलता या किसी निर्यातक का माल बंदरगाह तक पहुंचने में अत्यधिक समय लेता है, तो आर्थिक प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है।

इसलिए गति शक्ति केवल सड़क और रेल की परियोजना नहीं है। यह भारत की राष्ट्रीय आर्थिक दक्षता का प्रश्न है।

भविष्य में इसमें डिजिटल अवसंरचना की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। डेटा नेटवर्क, डिजिटल भुगतान, क्लाउड सेवाएं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित लॉजिस्टिक्स और वास्तविक समय की जानकारी आर्थिक गतिविधियों को नई गति दे सकती है।

5. रक्षा शक्ति : सुरक्षित भारत ही विकसित भारत

पांचवीं धारा है—रक्षा शक्ति।

इतिहास बताता है कि आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। यदि किसी देश की सुरक्षा कमजोर है तो उसकी आर्थिक और राजनीतिक स्वतंत्रता भी चुनौती में पड़ सकती है।

21वीं सदी की रक्षा व्यवस्था केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं है। आधुनिक युद्धक्षेत्र में—

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता,
  • ड्रोन,
  • साइबर सुरक्षा,
  • अंतरिक्ष आधारित प्रणालियां,
  • इलेक्ट्रॉनिक युद्ध,
  • स्वायत्त प्रणालियां,
  • मिसाइल तकनीक,
  • उन्नत संचार

की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।

इसलिए रक्षा शक्ति का अर्थ केवल अधिक हथियार खरीदना नहीं, बल्कि रक्षा अनुसंधान, स्वदेशी उत्पादन और तकनीकी क्षमता विकसित करना है।

भारत यदि अपने रक्षा उद्योग को मजबूत करता है तो इससे दोहरे लाभ हो सकते हैं। एक ओर राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी, दूसरी ओर उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण, अनुसंधान और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

इस अर्थ में रक्षा शक्ति सीधे विनिर्माण शक्ति और प्रौद्योगिकी शक्ति से जुड़ जाती है।

यही सप्तधारा की विशेषता है—हर धारा दूसरी धारा को शक्ति प्रदान करती है।

6. हरित एवं नील अर्थव्यवस्था : विकास और प्रकृति का संतुलन

छठी धारा है—हरित एवं नील अर्थव्यवस्था (Green and Blue Economy)।

भारत के लिए विकास की चुनौती अब केवल आर्थिक वृद्धि की नहीं है। जलवायु परिवर्तन, जल संकट, प्रदूषण, जैव विविधता का संरक्षण और समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

हरित अर्थव्यवस्था का अर्थ है ऐसी आर्थिक व्यवस्था जिसमें ऊर्जा, उद्योग, परिवहन, कृषि और शहरी विकास को पर्यावरणीय स्थिरता के साथ आगे बढ़ाया जाए।

सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा दक्षता, इलेक्ट्रिक परिवहन, अपशिष्ट प्रबंधन और परिपत्र अर्थव्यवस्था इस दिशा में महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।

दूसरी ओर भारत की लंबी समुद्री तटरेखा और विशाल समुद्री क्षेत्र नीली अर्थव्यवस्था की बड़ी संभावनाएं खोलते हैं। मत्स्य पालन, समुद्री जैव संसाधन, बंदरगाह, जहाज निर्माण, समुद्री परिवहन, तटीय पर्यटन और समुद्री ऊर्जा इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

लेकिन नील अर्थव्यवस्था का मूल सिद्धांत यह होना चाहिए कि समुद्र का आर्थिक उपयोग उसकी पारिस्थितिकी को नष्ट किए बिना हो।

इसी प्रकार हरित अर्थव्यवस्था का उद्देश्य विकास को रोकना नहीं बल्कि विकास को टिकाऊ बनाना है।

