सूत्रों के मुताबिक, सामान्य प्रशासन विभाग से प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगस्त के पहले सप्ताह में प्रस्ताव बीपीएससी को मिल सकता है. इसके बाद आयोग भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगा. माना जा रहा है कि अगस्त के आखिरी हफ्ते तक TRE 4 का आधिकारिक विज्ञापन जारी किया जा सकता है. गौरतलब है कि बिहार के शिक्षा मंत्री पहले ही दावा कर चुके थे कि इसी महीने अधियाचना भेज दी जाएगी. अब विभाग की ओर से अधियाचना भेजे जाने की जानकारी सामने आने के बाद अभ्यर्थियों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं.
सबसे ज्यादा फायदा किन शिक्षकों को?
1- TRE-3 के 51,389 सहायक शिक्षक
सरकार ने इन्हें मार्च 2025 में नियुक्त किया था। मई 2025 तक इनकी जॉइनिंग हुई। इनका दो साल का प्रोबेशन अभी पूरा नहीं हुआ है। पुराने नियम के कारण वे तबादला के लिए आवेदन नहीं कर सकते थे। अब पहली बार पसंद के स्कूल का विकल्प मिलेगा।
2- 36,947 प्रधान शिक्षक
BPSC से चयनित प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों के प्रधान शिक्षक भी अब अपने घर के नजदीक के स्कूल में ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकेंगे।
- बिहार में BPSC द्वारा चयनित प्रधान शिक्षक (हेड टीचर) की नियुक्ति और जॉइनिंग प्रक्रिया 2025 में शुरू हुई थी। नियुक्ति पत्र वितरण के बाद चयनित अभ्यर्थियों ने 21 जुलाई 2025 से अपने आवंटित स्कूलों में पढ़ाना शुरू किया था।
- पहले चरण में चुने गए प्रधान शिक्षकों ने 21 जुलाई से 26 जुलाई 2025 के बीच अपने आवंटित स्कूल में पढ़ाना शुरू किया।
- जिनका आवंटन बाद के चरणों में हुआ या जिन जिलों में प्रक्रिया बाकी थी, वहां जिला-वार कार्यक्रम के अनुसार जॉइनिंग और पोस्टिंग की कार्रवाई आगे भी जारी रही।
- कुछ जिलों में 2026 तक आवंटन, काउंसिलिंग और जॉइनिंग से संबंधित निर्देश जारी किए गए। BPSC से नियुक्त प्रधान शिक्षकों के लिए दो वर्ष का प्रोबेशन पीरियड तय है। इसी वजह से नई स्थानांतरण नियमावली के तहत प्रोबेशन अवधि में कार्यरत प्रधान शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर संशय था।
- सरकार के ताजा फैसले के बाद अब प्रोबेशन अवधि वाले प्रधान शिक्षकों को भी स्थानांतरण के लिए आवेदन करने का अवसर मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
3- 5,971 हाई स्कूल के हेड मास्टर
हाई स्कूल के हेड मास्टरों को भी पहली बार पसंदीदा स्कूल चुनने का मौका मिलेगा। BPSC द्वारा चयनित 5,971 हेड मास्टर की पोस्टिंग जुलाई 2025 में पूरी की गई थी। शिक्षा विभाग ने 21 जुलाई से 26 जुलाई 2025 तक उनकी जॉइनिंग कराई थी।
क्या दूर-दराज तैनात शिक्षक घर के पास लौट सकेंगे?
