बिहार में विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून है. जिन सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें 9 तो नियमित सीटें हैं और 1 पर उपचुनाव होना है. नीतीश कुमार के इस्तीफे से 10वीं सीट रिक्त हुई है. विधानसभा में विधायकों के संख्या बल के हिसाब से नियमित 9 सीटों में 8 पर एनडीए के घटक दलों की दावेदारी बनती है. भाजपा और जेडीयू ने अपने हिस्से की 4-4 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं. चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (एलजेपी-आर) ने भी अपने कोटे से अरशद अंसारी को उम्मीदवार बनाया है. महागठबंधन के 25 विधायक हैं. इनके अलावा घटक दलों के अन्य 10 विधायकों के समर्थन की उम्मीद की जा रही है. एक सीट जीतने के लिए 25 विधायकों की जरूरत है. अगर महागठबंधन ने उम्मीदवार दिया तो एक सीट उसके खाते में जा सकती है.
दीपक प्रकाश पर फंसा पेच
पर, पेंच दूसरा फंस गया है. एक तो 9वें उम्मीदवार के रूप में एलजेपी-आर ने अरशद के नाम की घोषणा कर दी है तो दूसरा पेंच यह कि बिना किसी सदन का सदस्य बने राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) चीफ उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश दूसरी बार मंत्री बनाए गए हैं. अगर वे विधान परिषद नहीं पहुंचते हैं तो उनका मंत्री बने रहना मुश्किल होगा. बिना किसी सदन का सदस्य बने कोई मंत्री बनता है तो उसे 6 महीने के अंदर किसी सदन का सदस्य निर्वाचित-मनोनीत होना जरूरी है. एनडीए कोटे से मौजूदा स्थिति में दीपक प्रकाश का एमएलसी बनना असंभव दिख रहा है. एनडीए की अग्रणी पार्टी भाजपा की सहमति से ही दीपक को मंत्री पद मिला था. दूसरी बार उनके शपथ समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे. इसलिए यह भी नहीं माना जा सकता कि भाजपा की गैर जानकारी में उन्हें मंत्री बनाया है.
पर, पेंच दूसरा फंस गया है. एक तो 9वें उम्मीदवार के रूप में एलजेपी-आर ने अरशद के नाम की घोषणा कर दी है तो दूसरा पेंच यह कि बिना किसी सदन का सदस्य बने राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) चीफ उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश दूसरी बार मंत्री बनाए गए हैं. अगर वे विधान परिषद नहीं पहुंचते हैं तो उनका मंत्री बने रहना मुश्किल होगा. बिना किसी सदन का सदस्य बने कोई मंत्री बनता है तो उसे 6 महीने के अंदर किसी सदन का सदस्य निर्वाचित-मनोनीत होना जरूरी है. एनडीए कोटे से मौजूदा स्थिति में दीपक प्रकाश का एमएलसी बनना असंभव दिख रहा है. एनडीए की अग्रणी पार्टी भाजपा की सहमति से ही दीपक को मंत्री पद मिला था. दूसरी बार उनके शपथ समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे. इसलिए यह भी नहीं माना जा सकता कि भाजपा की गैर जानकारी में उन्हें मंत्री बनाया है.
उपेंद्र भी उलझने से बचे थे
राज्यसभा चुनाव में भी आरएलएम को लेकर मामला फंसा था. जेडीयू और भाजपा ने अपने उतने उम्मीदवार घोषित कर दिए थे, जितने की गुंजाइश थी. उपेंद्र कुशवाहा के लिए कोई सीट ही नहीं बची थी. पर, भाजपा ने आखिरकार मामला सलटा लिया. उसने अपने उम्मीदवार को 5वां उम्मीदवार बनाया. उसके लिए जोड़-तोड़ हुई. राजद के एक मुस्लिम विधायक और कुछ कांग्रेस के लोगों ने भाजपा का साथ दिया और शिवेश राम की जीत सुनिश्चित की. राजद कोटे में जाती सीट भाजपा ने झटक ली. उपेंद्र कुशवाहा सिर्फ 4 विधायक होने के बावजूद एनडीए के दूसरे घटक दलों के सहयोग से जीत गए थे. महागठबंधन के साथ एआईएमआईएम और बसपा के एक विधायक को लेकर एक सीट जीतने की पूरी संभावना दिख रही थी. आरजेडी उम्मीदवार को कांग्रेस विधायकों के साथ उसके ही एक एमएलए ने गच्चा दे दिया.
