राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में शताब्दी वर्ष के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. संघ इस समय अपने शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों को देशव्यापी स्तर पर आगे बढ़ा रहा है. इसी क्रम में संघ के सरसंघचालक मोहनराव भागवत रविवार (7 जून) की शाम बिहार के मुंगेर पहुंच रहे हैं. उनका यह तीन दिवसीय प्रवास संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस दौरान वे संघ शिक्षा वर्ग में भाग लेने वाले स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन करेंगे और विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों में शामिल होंगे. प्राप्त जानकारी के अनुसार संघ प्रमुख मुंगेर के पुरानीगंज स्थित सरस्वती विद्या मंदिर परिसर में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग में हिस्सा लेंगे. मोहन भागवत के मुंगेर आगमन और प्रवास को लेकर स्थानीय स्तर पर स्वयंसेवकों में उनके आगमन को लेकर उत्साह का माहौल है.
700 से अधिक स्वयंसेवक ले रहे प्रशिक्षण
बता दें कि मोहन भागवत स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर, पुरानीगंज परिसर में आयोजित ‘संघ शिक्षा वर्ग’ में पूरे तीन दिनों तक प्रवास करेंगे. संघ प्रमुख के इस महत्वपूर्ण दौरे को लेकर मुंगेर जिला प्रशासन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांतीय संगठन की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच स्थानीय स्वयंसेवकों में संघ प्रमुख के आगमन को लेकर जबरदस्त उत्साह का माहौल देखा जा रहा है.संघ सूत्रों के अनुसार वर्तमान में चल रहे तीन प्रशिक्षण वर्गों में करीब 700 स्वयंसेवक भाग ले रहे हैं. इन वर्गों में विभिन्न आयु वर्ग और जिम्मेदारियों वाले स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. प्रशिक्षण का उद्देश्य संगठनात्मक क्षमता का विकास, नेतृत्व कौशल को मजबूत करना और समाज जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार करना है.
मुंगेर ही क्यों? अंग प्रदेश में पैठ मजबूत करने की बड़ी रणनीति
सूत्रों के अनुसार, इस शताब्दी वर्ष के बीच संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत का बिहार के मुंगेर पहुंचना महज एक सामान्य सांगठनिक दौरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे सामाजिक और रणनीतिक मायने छिपे हैं. जानकारों की मानें तो संघ प्रमुख के प्रवास के लिए मुंगेर और अंग प्रदेश के इस इलाके को चुनना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. दरअसल, मुंगेर, भागलपुर और आसपास के ये इलाके वैचारिक रूप से हमेशा से समाजवादियों का गढ़ रहे हैं. संघ अपने शताब्दी वर्ष में अपनी पहुंच समाज के उस अंतिम पायदान तक बनाना चाहता है, जो अब तक दक्षिणपंथी विचारधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाया है. तीन दिनों के इस प्रवास के दौरान मोहन भागवत विभिन्न सत्रों में संघ की कार्यप्रणाली पर तो बात करेंगे ही, लेकिन उनका मुख्य फोकस इस क्षेत्र के पारंपरिक सामाजिक ताने-बाने को भेदकर ‘हिंदू समाज की एकजुटता’ को एक नई धार देना है.
संघ के मंथन से निकलेगा ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का मंत्र
बता दें कि सरस्वती विद्या मंदिर के इस शिविर में वर्तमान में तीन अलग-अलग श्रेणियों के प्रशिक्षण वर्गों को मिलाकर लगभग 700 से अधिक चयनित स्वयंसेवक कड़े अनुशासन के बीच आवासीय ट्रेनिंग ले रहे हैं. मोहन भागवत का इन स्वयंसेवकों के बीच आना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये 700 मास्टर ट्रेनर्स सीधे संघ प्रमुख से मंत्र लेकर बिहार और झारखंड के सुदूर ग्रामीण इलाकों में जाएंगे. संघ सूत्रों के अनुसार, मोहन भागवत इन स्वयंसेवकों को ‘सामाजिक समरसता’ का वह व्यावहारिक पाठ पढ़ाएंगे, जिससे जातिगत रूप से बंटे बिहार के समाज में संघ की स्वीकार्यता को और व्यापक बनाया जा सके. स्वयंसेवकों को यह सिखाया जाएगा कि कैसे हर वर्ग, जाति और उपजाति के लोगों को एक ही शाखा के नीचे लाकर खड़ा करना है.
अंतिम पड़ाव में संघ का ‘बदलाव मॉडल’ और प्रशासनिक मुस्तैदी
इस दौरे का एक और बड़ा कोण यह है कि 100 साल पूरे होने पर संघ अपनी पुरानी छवि को बदलकर खुद को 21वीं सदी की आधुनिक चुनौतियों के अनुकूल ढाल रहा है. बंद कक्षों की बैठकों में इस बात पर भी विमर्श होना तय है कि कैसे राष्ट्र सेवा, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों के जरिए युवाओं को सीधे संघ से जोड़ा जाए. इस हाई-प्रोफाइल दौरे के रणनीतिक महत्व को देखते हुए मुंगेर जिला प्रशासन ने भी सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं. सरसंघचालक का यह तीन दिवसीय प्रवास जब 9 जून को समाप्त होगा, तब तक बिहार के सांगठनिक ढांचे को ‘शताब्दी संकल्प’ का वह रोडमैप मिल चुका होगा, जिसके परिणाम आने वाले समय में जमीन पर साफ दिखाई देंगे.