हां, लेकिन शर्तों के साथ। सरकार का दावा है कि डिजिटल और मेरिट आधारित व्यवस्था के जरिए दूर-दराज के जिलों में पोस्टेड शिक्षकों को उनके गृह क्षेत्र के नजदीक लाया जाएगा।
हालांकि अंतिम पोस्टिंग पूरी तरह इन आधारों पर निर्भर करेगी…
- स्कूल में खाली पद
- छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR)
- मेरिट अंक
- विकल्प में भरे गए स्कूल
यानी केवल आवेदन करने से मनचाहा स्कूल मिलना तय नहीं है।
58 वर्ष से अधिक उम्र वालों को बड़ी राहत
31 मार्च 2026 तक 58 वर्ष की आयु पूरी कर चुके शिक्षकों का अनिवार्य स्थानांतरण नहीं होगा। यदि वे स्वयं आवेदन करेंगे तभी उनका ट्रांसफर किया जाएगा।
PTR बनेगा ट्रांसफर का सबसे बड़ा आधार
इस बार पहली बार पूरे राज्य में छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) के आधार पर पोस्टिंग होगी।
जहां-छात्रों की संख्या अधिक होगी और शिक्षक कम होंगे, वहां पहले पोस्टिंग होगी। जहां शिक्षक जरूरत से ज्यादा होंगे, वहां से बाकी बचे शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेजा जाएगा। जरूरत से अधिक शिक्षक तय करने के 4 मानदंड हैं…
- जरूरत से अधिक शिक्षक वाले स्कूल में 5 साल या उससे अधिक समय से कार्यरत शिक्षक पहले अधिशेष (सरप्लस) माने जाएंगे।
- यदि ऐसे कई शिक्षक हैं तो सबसे अधिक समय से कार्यरत शिक्षक पहले अधिशेष घोषित होंगे।
- अगर सभी शिक्षक 5 साल से कम समय से पोस्टेड हैं तो सबसे कम सेवा अवधि वाले शिक्षक को अधिशेष माना जाएगा।
- पूरी प्रक्रिया पोर्टल आधारित होगी। इसमें मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा।
किस आधार पर होगी सरप्लस शिक्षकों की पहचान?
- स्कूल में शिक्षकों की असल जरूरत
- शिक्षक का संवर्ग
- विषय
- जॉइनिंग डेट
- उम्र
- विभाग द्वारा तय अन्य मानदंड
ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर जारी होंगे दो अहम लिस्ट
ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर ट्रांसफर प्रोसेस शुरू होने से पहले दो लिस्ट जारी किए जाएंगे। पहली लिस्ट में बताया जाएगा कि किन स्कूलों में शिक्षक जरूरत से ज्यादा है। दूसरी लिस्ट में बताया जाएगा कि किन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। इन्हीं के आधार पर समायोजन और ट्रांसफर होगा।
जिले के भीतर ट्रांसफर कैसे मिलेगा?
- अधिकतम 30 स्कूलों का विकल्प देना होगा।
- यदि किसी भी स्कूल में खाली पद नहीं मिली तो शिक्षक वर्तमान स्कूल में ही बने रहेंगे।
- आवेदन के दौरान पांच जिलों या पांच प्रमंडलों का विकल्प देना होगा।
- दोनों विकल्प एक साथ नहीं चुने जा सकेंगे।
अगर पसंद का स्कूल नहीं मिला तो?
यदि इंटर-डिस्ट्रिक्ट या इंटर-डिवीजन ट्रांसफर स्वीकृत होने के बाद भी चुने गए 30 स्कूल में कोई सीट उपलब्ध नहीं होती है तो संबंधित जिला या प्रमंडल का आवंटन खुद से रद्द हो जाएगा।
नए जिले में जाएंगे तो सबसे जूनियर होंगे
दूसरे जिले में ट्रांसफर होने वाले शिक्षक की वरिष्ठता नए जिले में सबसे अंत में मानी जाएगी। यानी पहले से कार्यरत सभी शिक्षकों के बाद उनकी सीनियरिटी तय होगी।
यदि समान अंक वाली दो महिला शिक्षक आवेदन करती हैं तो गृह प्रखंड की महिला शिक्षक को प्राथमिकता मिलेगी। यदि दो पुरुष शिक्षकों के अंक समान होंगे तो गृह जिला वाले शिक्षक को वरीयता दी जाएगी।
स्थानांतरण प्रक्रिया सात चरणों में पूरी होगी
- छात्र-शिक्षक अनुपात निर्धारण
- अधिशेष एवं रिक्त विद्यालयों की सूची
- समायोजन
- समानुपातिकरण
- पारस्परिक स्थानांतरण
- सामान्य स्थानांतरण
- विद्यालय आवंटन
शिक्षकों को किन बातों का रखना होगा ध्यान?
- 30 स्कूल सोच-समझकर चुनें।
- जिला और प्रमंडल विकल्प सावधानी से भरें।
- सेवा अवधि का रिकॉर्ड सही रखें।
- पोर्टल पर रिक्तियां देखकर ही विकल्प भरें।
- दस्तावेजों में त्रुटि न रखें।







