बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आ गया है। पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने पार्टी नेतृत्व पर वादाखिलाफी और उपेक्षा का आरोप लगाते हुए पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वह भावुक हो गए और फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने कहा, पार्टी ने मुझे वादा किया था कि MLC बनाएंगे, लेकिन मेरे साथ वादाखिलाफी की गई है। रोते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं 4 रात सो नहीं पाया, ऐसी जिंदगी भगवान किसी को ना दें।’ महागठबंधन की ओर से RJD के सुनील सिंह ने पर्चा भरा है ।
भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में फूट-फूटकर रोने वाले राजद नेता शिव चंद्र राम का इस्तीफा नामंजूर कर दिया गया है। एमएलसी टिकट न मिलने से नाराज शिव चंद्र राम ने कल सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी में उनकी अनदेखी की जा रही है। लेकिन आज आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत ने उनसे मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वह पार्टी में थे और बने रहेंगे।
शिवचंद्र राम के इस्तीफे पर सियासत तेज हो गई है। खास बात यह है कि इस मामले में अब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव उनके समर्थन में उतर आए हैं।
जनशक्ति जनता दल शिवचंद्र के साथ
तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए शिवचंद्र राम के इस्तीफे को दुखद और पीड़ादायक बताया। उन्होंने लिखा कि शिवचंद्र राम ने वर्षों तक संगठन और समाज के लिए समर्पण भाव से काम किया तथा संत रविदास के आदर्शों पर चलते हुए समाज को जोड़ने का कार्य किया।
तेज प्रताप ने कहा कि उनके योगदान का सम्मान होना चाहिए था, लेकिन उनके साथ जो व्यवहार हुआ वह निंदनीय है। उन्होंने एलान किया कि जनशक्ति जनता दल शिवचंद्र राम के संघर्ष और सम्मान की लड़ाई में उनके साथ खड़ा है।
राजद वालों ने किया जमीन पर कब्जा
इधर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी इस मुद्दे पर राजद पर तीखा हमला बोला। उन्होंने X पर पोस्ट कर कहा कि राजद में जहां मोटा माल मिलता है, वहीं गाड़ी रुक जाती है। मांझी ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति और जनजाति की जमीनों पर सबसे ज्यादा अवैध कब्जा राजद नेताओं द्वारा किया गया है। मांझी ने शिवचंद्र राम के समर्थन में खड़े होने की बात कहते हुए कहा कि जो गरीबों की जमीन तक नहीं छोड़ते, उनसे किसी न्याय की उम्मीद करना बेकार है। वैसे HAM उनके साथ है। शिवचंद्र राम के इस्तीफे और उसके बाद तेज प्रताप यादव तथा जीतन राम मांझी की प्रतिक्रियाओं ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
सुनील सिंह के नामांकन के बाद बढ़ी नाराजगी
राजद की ओर से MLC चुनाव के लिए सुनील सिंह के आज नामांकन के बाद शिवचंद्र राम की नाराजगी खुलकर सामने आई। उन्होंने SC/ST प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
हालांकि अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि वह केवल संगठनात्मक पद छोड़ रहे हैं, पार्टी की सदस्यता नहीं। वह आगे भी राजद के सक्रिय सदस्य बने रहेंगे।
1990 से राजद और सामाजिक न्याय की राजनीति से जुड़े
उन्होंने कहा कि वो साल 1990 से सामाजिक न्याय की विचारधारा और राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े हुए हैं। उन्होंने गांव-गांव जाकर संगठन को मजबूत करने का काम किया और कठिन समय में भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा।
विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पूरे बिहार में दलित, रविदास और वंचित समाज के बीच पार्टी की विचारधारा को पहुंचाने का काम किया।
दलित समाज की उपेक्षा का लगाया आरोप
आगे शिवचंद्र राम ने कहा, विधान परिषद की सीट को लेकर दलित और रविदास समाज के लोगों में काफी उम्मीद थी। लेकिन हाल के फैसले से समाज में निराशा फैल गई है।
उन्होंने पत्र में लिखा, जहां भी जाते हैं, लोग उनसे सवाल पूछते हैं और जवाब मांगते हैं। समाज की पीड़ा देखकर उनका मन व्यथित हो जाता है।
राजद से की बड़ी मांग
शिवचंद्र राम ने राजद नेतृत्व से मांग की है कि पार्टी विधान परिषद और राज्यसभा में दलित, आदिवासी, पिछड़ा, अतिपिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नीति बनाएं और इस मुद्दे पर आंदोलन खड़ी करें।
इस्तीफे के लास्ट में शिवचंद्र राम ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव का धन्यवाद किया।
उन्होंने कहा कि उनके मन में किसी व्यक्ति के प्रति कोई कटुता नहीं है, लेकिन समाज और कार्यकर्ताओं की पीड़ा को देखते हुए इस पद पर बने रहना उनके लिए नैतिक रूप से संभव नहीं था।
रेस में थे शिवचंद्र राम
बता दें कि आरजेडी की ओर से MLC कैडिंडेट की लिस्ट में शिवचंद्र राम का नाम भी चर्चा में था। जेडीयू और बीजेपी ने इस बार किसी दलित नेता को उम्मीदवार नहीं बनाया है। ऐसे में चर्चा थी कि तेजस्वी बड़ा दलित कार्ड खेल सकते हैं।
सम्राट सरकार ने राबड़ी आवास दलित मंत्री को दिया है। राबड़ी द्वारा बंगला खाली नहीं करने पर सत्ता पक्ष की ओर से कहा जा रहा है कि दलित मंत्री को घर नहीं दिया जा रहा है।
सत्ता पक्ष के इस दांव की काट के लिए उम्मीद थी कि तेजस्वी शिवचंद्र के रूप में एक दलित नेता को उच्च सदन भेज सकते हैं।

सुनील सिंह ने किया नॉमिनेशन
सुनील सिंह ने आज RJD की ओर से नॉमिनेशन किया। उन्होंने कहा, पार्टी ने जो जिम्मेदारी सौंपी है उसे निभाएंगे। गरीब, किसानों की बात सदन में उठाऊंगा। पार्टी की उम्मीद पर खरा उतरूंगा। कुछ भी हो जाए पार्टी का झंडा झुकने नहीं दूंगा।







