बिहार में हुए टेंडर घोटाला का मास्टरमाइंड और ठेकेदार रिशु श्री बेहद शातिर है। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की टीम को उसका शातिराना अंदाज देखने को मिला है। वो भी उस दौरान जब रिशु श्री 5 दिनों की पुलिस रिमांड पर है।
सूत्रों के मुताबिक, बेउर जेल से बाहर आने के बाद उसका तौर तरीका बदला हुआ मिला। उसके हाव-भाव पूरी तरह से बदले गए हैं। जब टीम ने उससे पूछताछ शुरू की तो वह शुरुआत में सपोर्ट ही नहीं कर रहा था। बार-बार कह रहा था कि उसने कुछ नहीं किया है। उसे फंसाया गया है।
सवाल पूछे जाने पर गोलमोल बातें कर घूमा रहा था। पूछताछ के दौरान रिशु श्री ने यहां तक कह दिया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट पूरी तरह से गलत है। फर्जी तरीके से बनाई गई है। इसके आधार पर SVU ने जो FIR दर्ज की है, वो भी सही नहीं है।
मतलब, वह जांच एजेंसियों के ऊपर ही सवाल खड़ा कर रहा था। जब SVU ने उसे गिरफ्तार किया था तब उस वक्त की पूछताछ में वो सारे सवालों का जवाब सही तरीके से दे रहा था।
टूटने के बाद बताई कई बातें
पूछताछ के पहले दिन शुरुआत में कुछ घंटों तक रिशु अधिकारियों को उनके सवालों का सही जवाब न देकर उन्हें अपनी बातों में उलझाता रहा। कुछ घंटे तक SVU की टीम उसके पैंतरों को झेलती रही। पर जब टीम ने सख्ती दिखाई तो वह टूट गया। सवालों के जवाब देने लगा। पूछताछ में सपोर्ट करने लगा। अब तक 15 घंटे से भी अधिक की पूछताछ हो चुकी है।
टेंडर घोटाला, IAS संजीव हंस और बाकी मददगारों से जुड़े 200 से अधिक सवाल उससे पूछे जा चुके हैं। अलग-अलग शिफ्टों में तीन DSP की अगुवाई वाली टीम रिशु श्री से पूछताछ कर रही है। आज फिर पूछताछ होगी।
सबसे बड़ा सवाल: कैसे मैनेज करते थे टेंडर?
जांच एजेंसी सवालों की लंबी लिस्ट लेकर बैठी थी। उसी आधार पर रिशु श्री से पूछताछ कर रही है। इनके लिए सबसे बड़ा सवाल है कि बिहार के सरकारी विभागों में वह टेंडर कैसे मैनेज करता था? SVU इसके पूरे मोडस ऑपरेंडी को डिकोड करने में जुटी है। यही वजह है अब तक कुछ ऐसे भी सवाल पूछे गए हैं, जो एक-दूसरे से काफी मिलते-जुलते हैं।
IAS संजीव हंस से कनेक्शन पर साधी चुप्पी
ED की रिपोर्ट और SVU के दर्ज केस से स्पष्ट है कि ठेकेदार रिशु श्री का IAS अधिकारी संजीव हंस के साथ बेहद तगड़ा कनेक्शन है। इन दोनों के बीच सरकारी विभागों के टेंडर और उसके कमीशन को लेकर कई बातें सामने आ चुकी हैं। जब इससे जुड़े सवाल पूछे गए तो रिशु श्री अधिकारियों को घुमाने की कोशिश करने लगा।
IAS अधिकारी से अपने कनेक्शन की बात पर सीधे चुप्पी साध बैठा। आज उससे इस मामले पर कड़ाई से पूछताछ होगी।
पहले दिन रिशु श्री से पूछे गए कुछ अहम सवाल जानें
- आपने कितनी कंपनी बना रखी है?
- अलग-अलग नामों से कंपनी क्यों बनाई?
- टेंडर कैसे मैनेज करते थे?
- अब तक कुल कितने टेंडर मिले?
- वो टेंडर कौन-कौन से सरकारी विभाग के थे?
- टेंडर दिलाने वालों में आपके कितने मददगार शामिल हैं, उनके नाम क्या हैं?
- सबसे पहला टेंडर आपको किसकी मदद से मिला था?
- कितने सरकारी अधिकारियों के साथ आपके संबंध हैं?
- क्या आप उन अधिकारियों का नाम बता सकते हैं?
- IAS अधिकारी संजीव हंस से आपके कैसे रिश्ते हैं?
- आप IAS संजीव हंस के संपर्क में कैसे आए?
- जल संसाधन विभाग में सचिव रहते हुए IAS संजीव हंस ने आपकी कंपनी को कुल कितने टेंडर दिए?
- कमीशन के तौर पर IAS अधिकारी को आपने क्या दिया?
- भवन निर्माण विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर तारिणी दास से कैसे संपर्क हुआ?
- टेंडर दिलाने में इन्होंने आपकी कितनी मदद की?
- इन्हें कितना और किस तरह से कमीशन दिया?
- वित्त विभाग के संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी से किस प्रकार का रिश्ता था?
- आपने लगातार विदेश की यात्राएं कीं, आखिर क्या कारण था? क्यों बार-बार विदेश गए?
- छापेमारी के दौरान आपके घर से 61 प्रॉपर्टी के डीड मिले थे, इसे खरीदने के लिए रुपए कहां से आए?
- आपने कितनी दूसरी कंपनियों को टेंडर अपने संपर्क के जरिए दिलवाया?
- उनसे कमीशन के तौर पर आपको कितनी रकम मिली?
टेंडर हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार हुआ था रिशु श्री
SVU ने 28 मई 2026 को रिशु श्री को टेंडर हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। एसवीयू की टीम उनके मीठापुर स्थित आवास पहुंची और उसे अपने साथ ले गई। इसके बाद उनसे एसवीयू कार्यालय में देर रात तक पूछताछ की गई।

रिशु श्री पर क्या आरोप लगे हैं?
- जल संसाधन विभाग में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कमीशन के आधार पर अहमदाबाद की कंपनी Chevrox Constructions Private Limited को टेंडर दिलवाया था।
- जल संसाधन विभाग, भवन निर्माण विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा BMSICL में अपनी कंपनियों के पक्ष में टेंडर लेने के लिए सरकारी कर्मियों और अधिकारियों को रिश्वत देता था।
- उसी टेंडर के कार्य को अपनी कंपनी से जुड़े कर्मचारी संतोष कुमार को सौंप दिया गया, जो Matriswa Construction Pvt. Ltd. के निदेशक बताए जा रहे हैं।
- केस से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड लेकर विदेश भागने की तैयारी में था।
- सरकारी विभागों में टेंडर फिक्सिंग करके अपनी कंपनी “रिलायबल इंफ्रा सर्विसेस” को लाभ पहुंचाया। इसके लिए कई वरिष्ठ अधिकारियों और इंजीनियरों के साथ सांठगांठ की थी।
- बिहार के कई बड़े नौकरशाहों, विभागीय इंजीनियरों और राजनीतिक हस्तियों का करीबी है।
- सरकारी परियोजनाओं और ठेकों में बड़े पैमाने पर फिक्सिंग की गई और फर्जी कंपनियों के माध्यम से धन का हेरफेर किया गया।







