सोशल मीडिया पर कभी बैठने, चलने के अंदाज और ढीले-ढाले कुर्ता-पायजामा को लेकर ट्रोल होने वाले निशांत कुमार इन दिनों अपने कामों को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने बिहार के सबसे ताकतवर संघों में से एक डॉक्टरों के संगठन से सीधा मोर्चा ले लिया है। उनके इस बोल्ड फैसले और एक्शन ने विरोधियों के साथ-साथ राजनीतिक जानकारों को भी हैरान कर दिया है।
आखिर दो दिनों के भीतर ऐसा क्या हुआ जिसने स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया और निशांत के इस नए तेवर के पीछे कौन हैं।
- 23 जून 2026: स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार अचानक विश्व के सबसे बड़े अस्पतालों में शुमार PMCH (पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल) का निरीक्षण करने पहुंचे। ड्यूटी का वक्त था, लेकिन अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह अपनी सीट से गायब थे।
- मंत्री ने समीक्षा बैठक के लिए उन्हें फोन भी लगवाया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। पता चला कि वे बिना किसी पूर्व सूचना या छुट्टी के गायब हैं।
- 25 जून 2026: अभी इस बात को 48 घंटे भी नहीं बीते थे कि स्वास्थ्य मंत्री ने कड़ा फैसला लेते हुए PMCH के प्रभारी प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया और उनका तबादला पटना से सीधे 250 किलोमीटर दूर बेतिया कर दिया।
सूत्रों के मुताबिक, इस बड़ी कार्रवाई के पीछे एक सोची-समझी रणनीति है। वह जनता के बीच मैसेज देना चाहते थे। इस कार्रवाई के पीछे 3 बड़ी बातें थीं…
- निशांत कुमार ने इस कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक और स्वास्थ्य तंत्र को साफ संदेश दे दिया है कि कोई चाहे कितना भी बड़ा अधिकारी हो, पहुंच वाला डॉक्टर हो या रसूखदार शख्स, ड्यूटी में लापरवाही, अनुशासनहीनता और बिना बताए गायब रहना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- उन्होंने जता दिया है कि अस्पतालों में अब प्रशासनिक मनमानी नहीं चलेगी। डॉक्टरों और अधिकारियों की पहली प्राथमिकता VIP कल्चर के बजाय ‘जन सेवा’ और मरीजों की सहूलियत होनी चाहिए।
- राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों के प्रमुखों को भी यह कड़ा संकेत मिल चुका है कि वे मुस्तैद रहें, क्योंकि औचक निरीक्षण कहीं भी और कभी भी हो सकता है।
पिता नीतीश कुमार से लेते हैं सलाह
सूत्रों के मुताबिक, निशांत के इस पूरे बदलाव के पीछे उनके पिता नीतीश कुमार का हाथ है। चाय के वक्त या खाली समय में नीतीश कुमार अपने 2005 से 2026 तक के शासनकाल के अनुभवों को निशांत के साथ साझा करते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, डॉक्टरों के इस बड़े तबादले और कार्रवाई से पहले भी निशांत ने अपने पिता से सुझाव लिए थे। दोनों के बीच लगातार सरकार के कामकाज पर चर्चा होती है।
निशांत के नए तेवर के पर्दे के पीछे के 3 चेहरे
निशांत कुमार की पुरानी छवि को तराश कर इस नए कड़क अंदाज में ढालने के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी, वफादार और तजुर्बेकार प्रशासनिक अधिकारियों की तिकड़ी है। ये 3 चेहरे निशांत के साथ साए की तरह रहते हैं…
1. IAS अफसर कुमार रविः हर फैसले में अहम भूमिका
सूत्रों के मुताबिक, निशांत के हर बड़े फैसले के पीछे स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि की अहम भूमिका होती है। वह मंत्री के निर्देशों को धरातल पर उतारते हैं। कुमार रवि के पास प्रशासन का लंबा अनुभव है और वे संकट के समय खुद मैदान में उतरने के लिए जाने जाते हैं।
वे पटना के कमिश्नर और मुख्यमंत्री सचिवालय में सचिव भी रहे हैं। नीतीश कुमार के साथ हर बड़े निरीक्षण और कार्यक्रम में दिखने वाले कुमार रवि को निशांत के मंत्री बनते ही उनके साथ भेजा गया ताकि वे अपने प्रशासनिक अनुभव से विभाग को मजबूती दे सकें।

