बिहार के खगड़िया के गोगरी जमालपुर से फर्जी IAS मनीष गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद उसके आलीशान मकान और संपत्ति को लेकर कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं. पुलिस के अनुसार, फर्जी अधिकारी बनकर लोगों पर धौंस जमाने और कथित तौर पर ठगी के जरिए उसने बड़ी संपत्ति अर्जित की है. अब पटना से पहुंची EOU की टीम उसकी संपत्ति और पूरे मामले की जांच कर रही है. हालांकि, संपत्ति और अन्य आरोपों से जुड़ी बातें जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी. इस मामले में ईओयू की टीम आगे की कार्रवाई कर रही है.
करोड़ों के मकान ने खींचा सबका ध्यान
गोगरी जमालपुर स्थित मनीष गुप्ता का आलीशान मकान इन दिनों चर्चा के केंद्र में है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, मकान के निर्माण और सजावट पर भारी रकम खर्च की गई है. जानकारी के अनुसार घर का निर्माण करीब 10 साल से अलग-अलग चरणों में चलता रहा है. वहीं, मकान की खास बात यह है कि परिसर में बड़ी संख्या में CCTV कैमरे लगे हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, घर के अलग-अलग हिस्सों और आसपास करीब 50 से अधिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं. घर में इस्तेमाल किए गए ग्रेनाइट, टाइल्स, नक्काशी और महंगे दरवाजे भी इसकी भव्यता को दर्शाते हैं.
दूसरे जिलों और राज्य से बुलाए जाते थे मजदूर
मकान के निर्माण को लेकर एक और बात सामने आई है. बताया जा रहा है कि यहां बिहार के अलग-अलग जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी मजदूर और कारीगर बुलाए जाते थे. स्थानीय लोगों के अनुसार, घर की अंदरूनी नक्काशी और सजावट के लिए सिलीगुड़ी से कारीगर आए थे. बताया जाता है कि कुछ कारीगर कई महीनों तक परिसर में ही रहकर काम करते थे. फिलहाल भी करीब 10 से अधिक मजदूर घर के बाहर गेट लगाने का काम कर रहे हैं. ये मजदूर मुंगेर जिले के हरिणमार गांव के रहने वाले बताए जा रहे हैं.
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि एक बार किसी मजदूर से काम लेने के बाद उसे दोबारा नहीं रखा जाता था. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो पाई है.
तीन फेज में है मकान में बिजली कनेक्शन
मनीष गुप्ता के मकान में तीन फेज का बिजली कनेक्शन होने की जानकारी भी सामने आई है. बिजली विभाग से जुड़े कर्मी के मुताबिक, कुछ महीने पहले घर का लोड 15 से बढ़ाकर 25 केवी करने के लिए आवेदन दिया गया था. इतने बड़े बिजली लोड की जरूरत क्यों पड़ी और घर में बिजली की इतनी खपत किस काम के लिए हो रही थी, यह भी जांच का विषय बन गया है. हालांकि, सिर्फ तीन फेज कनेक्शन या लोड बढ़ाने के आवेदन से किसी गलत गतिविधि का कारण तो नहीं है.
एक प्रिंसिपल को दिखाया गया अफसर का धौंस
मनीष गुप्ता पर अपने घर तक सड़क बनवाने को लेकर एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल पर दबाव बनाने का भी आरोप है. बताया जाता है कि उसके घर के पास स्थित सरकारी स्कूल के सामने से होकर सड़क बनाने की कोशिश की जा रही थी. स्कूल के प्रिंसिपल ने इसका विरोध किया. इसके बाद कथित तौर पर एक व्यक्ति को मोबाइल में आई-कार्ड दिखाकर प्रिंसिपल के पास भेजा गया और खुद को इंटेलिजेंस ब्यूरो का अधिकारी बताया गया.उस व्यक्ति ने कहा कि मनीष गुप्ता ने प्रिंसिपल को अपने आवास पर बुलाया है. अचानक एक कथित खुफिया अधिकारी का नाम सामने आने से प्रिंसिपल कुछ समय के लिए डर गए थे. हालांकि, बाद में उन्होंने सड़क निर्माण की अनुमति नहीं दी.
EOU ने शुरू की संपत्ति की पड़ताल
मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना से EOU की टीम खगड़िया पहुंची और मनीष गुप्ता की संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की. पुलिस के अनुसार, जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मनीष गुप्ता के पास कुल कितनी संपत्ति है. वह संपत्ति कब और कैसे अर्जित की गई और उसके आय के स्रोत क्या थे.
थाने में खड़ी महंगी कार भी बनी चर्चा का विषय
मनीष गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद गोगरी थाना परिसर में खड़ी एक महंगी कार भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यह टेस्ला कंपनी की कार है, जिसकी कीमत करीब 70 लाख रुपये बताई जा रही है. कार पर ‘भारत सरकार’ लिखा होने की बात भी सामने आई है. अब यह सवाल भी उठ रहा है कि इस कार का इस्तेमाल किस हैसियत से और किस उद्देश्य के लिए किया जाता था. इसकी वास्तविक कीमत, स्वामित्व और इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी भी जांच का हिस्सा हो सकती है.
बचपन का दोस्त भी हैरान
मनीष गुप्ता के बचपन के दोस्त बसंत कुमार मंडल भी उसकी गिरफ्तारी की खबर से हैरान हैं. बसंत के मुताबिक, करीब पांच साल पहले उन्हें जानकारी मिली थी कि उनका दोस्त IAS बनकर गाजियाबाद का DM बन गया है. इसके बाद वह उससे मिलने उसके घर पहुंचे थे. बसंत का कहना है कि मुलाकात के दौरान मनीष ने खुद को DM नहीं बताया और किसी दूसरे पद पर होने की बात कही. उसने उनके बेटे के लिए नौकरी दिलाने की बात भी कही थी, लेकिन नौकरी नहीं मिली. अब मनीष के फर्जी IAS होने की बात सामने आने के बाद बसंत को यकीन नहीं हो रहा कि पढ़ाई में तेज रहने वाला उनका बचपन का दोस्त इस तरह के मामले में कैसे फंस गया.
