मामला कोर्ट में होने के बाद भी दीपक प्रकाश एक तरह से मंत्री पद पर बने रहने के लिए अड़े हुए हैं। उन्होंने गेंद एनडीए के पाले में डाल दी है। यानी अगर मंत्री पद से हटाना है तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद फैसला लें। वे खुद इस्तीफा नहीं देंगे। अगर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नियुक्ति को रद्द कर तो भी उन्हें मंत्री पद हटना पड़ेगा। क्या मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दीपक प्रकाश को मंत्री पद से बर्खास्त करेंगे? शायद दीपक प्रकाश राजनीतिक लाभ लेने की मंशा से यह दांव खेल रहे हैं कि खुद भाजपा उन्हें मंत्री पद से हटाए। तब वे भाजपा पर वादाखिलाफी का आरोप लगा कर अपने लिए सहानुभूति अर्जित कर सकते हैं। लेकिन अगर कानूनी आधार पर सरकार की किरकिरी होने लगेगी तो बाध्य हो कर मुख्यमंत्री को कठोर फैसला लेना ही पड़ेगा। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तीन ऐसे मंत्रियों को हटा चुके हैं जो सरकार के लिए परेशानी का कारण बन रहे थे।
नीतीश कुमार ने 2011 में भाजपा कोटे के मंत्री रामाधार सिंह को हटाया था
2010 में नीतीश कुमार की सरकार बनी तो भाजपा के रामाधार सिंह भी मंत्री बने थे। 1992 में जब लालू यादव की सरकार थी तब उन पर आपत्तिजनक भाषण देने एक मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में उन्हें जमानत नहीं मिली थी। कानून की नजर में वे 1995 से फरार माने जा रहे थे। उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी हुआ था। अचानक यह मामला 2011 में सुर्खियों में आ गया। तब राजद ने आरोप लगाया कि जो व्यक्ति कानून की नजर में 15 साल से फरार है उसे कैसे मंत्री बना दिया गया। चुनावी हलफनामा में मंत्री ने क्यों ये मुकदमा छिपाया? ऐसे मंत्री को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए। इस मामले में नीतीश कुमार दो दिनों तक चुप रहे। वे चाहते थे कि इस मामले का निपटारा भाजपा करे। तब मई 2011 सुशील कुमार मोदी ने कहा कि रामाधार सिंह का इस्तीफा मुख्यमंत्री कार्यालय में भिजवा दिया गया है। 2011 के अंत में जब यह कानूनी मामला निपट गया तो रामाधार सिंह को फिर मंत्री पद मिल गया।
नीतीश कुमार ने ले लिए थे तीन मंत्रियों के इस्तीफे
2011 में नीतीश ने लिया था रामाधार सिंह का इस्तीफा
2018 में मंत्री मंजू वर्मा से भी लिया था नीतीश ने इस्तीफा
2022 में राजद कोटे के मंत्री सुधाकर सिंह को देना पड़ा था इस्तीफा
2018 में विवाद के बाद मंजू वर्मा को मंत्री पद से देना पड़ा था इस्तीफा
2018 में बिहार की तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रेश्वर (चंद्रशेखर) वर्मा पर बहुत ही गंभीर आरोप लगा था। उनका नाम मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण कांड में आया था। इससे नीतीश सरकार की बहुत बदनामी हो रही थी। उस समय मंजू वर्मा ने कहा था, जब तक आरोप साबित नहीं जाते तब तक वे इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने अपने पति को निर्दोष बताया था और इस्तीफा देने से साफ इंकार कर दिया था। लेकिन जब सीबीआई की कॉल डिटेल रिकॉर्ड में मंजू वर्मा के पति और इस इस कांड के किंगपिन ब्रजेश ठाकुर के बीच बातचीत का खुलासा हुआ तो मंजू वर्मा चौतरफा घिर गयीं। फिर भी मंजू वर्मा इस्तीफा नहीं दे रहीं थी जिससे सरकार की फजीहत होने लगी। तब नीतीश कुमार ने सख्त रूप अपनाया। इसके बाद मंजू वर्मा को बाध्य हो कर इस्तीफा देना पड़ा।
नीतीश की सख्ती के बाद राजद कोटे के मंत्री सुधाकर सिंह को भी देना पड़ा था इस्तीफा
2022 में महागठबंधन की सरकार के बने दो ही महीने हुए थे कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद कोटे के मंत्री सुधाकर सिंह में ठन गयी। उस समय जगदानंद सिंह (सुधाकर सिंह के पिता) राजद के प्रदेश अध्यक्ष थे। सरकार बनने कुछ दिनों के बाद ही उन्होंने एक विवादास्पद बयान दिया था। उन्होंने कहा था, नीतीश कुमार को 2023 में तेजस्वी को सत्ता सौंप देनी चाहिए। फिर इसके बाद कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने बयान दे दिया कि वे खुद चोरों के सरदार नजर आ रहे हैं क्यों कि उनके विभाग में बहुत सारे चोर हैं। इसके बाद नीतीश कुमार सुधाकर सिंह से नाराज हो गये। उनके बयानों से सरकार और नौकरशाही का मनोबल गिर रहा था। तब नीतीश कुमार ने मंत्री सुधाकर सिंह को इस्तीफा देने के लिए संकेत दे दिया। आखिरकार अक्टूबर 2022 में सुधाकर सिंह ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।







