भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर बिहार की राजनीति दो धड़ों में बंटती नजर आ रही है. विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्तारूढ़ गठबंधन के कई नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. इसी बीच केंद्र और बिहार सरकार में सहयोगी दल हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक एवं केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एनकाउंटर का खुलकर बचाव किया है. उन्होंने कहा कि अगर किसी ने पुलिस पर हथियार ताना है तो पुलिस की जवाबी कार्रवाई गलत नहीं कही जा सकती. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं और रिपोर्ट आने के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी.
‘पुलिस ने कुछ गलत नहीं किया’
रविवार को मीडिया से बातचीत में जीतन राम मांझी ने कहा कि यदि परिवार का दावा है कि भरत तिवारी मानसिक रूप से अस्वस्थ था, तो उसके हाथ में हथियार कैसे पहुंचा. उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने पुलिस पर पिस्तौल तानी है तो पुलिस की जवाबी कार्रवाई को वह उचित मानते हैं. मांझी ने कहा कि पुलिस पर लगातार हमले हो रहे हैं और कई मामलों में पुलिसकर्मियों की भी जान गई है. ऐसे में हर घटना को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी.
NDA के भीतर अलग-अलग राय
मांझी का बयान ऐसे समय आया है, जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के ही कई नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. भाजपा के मंत्री मिथिलेश तिवारी, विजय कुमार सिन्हा और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने मामले में निष्पक्ष जांच की आवश्यकता जताते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. वहीं जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि वायरल वीडियो देखने के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर संदेह पैदा होता है और समयबद्ध जांच होनी चाहिए. लेकिन जीतन राम मांझी के सुर अपने ही सहयोगी दलों से जुदा हैं.
विपक्ष लगातार हमलावर
यहां तक कि विरोधी दलों में कांग्रेस और राजद समेत कई दलों ने भरत तिवारी के एनकाउंटर को फर्जी करार देते हुए इसे सरकारी मर्डर बताया है. राजद नेता तेजस्वी यादव, मृत्युंजय तिवारी तथा कांग्रेस के राजेश राम और अखिलेश सिंह समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.
पूर्व DGP भी उठा चुके हैं सवाल
मामले पर बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे और अभयानंद ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखी है और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं. इस बीच प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए तीन पुलिस पदाधिकारियों और एक पुलिसकर्मी को निलंबित किया जा चुका है.
न्यायिक जांच के आदेश
बता दें कि पुलिस कार्रवाई पर संदेह पैदा होने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूरे मामले की जांच उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने का आदेश दिया है. ऐसे में अब इस मामले की दिशा और निष्कर्ष न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर निर्भर करेंगे. लेकिन, इससे पहले बिहार की राजनीति इस मुद्दे को लेकर दो खेमों में बंटती नजर आ रही है.