6 भाइयों में सबसे छोटा है मनीष
अगर हम पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो मनीष गुप्ता 6 भाइयों में सबसे छोटा बताया जा रहा है. उसके पिता रिटायर्ड प्रोफेसर थे. माता-पिता दोनों का निधन हो चुका है. परिवार के बाकी सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों में हैं. एक भाई अमेरिका में रहता है, एक बनारस में प्रोफेसर है, जबकि अन्य भाई बोकारो और दिल्ली में निजी कंपनियों में काम करते हैं. एक भाई पटना में चाय की दुकान चलाता है.
अब जांच से खुलेगा ‘साम्राज्य’ का सच
मनीष गुप्ता के आलीशान मकान, महंगी कार, भारी बिजली लोड, बड़ी संख्या में CCTV और कथित तौर पर वर्षों तक चले निर्माण ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस का आरोप है कि फर्जी IAS बनकर लोगों पर प्रभाव जमाने और ठगी के जरिए उसने संपत्ति अर्जित की है. ऐसे में अब EOU की जांच यह पता लगाने में जुटी है कि उसकी संपत्ति कितनी है, उसके पास मौजूद संसाधनों का वास्तविक स्रोत क्या है और कथित फर्जी अधिकारी बनने के पीछे पूरा नेटवर्क कितना बड़ा था. जांच पूरी होने के बाद ही मनीष गुप्ता की संपत्ति और उसके पूरे कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है.
10वीं क्लास का टॉपर था मनीष गुप्ता
मनीष गुप्ता अपना रौब ऐसा रखता था कि उसके पड़ोसी उससे दूर ही रहते थे। वो खुद को PMO में काम करने वाला अधिकारी बताता था। वो कहता था कि उसकी बात सीधे पीएम मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से होती है। लिहाजा आसपास के लोग भी उससे दूरी बनाकर रहते थे। मनीष के बारे में जानने के लिए भास्कर की टीम ने उसके बचपन के दोस्तों की तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद हमें मनीष का एक क्लासमेट मिला।उसने बताया कि मनीष का जन्म 1975 में हुआ था। उसके पिता खगड़िया के केडीएस कॉलेज में हिन्दी के प्रोफेसर थे। मनीष की शुरुआती पढ़ाई जमालपुर-गोगरी इलाके के सरकारी स्कूल में हुई। 1991 में मैट्रिक के एग्जाम में मनीष ने टॉप किया था। वो बचपन से ही पढ़ने में तेज था। इंटर तक उसने अपनी पढ़ाई यहीं पर पूरी की। इसके बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए अपने बड़े भाई के पास दिल्ली चला गया। उसके बाद हमलोगों की बात मनीष से कम हो गई।
बेटे की पैरवी के लिए दो साल चक्कर लगाया, काम नहीं हुआ
फर्जी IAS के दोस्त ने बताया कि मैं अपने बेटे से जुड़े एक काम की पैरवी के लिए मनीष के पास गया था। मुझे लगा कि बचपन का दोस्त बड़ा अधिकारी है। वो मेरी मदद कर सकता है। उस समय मुझे यह अंदाजा नहीं था कि जिस व्यक्ति को मैं बड़ा सरकारी अधिकारी समझ रहा हूं, उसकी पहचान ही पुलिस जांच में फर्जी निकल सकती है। अब जब मनीष की गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई की खबर सामने आई तो पहले मुझे भरोसा नहीं हुआ। मनीष गुप्ता के दोस्त ने बताया कि एक बार किसी विवाद को लेकर मध्य विद्यालय जमालपुर कचहरी के एक शिक्षक को मनीष ने दूर से ही अपना ID कार्ड दिखाया था। उसने खुद को CBI का अधिकारी बताकर टीचर को भी धमकाया था।
सरकारी बोर्ड वाली दो गाड़ियां, एक ड्राइवरलेस टेस्ला भी
खगड़िया के गोगरी पुलिस को सूचना मिली थी कि जमालपुर में रहने वाला मनीष अपनी गाड़ियों पर ‘GOVT OF INDIA’ का बोर्ड लगाकर खुद को IAS बताता है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने 8 अगस्त की रात उसके घर पर छापेमारी की। घर के सामने दो गाड़ियां खड़ी थीं और दोनों पर सरकारी बोर्ड लगा था। घर के बाहर एक आदमी हाफ पैंट-टी शर्ट में घूम रहा था। पुलिस ने जब उससे उसके बारे में पूछा तो उसने कहा कि मनीष गुप्ता ने अपने मोबाइल पर आई कार्ड भी दिखाया। आई कार्ड और उसका कॉन्फिडेंस देखकर पुलिस भी कुछ देर के लिए बैकफुट पर आ गई। लेकिन पुलिस के अधिकारी ने आईकार्ड की जांच की तो पता चला ये फर्जी है।’
जब तक रेड चली पुलिस से तू-तड़ाक करता रहा फर्जी IAS
पुलिस सूत्रों के मुताबिक मनीष गुप्ता के घर पर करीब 7 घंटे तक रेड चली। रेड के दौरान वो पुलिस से सीनियर ऑफिसर को भी तू-तड़ाक करता रहा। वो बार बार खुद को बड़ा अधिकारी बताकर पुलिस वालों को सस्पेंड करवाने की धमकी देता रहा।







