बांकीपुर विधानसभा सीट पर हार के बाद बिहार में बीजेपी का चुनावी राजनीति का तरीका बदल गया है। ये चुनाव यूजीसी के मुद्दे, पेपर लीक, भरत तिवारी एनकाउंटर और जेन जी के विरोध के बाद हुआ था। राज्य में बीजेपी को लगता है कि उसके मुख्य सवर्ण वोटर पार्टी से नाराज हैं और उन्होंने जन सुराज के नेता प्रशांक किशोर का साथ दिया है। अब पार्टी फिर से अपने मुख्य सवर्ण वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रही है।
सवर्ण आयोग की ओर से जिलों में नोडल अधिकारी नियुक्त
पिछले सप्ताह, बिहार में सवर्ण आयोग ने जिला नोडल अधिकारी नियुक्त किए, ताकि लोग अपनी शिकायतें जिला स्तर पर ही दर्ज करा सके और उन्हें पटना न जाना पड़े। आरा में पुलिस की ओर से भरत तिवारी के एनकाउंटर को लेकर सरकार पर सवाल उठ रहे थे। पिछले दिनों सीएम सम्राट चौधरी ने भरत तिवारी के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आर्थिक मदद का वादा किया, लेकिन परिजन अब भी न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
भरत तिवारी परिवार के सहायता
सीएम सम्राट चौधरी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा- न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर, बिहार सरकार भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक मदद देगी और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देगी।
मुफ्त कोचिंग सुविधा बढ़ाने पर विचार
सरकार सवर्ण आयोग की सिफारिशों पर भी विचार कर रही है, जिनमें ईडब्ल्यू कैटेगरी के छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग सुविधा बढ़ाना और सरकार की ओर से चलाए जाने वाले आवासीय स्कूलों में ईडब्ल्यूएस और सवर्ण छात्रों का दाखिला शामिल है।
स्पेशल पोर्टल की शुरुआत
आने वाली पीढ़ी पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस के भाषण में सीएम सम्राट चौधरी ने एक स्पेशल पोर्टल शुरू करने का वादा किया, जहां छात्र स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर, परीक्षाओं और अन्य जरूरतों से जुड़ी अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें। सरकार एक महीने के भीतर शिकायतों का समाधान करेगी। यह पोर्टल सोमवार से काम करना शुरू कर देगा।







