बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश को एमएलसी (विधान परिषद) का टिकट नहीं मिला है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि वे कब तक मंत्री पद पर बने रहेंगे या फिर मंत्री पद से इस्तीफा देंगे। दरअसल 6 महीने के अंदर दीपक प्रकाश दूसरी बार बिहार सरकार में मंत्री बने थे, लेकिन अब उनके सामने कई मुश्किलें आ गई हैं। वो किसी भी सदन के सदस्य नहीं रहते हुए मंत्री बने थे। ऐसे में एनडीए ने उन्हें विधान परिषद का टिकट नहीं दिया तो उनके मंत्री पद पर तलवार लटकने लगी है। ऐसे में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के राजनीतिक भविष्य को नई दिशा देने के लिए उनकी पार्टी तीन नए विकल्पों पर विचार कर सकती है।
बेटे के लिए सासाराम सीट खाली करें मां, उपचुनाव के रास्ते विधानसभा पहुंचे दीपक
उपेंद्र कुशवाहा के सामने दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए रखने के लिए दो रास्ते हैं। पहला रास्ता है उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता कुशवाहा, जो सासाराम से विधायक हैं, वो विधायक पद से इस्तीफा दे दें। ऐसे में सासाराम सीट पर उपचुनाव होगा। उपचुनाव में दीपक प्रकाश को प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा जा सकता है। दीपक प्रकाश अगर जीत जाते हैं तो उनकी मंत्री पद की कुर्सी बरकरार रह सकती है।
6 महीने बाद फिर मंत्री बनें दीपक प्रकाश
दीपक प्रकाश के सामने दूसरा रास्ता ये है कि वो अभी 6 महीने तक मंत्री पद पर बने रहें। 6 महीने पूरे होने पर वो मंत्री पद छोड़ दें। इसके बाद बिहार सरकार कुछ महीने बाद उन्हें एक बार फिर से मंत्री बना दे। हालांकि इसके लिए एनडीए के वरिष्ठ नेताओं और सीएम सम्राट चौधरी की रजामंदी जरूरी है।
तत्काल मंत्री पद छोड़ें और राज्य का दौरा करें दीपक प्रकाश
तीसरा विकल्प ये हो सकता है कि दीपक प्रकाश के तत्काल मंत्री पद छोड़ दें और राज्य का दौरा करें। बिहार में कुशवाहा का जनसंख्या यादवों के बाद सबसे ज्यादा है। ऐसे में दीपक प्रकाश को यात्रा के जरिए कुशवाहा समाज की सहानुभूति मिल सकती है। हालांकि अगर वो ऐसा करते हैं तो उन्हें एनडीए की नाराजगी भी मोल लेनी पड़ सकती है।
दीपक का इस्तीफा देने का सवाल क्यों उठ रहा है, मुझे नहीं मालूम: कुशवाहा
इधर दीपक प्रकाश के मंत्रीपद और उनके भविष्य को लेकर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि उन्हें सरकार में मंत्री बनाने का फैसला एनडीए ने ही लिया था, इसलिए एनडीए जब तक चाहेगा, वे फिलहाल मंत्री बने रहेंगे। कुशवाहा ने कहा कि जिस दिन दीपक प्रकाश ने मंत्री पद की शपथ ली थी, उस समय वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। आज भी उनकी स्थिति वैसी ही बनी हुई है। इस्तीफा देने का सवाल क्यों उठ रहा है, मुझे नहीं मालूम है। उन्होंने कहा कि एनडीए के जिन सभी उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है, उन्हें मेरी शुभकामनाएं। उनकी जीत भी पक्की है, वे सभी निर्विरोध चुने जाएंगे।