2. कौशलेंद्र कुमारः लोगों से मिलने की देते हैं ट्रेनिंग
नीतीश कुमार के आप्त सचिव रह चुके कौशलेंद्र कुमार को बेहद कड़क और अनुशासनप्रिय अधिकारी माना जाता है। नीतीश के इस ‘सेकंड साए’ को अब निशांत कुमार की प्रशासनिक ट्रेनिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
निशांत को लोगों से कैसे मिलना है, उनकी समस्याएं कैसे सुननी हैं। यह सब बताते हैं। निशांत इनसे फाइलों का निपटारा और किसी भी नीतिगत फैसले पर जरूर चर्चा करते हैं।
कौशलेंद्र कुमार के पास फील्ड (SDO और DDC के रूप में) से लेकर सीएम सचिवालय तक का लंबा अनुभव है।
3. हरिद्वार प्रसादः निशांत किससे मिलेंगे, किससे नहीं, ये तय करते हैं
- हरिद्वार प्रसाद निशांत कुमार के तीसरे सबसे बड़े रणनीतिकार हैं। ये उनके निजी आप्त सचिव भी हैं। वे नीतीश कुमार के सबसे पुराने वफादारों में से एक हैं और तब से उनके साथ हैं जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं बने थे (1990 के दशक में केंद्र में मंत्री बनने के समय से)।
- निशांत को किससे मिलना है और किससे दूरी बनानी है, यह सब हरिद्वार प्रसाद तय करते हैं। वे नीतीश कुमार के पुराने राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों की याद दिलाते हैं कि किस परिस्थिति से कैसे निपटना है। नीतीश कुमार के पुराने जानकारों को निशांत से जोड़ने का काम भी उन्हीं का है।
2 महीने रोज साढ़े 9 घंटे ऑफिस में बैठे
सूत्रों के मुताबिक, निशांत कुमार ने 7 मई को मंत्री पद की शपथ लेने के बाद सीधे फील्ड में उतरने के बजाय पहले खुद को तैयार किया। उन्होंने शुरुआती दो महीनों तक कड़ा रूटीन फॉलो किया।
वे रोज सुबह 9:30 बजे सचिवालय स्थित स्वास्थ्य विभाग पहुंच जाते थे और देर शाम 7 बजे तक अधिकारियों के साथ एक-एक फाइल की समीक्षा करते थे। टिप्पणियों को समझते थे और फाइल मूवमेंट की बारीकियों को जानते थे।
फील्ड में जाने से पहले उन्होंने विभाग के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में घंटों समय बिताया। वहां से बिहार के अस्पतालों से मिल रही लाइव फीड, कमियों और सुविधाओं को समझा।

ऑफिसों में बैठने के बाद निशांत ने 3 बदलाव किए
विभागों में घंटों बैठने के बाद निशांत कुमार ने व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 3 बदलाव किए।
- डॉक्टरों की 100% उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आधार बेस्ड बायोमेट्रिक अटेंडेंस (फिंगरप्रिंट और आईरिस) को बेहद कड़ाई से लागू किया है। यह व्यवस्था सभी मेडिकल कॉलेजों, सदर अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और रेफरल अस्पतालों में अनिवार्य कर दी गई है।
- डॉक्टरों के आने-जाने के सटीक समय की ट्रैकिंग सीधे पटना मुख्यालय से हो रही है, जिसे खुद निशांत मॉनिटर करते हैं।
- देरी से आने या बिना सूचना गायब रहने पर सीधे सैलरी काटने और सस्पेंशन जैसी विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
आगे की 3 बड़ी तैयारी
- रेफर सिस्टम का खात्मा: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और जिला अस्पतालों की स्थिति को इतना बेहतर कर दिया जाए ताकि सामान्य मामलों के लिए मरीजों को बड़े शहरों में रेफर न करना पड़े।
- दवा और उपकरण: अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की चौबीसों घंटे उपलब्धता।
- ग्रामीण स्वास्थ्य: एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं का विस्तार सीधे गांवों तक करना, जिसके लिए निशांत ने सुदूर ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक केंद्रों के औचक निरीक्षण का एक पूरा रोडमैप तैयार कर लिया है।
पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रवीण बागी कहते हैं, ‘निशांत कुमार की यह सक्रियता और सूझबूझ दिखाती है कि वे राजनीति में बहुत आगे जाएंगे। इस कार्रवाई से मीडिया की बनाई गई उनकी पुरानी छवि टूटेगी। हालांकि, भ्रष्ट और कामचोर डॉक्टरों की लॉबी बहुत मजबूत है, जो उन्हें घेरने या भ्रम पैदा करने की साजिश रच सकती है, जिससे उन्हें बचकर रहना होगा।

डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने सरकार को बताया तानाशाह
कार्रवाई के बाद डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विभाग और स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना साधा और सफाई दी।
- उन्होंने बताया कि मंत्री के कार्यक्रम से एक दिन पहले मेरे पेट और जांघ पर गर्म पानी गिर गया था, जिससे बुरी तरह झुलस गए थे। असहनीय दर्द में थे और दवा खाकर आराम कर रहे थे, इसी वजह से फोन नहीं उठा पाए। उन्होंने अपनी चोट की तस्वीरें भी व्हाट्सएप पर अधिकारियों को भेजने का दावा किया।
- उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को प्रशासनिक तानाशाही और अपमानजनक करार दिया। उन्होंने कहा कि बिना कोई कारण बताओ नोटिस दिए या पक्ष सुने बिना सीधे कार्रवाई कर दी गई।
- सरकारी गाड़ी और क्लिनिक के आरोप पर उन्होंने कहा कि जिस जगह गाड़ी खड़ी थी, वह मेरा पैतृक आवास है, न कि कोई कमर्शियल क्लिनिक।
- उन्होंने कहा, ‘क्या हम कोई अपराधी हैं? इस तरह की कुव्यवस्था और तानाशाही वाली सरकार के साथ काम करने में मुझे घिन आती है।’ उन्होंने आत्मसम्मान से समझौता न करने की बात कहते हुए अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी।