राज्यसभा चुनाव में भी आरएलएम को लेकर मामला फंसा था. जेडीयू और भाजपा ने अपने उतने उम्मीदवार घोषित कर दिए थे, जितने की गुंजाइश थी. उपेंद्र कुशवाहा के लिए कोई सीट ही नहीं बची थी. पर, भाजपा ने आखिरकार मामला सलटा लिया. उसने अपने उम्मीदवार को 5वां उम्मीदवार बनाया. उसके लिए जोड़-तोड़ हुई. राजद के एक मुस्लिम विधायक और कुछ कांग्रेस के लोगों ने भाजपा का साथ दिया और शिवेश राम की जीत सुनिश्चित की. राजद कोटे में जाती सीट भाजपा ने झटक ली. उपेंद्र कुशवाहा सिर्फ 4 विधायक होने के बावजूद एनडीए के दूसरे घटक दलों के सहयोग से जीत गए थे. महागठबंधन के साथ एआईएमआईएम और बसपा के एक विधायक को लेकर एक सीट जीतने की पूरी संभावना दिख रही थी. आरजेडी उम्मीदवार को कांग्रेस विधायकों के साथ उसके ही एक एमएलए ने गच्चा दे दिया.
क्या होगा दीपक प्रकाश का
राज्यसभा चुनाव में सभी को यह आशंका थी कि इस बार भाजपा उनका साथ नहीं देगी. पर, वे तब भी अभी की तरह निराश नहीं दिखे थे. दीपक प्रकाश के मामले में उन्हें किसी ने परेशान होते नहीं देखा है. बिना एमएलए या एमएलसी बने उन्होंने नीतीश कुमार की सरकार में बेटे को मंत्री बनवा दिया. जब नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद नई सरकार बनी तो दूसरी बार उन्हीं स्थितियों के बावजूद उन्होंने सम्राट सरकार में मंत्री पद की दोबारा शपथ ली. शनिवार को मीडिया से बातचीत में उपेंद्र कुशवाहा निश्चिंत दिखे. इस बार में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि नामिनेशन परसों है न, इंतजार कीजिए. सब पता चल जाएगा. इससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें इसे लेकर कोई परेशानी नहीं दिखती. संभव है कि इस मुद्दे पर भाजपा नेतृत्व से उनकी बातचीत हुई हो. पर, जो स्थिति अभी दिख रही है, उससे परेशानी का आभास तो हो ही रहा है.
राज्यसभा चुनाव में सभी को यह आशंका थी कि इस बार भाजपा उनका साथ नहीं देगी. पर, वे तब भी अभी की तरह निराश नहीं दिखे थे. दीपक प्रकाश के मामले में उन्हें किसी ने परेशान होते नहीं देखा है. बिना एमएलए या एमएलसी बने उन्होंने नीतीश कुमार की सरकार में बेटे को मंत्री बनवा दिया. जब नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद नई सरकार बनी तो दूसरी बार उन्हीं स्थितियों के बावजूद उन्होंने सम्राट सरकार में मंत्री पद की दोबारा शपथ ली. शनिवार को मीडिया से बातचीत में उपेंद्र कुशवाहा निश्चिंत दिखे. इस बार में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि नामिनेशन परसों है न, इंतजार कीजिए. सब पता चल जाएगा. इससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें इसे लेकर कोई परेशानी नहीं दिखती. संभव है कि इस मुद्दे पर भाजपा नेतृत्व से उनकी बातचीत हुई हो. पर, जो स्थिति अभी दिख रही है, उससे परेशानी का आभास तो हो ही रहा है.
क्या दिख रही हैं संभावनाएं
एनडीए के पास 201 विधाायक हैं. एक सीट जीतने के लिए 25 विधायकों का समर्थन जरूरी है. महागठबंधन के पास वैसे 41 विधायक हैं, लेकिन राज्यसभा चुनाव में गच्चा देने वाले विधायकों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. इससे राजद को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि एक सीट के लिए सिर्फ 25 विधायकों का ही समर्थन चाहिए. इस हिसाब से एनडीए के खाते में 8 सीटें जानी तो कन्फर्म हैं. पर, चिराग के 9वें उम्मीदवार का क्या होगा. उन्होंने अरशद को उम्मीदवार बना कर राजनीतिक दांव चल दिया है. महागठबंधन और एआईएमआईएम के मुस्लिम विधायक अरशद के पक्ष में एकजुट हो सकते हैं. दीपक प्रकाश के नाम की दूर-दूर तक चर्चा नहीं हो रही. ऐसी स्थिति में चुनावी पंडित और राजनीतिक मामलों के जानकार भी समझ नहीं पा रहे कि उनके साथ क्या सलूक होगा.