यह दृष्टि आने वाले समय में भारत के लिए रोजगार और नए उद्योगों के अवसर भी पैदा कर सकती है। हरित प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरणीय सेवाएं भविष्य के बड़े आर्थिक क्षेत्र बन सकती हैं।

7. सॉफ्ट पावर : भारत की संस्कृति से विश्व तक

सप्तधारा की सातवीं धारा है—भारत की सॉफ्ट पावर।

भारत की शक्ति केवल उसकी अर्थव्यवस्था, सेना या तकनीक में नहीं है। भारत की सभ्यता, संस्कृति, योग, आयुर्वेद, संगीत, सिनेमा, साहित्य, लोकतांत्रिक परंपरा, आध्यात्मिक चिंतन, भाषाएं और विविधता भी उसकी वैश्विक शक्ति हैं।

सॉफ्ट पावर का अर्थ है—दूसरे देशों और समाजों को केवल शक्ति के दबाव से नहीं, बल्कि आकर्षण, विश्वास, संस्कृति और विचारों के माध्यम से प्रभावित करने की क्षमता।

भारत के पास इस क्षेत्र में असाधारण विरासत है।

योग आज विश्वभर में लोकप्रिय है। भारतीय संस्कृति और भोजन वैश्विक समाज का हिस्सा बन चुके हैं। भारतीय प्रवासी समुदाय अनेक देशों में भारत की उपस्थिति को मजबूत करता है। भारतीय लोकतंत्र और विविधता भी भारत की वैश्विक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

लेकिन 21वीं सदी की सॉफ्ट पावर को आधुनिक माध्यमों से जोड़ना होगा।

डिजिटल मीडिया, रचनात्मक उद्योग, भारतीय भाषाओं की डिजिटल उपस्थिति, वैश्विक शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग भारत के प्रभाव को और मजबूत कर सकते हैं।

यदि भारत आर्थिक शक्ति के साथ सांस्कृतिक और वैचारिक शक्ति भी बनता है तो उसकी वैश्विक भूमिका अधिक व्यापक होगी।

सप्तधारा की सबसे बड़ी शक्ति : इनका परस्पर संबंध

‘शक्ति की सप्तधारा’ को केवल सात अलग-अलग योजनाओं के रूप में देखना इस दृष्टि को सीमित कर देगा।

इसका वास्तविक अर्थ इन सातों धाराओं के एकीकृत प्रवाह में है।

विनिर्माण को तकनीक चाहिए।

तकनीक को अनुसंधान चाहिए।

अनुसंधान को प्रतिभाशाली युवा चाहिए।

उद्योग को गति शक्ति चाहिए।

कृषि को प्रसंस्करण और परिवहन चाहिए।

रक्षा को उन्नत विनिर्माण और तकनीक चाहिए।

हरित अर्थव्यवस्था को नई तकनीक और निवेश चाहिए।

और इन सभी उपलब्धियों को विश्व के सामने प्रस्तुत करने के लिए सॉफ्ट पावर चाहिए।

इस प्रकार सप्तधारा वास्तव में एक परस्पर जुड़ा हुआ राष्ट्रीय विकास तंत्र बनाती है।

इसे एक सूत्र में समझें तो—

उत्पादन शक्ति + कृषि शक्ति + ज्ञान शक्ति + आधारभूत शक्ति + रक्षा शक्ति + पर्यावरणीय शक्ति + सांस्कृतिक शक्ति = विकसित भारत की समग्र शक्ति।

युवाशक्ति : सप्तधारा की ऊर्जा

प्रधानमंत्री के विजन में युवाओं की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण दिखाई देती है। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है, लेकिन जनसंख्या का लाभ तभी आर्थिक और राष्ट्रीय शक्ति में बदल सकता है जब युवाओं को शिक्षा, कौशल, अवसर और नवाचार का वातावरण मिले।

भविष्य का भारत वह होगा जहां युवा केवल नौकरी खोजने वाला न हो, बल्कि—

नौकरी देने वाला, शोधकर्ता, उद्यमी, वैज्ञानिक, इंजीनियर, किसान-उद्यमी और वैश्विक बाजार का निर्माता