एनडीए के पास 201 विधाायक हैं. एक सीट जीतने के लिए 25 विधायकों का समर्थन जरूरी है. महागठबंधन के पास वैसे 41 विधायक हैं, लेकिन राज्यसभा चुनाव में गच्चा देने वाले विधायकों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. इससे राजद को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि एक सीट के लिए सिर्फ 25 विधायकों का ही समर्थन चाहिए. इस हिसाब से एनडीए के खाते में 8 सीटें जानी तो कन्फर्म हैं. पर, चिराग के 9वें उम्मीदवार का क्या होगा. उन्होंने अरशद को उम्मीदवार बना कर राजनीतिक दांव चल दिया है. महागठबंधन और एआईएमआईएम के मुस्लिम विधायक अरशद के पक्ष में एकजुट हो सकते हैं. दीपक प्रकाश के नाम की दूर-दूर तक चर्चा नहीं हो रही. ऐसी स्थिति में चुनावी पंडित और राजनीतिक मामलों के जानकार भी समझ नहीं पा रहे कि उनके साथ क्या सलूक होगा.
इस्तीफा या हटेगा कैंडिडेट?
स्पष्ट तौर पर 2 संभावनाएं दिख रही हैं. एक तो यह कि दीपक प्रकाश मंत्री पद से इस्तीफा दे दें और आरएलएम के 4 विधायकों में किसी से इस्तीफा दिला कर उन्हें विधानसभा के रास्ते सदन में लाया जाए. पर, ऐसा होता है, तब भी उन्हें मंत्री पद छोड़ना ही पड़ेगा. इसलिए कि सीट खाली होने पर उपचुनाव में वक्त लगेगा. दीपक के पास सिर्फ 5 महीने का ही वक्त बचा है. दूसरा आसान रास्ता यह भी दिखता है कि भाजपा या जेडीयू में से कोई अपना एक उम्मीदवार वापस ले ले. पहले चर्चा थी कि भाजपा और जेडीयू 3-3 सीटों पर उम्मीदवार देंगे. बाकी बची 2 सीटों में एक आरएलएम के दीपक प्रकाश और दूसरी चिराग पासवान की एलजेपी-आर को दी जाएगा. ऐसा होने पर निर्विरोध निर्वाचन से सब कुछ आसान हो जाता. लेकिन, ऐसा नहीं हो पाया. भाजपा और जेडीयू ने ही 8 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए. चिराग का उम्मीदवार 9वां है और दीपक प्रकाश 10वें होंगे.
स्पष्ट तौर पर 2 संभावनाएं दिख रही हैं. एक तो यह कि दीपक प्रकाश मंत्री पद से इस्तीफा दे दें और आरएलएम के 4 विधायकों में किसी से इस्तीफा दिला कर उन्हें विधानसभा के रास्ते सदन में लाया जाए. पर, ऐसा होता है, तब भी उन्हें मंत्री पद छोड़ना ही पड़ेगा. इसलिए कि सीट खाली होने पर उपचुनाव में वक्त लगेगा. दीपक के पास सिर्फ 5 महीने का ही वक्त बचा है. दूसरा आसान रास्ता यह भी दिखता है कि भाजपा या जेडीयू में से कोई अपना एक उम्मीदवार वापस ले ले. पहले चर्चा थी कि भाजपा और जेडीयू 3-3 सीटों पर उम्मीदवार देंगे. बाकी बची 2 सीटों में एक आरएलएम के दीपक प्रकाश और दूसरी चिराग पासवान की एलजेपी-आर को दी जाएगा. ऐसा होने पर निर्विरोध निर्वाचन से सब कुछ आसान हो जाता. लेकिन, ऐसा नहीं हो पाया. भाजपा और जेडीयू ने ही 8 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए. चिराग का उम्मीदवार 9वां है और दीपक प्रकाश 10वें होंगे.