भी बने।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर कृषि तकनीक और रक्षा अनुसंधान तक भारत के युवाओं की भूमिका निर्णायक हो सकती है।

इसलिए सप्तधारा का सबसे गहरा मानवीय पक्ष युवा शक्ति ही है।

बिहार और सप्तधारा : एक नई संभावना

‘शक्ति की सप्तधारा’ का महत्व केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं है। बिहार जैसे राज्यों के लिए भी इसमें व्यापक अवसर छिपे हैं।

बिहार की कृषि क्षमता, मखाना, फल-सब्जी, दुग्ध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, पर्यटन, शिक्षा, युवा मानव संसाधन और सांस्कृतिक विरासत इसे सप्तधारा के कई क्षेत्रों से जोड़ सकती है।

कृषि एवं खाद्य उत्पादन बिहार को खाद्य प्रसंस्करण का बड़ा केंद्र बना सकता है।

विनिर्माण शक्ति बिहार में छोटे एवं मध्यम उद्योगों के विस्तार का आधार बन सकती है।

प्रौद्योगिकी शक्ति राज्य के युवाओं को स्थानीय स्तर पर नए रोजगार और उद्यमिता से जोड़ सकती है।

गति शक्ति बिहार को पूर्वी भारत के बड़े लॉजिस्टिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद कर सकती है।

सॉफ्ट पावर के क्षेत्र में नालंदा, बोधगया, राजगीर, मिथिला, मगध, भोजपुरी और बिहार की समृद्ध ऐतिहासिक-सांस्कृतिक परंपरा को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की अपार संभावना है।

इस दृष्टि से सप्तधारा बिहार के लिए केवल केंद्र की नीति नहीं, बल्कि राज्य के विकास के लिए एक संभावित अवसर-पट भी है।

2047 की ओर : लक्ष्य केवल बड़ा भारत नहीं, बेहतर भारत

भारत के सामने 2047 का लक्ष्य केवल सकल घरेलू उत्पाद बढ़ाना या विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना नहीं होना चाहिए।

वास्तविक विकसित भारत वह होगा जिसमें—

हर युवा को अवसर मिले,

किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य मिले,

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़े,

गांव और शहर के बीच अवसरों की दूरी कम हो,

उद्योग विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करें,

अनुसंधान प्रयोगशालाओं से निकलकर बाजार तक पहुंचे,

रक्षा क्षेत्र आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम हो,

नदियां, जंगल और समुद्र सुरक्षित रहें,

और भारत की संस्कृति एवं विचार विश्व में सम्मान के साथ सुने जाएं।

यही विकास की व्यापक परिभाषा है।

निष्कर्ष : सात धाराओं से एक महासागर तक

15 अगस्त 2026 को लाल किले से सामने आया ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विचार भारत के विकास विमर्श को एक व्यापक दिशा देता है। यह मानता है कि 2047 का भारत किसी एक क्षेत्र की सफलता से नहीं बनेगा। इसके लिए उत्पादन, कृषि, ज्ञान, संपर्क, सुरक्षा, पर्यावरण और संस्कृति—सभी को एक साथ आगे बढ़ाना होगा।

भारत ने स्वतंत्रता के बाद की पहली यात्रा में राजनीतिक स्वतंत्रता को मजबूत किया। अब दूसरी बड़ी यात्रा आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक आत्मविश्वास की है।

यदि पहली यात्रा का मूल मंत्र था—“स्वतंत्र भारत”, तो 2047 की यात्रा का लक्ष्य हो सकता है—“सशक्त, समृद्ध, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और विश्व को दिशा देने वाला भारत।”

‘सप्तधारा’ इसी यात्रा का एक रूपक भी है और विकास की एक रणनीतिक सोच भी।

सात धाराएं अलग-अलग दिखाई देती हैं, लेकिन उनका अंतिम गंतव्य एक ही है—विकसित भारत।

विनिर्माण भारत के हाथों को शक्ति देगा।
कृषि भारत के अन्नदाता को शक्ति देगी।
प्रौद्योगिकी भारत के मस्तिष्क को शक्ति देगी।
गति शक्ति भारत के बुनियादी ढांचे को शक्ति देगी।
रक्षा शक्ति भारत की संप्रभुता को शक्ति देगी।
हरित एवं नील अर्थव्यवस्था भारत के भविष्य और प्रकृति को शक्ति देगी।
और सॉफ्ट पावर भारत की सभ्यता, संस्कृति और विचारों को विश्व तक पहुंचाएगी।

जब ये सात धाराएं एक साथ प्रवाहित होंगी, तभी वे एक ऐसी राष्ट्रीय शक्ति में परिवर्तित हो सकती हैं जो केवल भारत की अर्थव्यवस्था को नहीं, बल्कि उसके आत्मविश्वास, सामर्थ्य और वैश्विक भूमिका को भी नई ऊंचाई दे।

स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में ‘शक्ति की सप्तधारा’ इसलिए केवल आज की घोषणा नहीं, बल्कि 2047 के भारत की संभावित रूपरेखा के रूप में देखी जा सकती है—एक ऐसा भारत जो विकास को गति दे, शक्ति को आत्मनिर्भरता से जोड़े और अपनी सभ्यता की जड़ों पर खड़ा होकर भविष्य की दुनिया का नेतृत्व करे।

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

पटना अब पाटलिपुत्र से जाना जायेगा !……………………..

सवर्ण वोट बैंक को लुभाने में फिर से जुटी बीजेपी………

by UB India News
August 16, 2026
0

बांकीपुर विधानसभा सीट पर हार के बाद बिहार में बीजेपी का चुनावी राजनीति का तरीका बदल गया है। ये चुनाव...

हाथों में भगत सिंह की फोटो लेकर उपवास पर बैठे पप्पू यादव…………

हाथों में भगत सिंह की फोटो लेकर उपवास पर बैठे पप्पू यादव…………

by UB India News
August 16, 2026
0

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव आज रविवार को एक दिन के उपवास पर हैं। पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर हाथों...

पुलिस ने बिलकुल सही किया लेकिन न्यायिक जांच पूरी होने तक टिप्पणी उचित नहीं……….

अब दिमागी नक्सल से खतरा……..

by UB India News
August 16, 2026
0

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए हिंसा और अराजकता फैलाने वाली...

बांग्लादेश की ऑस्ट्रेलिया पर ऐतिहासिक जीत……..

बांग्लादेश की ऑस्ट्रेलिया पर ऐतिहासिक जीत……..

by UB India News
August 16, 2026
0

हसन महमूद और मेहदी हसन मिराज की घातक गेंदबाजी से बांग्लादेश ने पहले टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट...

मुंबई के नेवी नगर में नौसैनिक का शव फंदे से लटका मिला, पत्नी और दो बच्चों की भी मौत

मुंबई के नेवी नगर में नौसैनिक का शव फंदे से लटका मिला, पत्नी और दो बच्चों की भी मौत

by UB India News
August 16, 2026
0

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के नेवी नगर में भारतीय नौसेना के एक नाविक और उसके दो बच्चों (उम्र दो...

Next Post
वाराणसी एयरपोर्ट पर चली गोली, लहूलुहान हालत में 2 कर्मचारी अस्पताल में भर्ती

वाराणसी एयरपोर्ट पर चली गोली, लहूलुहान हालत में 2 कर्मचारी अस्पताल में भर्ती

पश्चिम बंगाल के पूर्व डिप्टी स्पीकर ने TMC ऑफिस में फांसी लगाई:

पश्चिम बंगाल के पूर्व डिप्टी स्पीकर ने TMC ऑफिस में फांसी लगाई:

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend